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उत्तरकाशी मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना का सर्वे करेगी एक्सपर्ट टीम, जानिए क्या है बड़ी मुसीबत

उत्तरकाशी जिले में मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना द्वितीय की टनल में हो रहा पानी का रिसाव, अब एक्सपर्ट की टीम करेगी जांच

Maneri Bhali Hydroelectric Project Water Leakage
जुलाई 2023 में पानी का रिसाव (फाइल फोटो- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : January 9, 2026 at 7:16 PM IST

3 Min Read
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देहरादून: उत्तरकाशी में मौजूद मनेरी भाली द्वितीय परियोजना चिंता का सबब बनी हुई है. लंबे समय से इस परियोजना में पानी का रिसाव हो रहा है, जो कि प्रोजेक्ट की मुश्किलों को बढ़ा रहा है. बड़ी बात ये है कि ये रिसाव कहां से हो रहा है? ये भी नहीं पता चल सका है. जिसके लिए अब सर्वे की तैयारी हो रही है.

उत्तरकाशी जिले में स्थित मनेरी भाली द्वितीय जल विद्युत परियोजना एक बार फिर चर्चा में है. लंबे समय से परियोजना की टनल में हो रहे पानी के रिसाव ने प्रशासन और ऊर्जा विभाग की चिंता बढ़ा दी है. अब इस समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए परियोजना में विशेष सर्वे कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है. इस सर्वे के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि आखिर टनल में पानी का रिसाव किस स्थान से और किन कारणों से हो रहा है?

सर्वे से पहले परियोजना की टनल में पानी को पूरी तरह से रोका जाएगा. इसके बाद करीब डेढ़ से दो किलोमीटर लंबे क्षेत्र का निरीक्षण विशेषज्ञों की टीम की ओर से किया जाएगा. एक्सपर्ट्स टनल की संरचना, चट्टानों की स्थिति और संभावित कमजोर हिस्सों का बारीकी से अध्ययन करेंगे. ताकि, रिसाव के वास्तविक कारणों की पहचान की जा सके.

मनेरी भाली द्वितीय जल विद्युत परियोजना में पानी का रिसाव कोई नई समस्या नहीं है. काफी समय से टनल के भीतर रिसाव की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन साल 2021 के बाद से रिसाव की मात्रा में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे इसे गंभीर माना जाने लगा. वर्तमान स्थिति में टनल से करीब 1500 लीटर प्रति सेकंड की दर से पानी का रिसाव हो रहा है. हालांकि, सुरक्षा की दृष्टि से इस पानी को चैनेलाइज कर नदी की ओर मोड़ दिया गया है. ताकि, आसपास के इलाकों को कोई नुकसान न पहुंचे.

परियोजना से जुड़े अधिकारी लंबे समय से इस रिसाव को रोकने के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक रिसाव की मुख्य जगह की पहचान नहीं हो सकी है. यही कारण है कि स्थायी समाधान नहीं निकल पाया. मामला उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग तक भी पहुंच चुका है, जिसके बाद आयोग ने इसकी गंभीरता को देखते हुए दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

"आयोग के संज्ञान में यह मामला आया है. सुरक्षा के मद्देनजर रिसाव से जुड़े कार्यों के लिए बजट को मंजूरी दी गई है. 304 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना में रिसाव की संवेदनशीलता को देखते हुए करीब 13 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है."- एमएल प्रसाद, अध्यक्ष, उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग

भूकंप की स्थिति में खतरनाक होने की आशंका: फिलहाल, परियोजना में बनी स्थिति को अत्यधिक खतरनाक नहीं माना जा रहा है, लेकिन भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील उत्तरकाशी जिले में किसी बड़े भूकंप की स्थिति में यह रिसाव गंभीर खतरे का रूप ले सकता है. इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए अब सर्वे और सुधार कार्यों को लेकर अधिक गंभीरता दिखाई जा रही है. ताकि, भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके.

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