सुदेशना रूहान ने कैंसर पर किया रिसर्च, 13 साल पहले MTech करने के बाद इंजीनियरिंग की ठुकरा दी नौकरी, कैंसर मरीजों का बनी सहारा
सुदेशना रूहान से खास बातचीत में जानिए कैसे छत्तीसगढ़ में फैल रहा है कैंसर और इससे कैसे बचें.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : November 12, 2025 at 9:12 PM IST
रायपुर: राजधानी रायपुर की रहने वाली सुदेशना रूहान ने साल 2012 में रायपुर के NIT से एमटेक किया. इसके बाद उन्हें इंजीनियरिंग की नौकरी मिल रही थी, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया. क्योंकि एमटेक की पढ़ाई करते समय सुदेशना ने कैंसर पर रिसर्च किया था. उन्होंने कैंसर मरीजों की सेवा करने के लिए अपनी इंजीनियरिंग की नौकरी ठुकरा दी. यहीं से सुदेशना ने अपना सफर शुरू किया. अब वे एक फाउंडेशन के जरिए छत्तीसगढ़ में कैंसर जैसी बीमारी को लेकर ग्रामीण इलाके के लोगों को जागरूक कर रही हैं. ये कितनी बड़ी चुनौती है. किस वजह से कैंसर महिला और पुरुषों में होता है. किस तरह के कारक हैं. इन्हीं सब मुद्दों पर ईटीवी भारत से सुदेशना ने खास बातचीत की.
सवाल- छत्तीसगढ़ में कैंसर को लेकर क्या केस स्टडी है, छत्तीसगढ़ में क्या कुछ होना चाहिए ?
जवाब- कैंसर के अलग-अलग प्रकार हैं. जब हम छत्तीसगढ़ में आते हैं तो मुंह का कैंसर, मुंह से लेकर मस्तिष्क और यह गर्दन तक पहुंच रहा है. इसके अलावा दो कैंसर हैं, जिसमें हम महिलाएं सबसे ज्यादा पीड़ित हैं. इसमें पहला स्तन कैंसर जिसे ब्रेस्ट कैंसर कहते हैं. दूसरा बच्चेदानी का मुंह का कैंसर या सर्वाइकल कैंसर.
सवाल- किस तरह के कैंसर हैं जो महिला या पुरुषों में ज्यादा दिखाई दिए हैं?
जवाब- जब भी हम पुरुषों की बात करते हैं तो मुंह और फेफड़े का कैंसर हम भारत में देख रहे हैं. ये पुरुषों में सबसे ज्यादा है. इसका एक प्रमुख कारण तंबाकू का सेवन या सिगरेट का सेवन बहुत ज्यादा है. गुटखा खाना धूम्रपान करना तंबाकू खाना यह बहुत बड़े वर्ग में फैला हुआ है. इसके अलावा जैसे महिलाओं की बात की जाए तो सबसे ज्यादा सर्वाइकल कैंसर के मामले सामने आए हैं. साल 2024 के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा पुरुषों की संख्या लंग कैंसर में थी. ये संख्या 73 हजार के आसपास है. वहीं महिलाओं में स्तर कैंसर की संख्या लगभग 2 लाख के ऊपर है, लेकिन यह तो केवल 1 साल का आंकड़ा है.
सवाल- छत्तीसगढ़ के लोग इतने सक्षम नहीं हैं कि वह कैंसर जैसी बीमारी का इलाज करा सके इसके लिए क्या कुछ किया जा सकता है?
जवाब- यह बहुत जरूरी सवाल है, कैंसर का जो इलाज है छत्तीसगढ़ में ही नहीं पूरे भारतवर्ष के साथ ही विश्व में सबसे महंगे ट्रीटमेंट में से एक है. हेल्थ कार्ड के माध्यम से कई योजनाएं चल रही हैं, जो 5 लाख रुपए तक की राशि देती है. लेकिन इसमें एक बात है जिस पर चर्चा होनी चाहिए कि कैंसर जैसे इलाज के लिए अपने जेब से बहुत ज्यादा पैसे खर्च करने होते हैं. क्योंकि इस बीमारी के लिए कई तरह के डायग्नोसिस करवाने की जरूरत पड़ती है. जिनको खुद से मरीज को या फिर उनके परिवार को करवाने होते हैं. इसके बाद ही इलाज शुरू होना संभव है. उसके बाद ही सरकार की तरफ से हेल्थ कार्ड के माध्यम से 5 लाख रुपए तक की सुविधा मिल पाएगी. उसके पहले का जो खर्च है या कई बार इलाज के दौरान कई ऐसे खर्च होते हैं जैसे मरीज का रहना खाना-पीना उसके साथ जो मरीज के देखभाल करने वाले हैं वो भी इसी शहर में आकर रहते हैं. इस तरह के कई ऐसे खर्च हैं, जो अपनी जेब से वहन करना पड़ता है. ये महंगा पड़ता है.
सवाल- कैंसर से कैसे बचा जाए और किस तरह के कारक हैं जिसकी वजह से कैंसर होता है?
जवाब- कैंसर के बारे में यह जानना बहुत जरूरी है कि यह एक अनुवांशिक बीमारी है, जो सेल्यूलर मेकअप होता है. डीएनए होता है वह पेरेंट टू चाइल्ड एक पूरा जेनरेशन होता है. उस वजह से यह अनुवांशिक बीमारी है. इसके अलावा जीवन शैली भी बहुत बड़ा रोल प्ले करती है. खासकर धूम्रपान या शराब का सेवन या फिर बहुत ज्यादा स्ट्रेस. प्रोसेस फूड जो आजकल बहुत ज्यादा कॉमन हो गए हैं ये भी एक बहुत बड़ा कारण है. इसके अलावा आनुवांशिक कारण, जीवन शैली के कारण कई बार बिना किसी कारण के भी कैंसर होता है.

सवाल- छत्तीसगढ़ में कैंसर को लेकर कितनी बड़ी चुनौती है क्या कारण है?
जवाब- मुझे लगता है कि हमारे राज्य की जो ज्योग्राफी हैं. अगर हम उत्तर से लेकर दक्षिण तक जाएं तो पूरा कैंसर के मरीज हर जिले और हर गांव में मिलते हैं. वहीं कैंसर का जो इलाज है वह बहुत केंद्रित और सीमित है, जो कि रायपुर में ही होता है. जिसमें कीमोथेरेपी के बाद सर्जरी, सेकाई, रेडियोथैरेपी इस तरह का इलाज केवल रायपुर में ही होता है. जब तक कि यह पूरा इलाज विकेंद्रित नहीं होता. दक्षिण से लेकर उत्तर तक हमारे पास ऐसे तीन सेंटर नहीं होते तब तक मरीज का एक दूसरे शहर में रहना अपनी जेब से पैसे खर्च करना और इलाज कराना यह अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती है.
इसके अलावा जिस चुनौती से हम गुजर रहे हैं वो ये है कि हमारे पास राज्य में ऐसा कोई संस्थान नहीं है जहां पर कैंसर के आंकड़े सटीक मिले. जैसे छत्तीसगढ़ के अपने और पृथक आंकड़े हो वो मिलें, जितनी जल्दी हम इस दिशा में काम करेंगे मुझे लगता है कि छत्तीसगढ़ के व्यक्तिगत केसेस, हमारे केस स्टडी, हमारे पेशेंट को इन आंकड़ों से मदद मिल सकती है.
सवाल- छत्तीसगढ़ में हेल्थ कार्ड के माध्यम से कई योजनाओं का संचालन हो रहा है. क्या इससे कैंसर मरीजों का इलाज होता है या फिर मरीज अपनी जेब से पैसे खर्च करते हैं?
जवाब- हेल्थ कार्ड के माध्यम से मरीज को 5 लाख रुपए सरकार के माध्यम से मुहैया हो जाती है, जो गरीबी रेखा के नीचे आते हैं. लेकिन उसके पहले कैंसर की पुष्टि होते तक सारा खर्च मरीज को अपनी जेब से करने होते हैं. डायग्नोसिस या जांच जिसे हम कहते हैं उसे खुद से करना पड़ता है. यही खर्च सबसे बड़ा होता है. बड़ों को इसमें कम से कम 15 से 20 हजार रुपए तक खर्च आता है. वहीं जब बच्चों के कैंसर होते हैं तो ये और भी जटिल होता है. उसका खर्च जो शुरुआती जांच में लगता है वह 25 से 30 हजार रुपए तक होता है.
सवाल- कैंसर मरीजों के लिए आप पिछले 13 सालों से काम कर रहे हैं, इसके साथ ही निरामया कैंसर फाऊंडेशन चला रही हैं आपके मन में कैसे आया कि कैंसर मरीजों के लिए काम किया जाए?
जवाब- साल 2012 में एमटेक कर रही थी उस दौरान मेरा रिसर्च कैंसर के मरीजों पर था. मेकाहारा कैंसर मरीजों के लिए एक सेंटर हुआ करता था. जहां पर छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के मरीज आते थे. मेरी रिसर्च के दौरान कुछ लोग नहीं रहे. उन्हीं चीजों ने मुझे प्रभावित किया. तब से लेकर आज तक मैं कैंसर पीड़ित मरीजों की सेवा में तत्पर हूं. यह कहना ठीक होगा कि मैं इस काम से संतुष्ट हूं.

