ग्राम विकास चौपाल पर गहलोत ने उठाए सवाल, कहा- चंद लोगों की चौपाल बनी, मुख्यमंत्री में आलोचना सुनने की क्षमता नहीं
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि ग्राम विकास रथ अभियान मात्र सरकार की छवि चमकाने का काम है. इसका गांवों में विरोध हो रहा है.

Published : May 23, 2026 at 11:59 AM IST
जयपुर: प्रदेश की भजनलाल सरकार की ओर से शुरू की गई ग्राम विकास चौपाल को लेकर सरकार जहां वाहवाही लूट रही है और ज्यादा से ज्यादा लोगों की समस्याएं सुनकर उनके निस्तारण का दावा किया जा रहा है, वहीं राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार की इस चौपाल को लेकर सवाल खड़े किए हैं. गहलोत ने कहा कि सरकार ने इसे केवल अपनी छवि चमकाने का अभियान बना रखा है और यह केवल चंद लोगों की ही चौपाल बनकर रह गई है.
गहलोत ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा कि राजस्थान में भाजपा सरकार की ओर से आयोजित की जा रही 'ग्राम विकास चौपाल' ग्रामीण समस्याओं का फीडबैक लेने एवं उनके समाधान का एक अच्छा अवसर थी, परन्तु सरकार ने इसे केवल छवि चमकाने का अभियान बना दिया है. इन चौपालों में जहां सभी ग्रामीणों को बुलाया जाना चाहिए था और उनकी समस्याएं सुनकर हल करना चाहिए था, वहां केवल भाजपा कार्यकर्ताओं और योजनाओं के लाभार्थियों को ही आमंत्रित किया जा रहा है, ताकि सरकार की कोई आलोचना न सुननी पड़े. ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री में अपनी सरकार की आलोचना सुनने एवं जनता की समस्याओं से रूबरू होने का माद्दा नहीं है, जिसके कारण यह ग्राम विकास चौपाल की बजाय 'चुनिंदा लोगों की चौपाल' बनकर रह गई है.
राजस्थान में भाजपा सरकार द्वारा आयोजित की जा रही 'ग्राम विकास चौपाल' ग्रामीण समस्याओं का फीडबैक लेने एवं उनके समाधान का एक अच्छा अवसर थी। परन्तु सरकार ने इसे केवल छवि चमकाने का अभियान बना दिया है। इन चौपालों में जहां सभी ग्रामीणों को बुलाया जाना चाहिए था, उनकी समस्याएं सुनकर हल…
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) May 23, 2026
ग्राम विकास रथों का हो रहा विरोध: पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी प्रकार 'ग्राम विकास रथ' तो मात्र मजाक का पात्र बनकर रह गए हैं. ढाई साल में सरकार ने एक भी ऐसा काम नहीं किया, जिससे प्रदेश की जनता को बड़े स्तर पर लाभ हो, परन्तु विकास रथ रवाना कर दिए गए, जिनका गांवों में विरोध हो रहा है. पहले ग्रामीण और शहरी सेवा शिविर और अब विकास रथ- भाजपा सरकार के ये सभी अभियान विफल होते जा रहे हैं. भाजपा सरकार को जनहित में आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों पैदा हो रही है.

