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कोटा का नेहरू पार्क बदहाल: टूटे झूले, कड़क ट्रैक और चूहों का आतंक, ओपन जिम पूरी तरह से बर्बाद

कोटा के नेहरू पार्क में कचरे की बदबू से वॉकर्स परेशान परेशान हैं. कोटा से मनीष गौतम की रिपोर्ट..

REALITY CHECK OF PARKS IN KOTA,  ETV BHARAT PARK SAFETY CAMAPAIGN
कोटा में बदहाल पार्क. (ETV Bharat gfx)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : May 27, 2026 at 6:57 AM IST

6 Min Read
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कोटा : नयापुरा से रेलवे स्टेशन के बीच रहने वाले आम लोगों के लिए सुबह की ताजी हवा और सुकून के कुछ पल बिताने का इकलौता ठिकाना 'नेहरू पार्क' इस समय खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. यह एक ऐसा सार्वजनिक गार्डन है, जहां हर रोज सुबह-शाम सैकड़ों की तादाद में बुजुर्ग, महिलाएं और युवा मॉर्निंग-इवनिंग वॉक और योग के लिए जुटते हैं. मासूम बच्चे अपने माता-पिता के साथ यहां थोड़ी मौज-मस्ती और मनोरंजन की उम्मीद में आते हैं. पार्क में कदम रखते ही उनका सामना अव्यवस्थाओं के उस कड़वे सच से होता है, जो बीते लंबे समय से प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रहा है.

एक साल से कबाड़ बनी ओपन जिम : इसके अलावा जिम के इक्विपमेंट भी पूरी तरह से तहस नहस हो गए हैं. ऐसे में लोग एक्सरसाइज भी नहीं कर पाते हैं, ओपन जिम के संबंध में लोगों का कहना है कि वह बीते पर एक साल से इन्हें टूटा हुआ ही देख रहे हैं, कोई देख रेख व मेंटेनेंस नहीं हो रही है. पार्क में घूमने आए खेड़ली फाटक निवासी आनंद सोनी का कहना है कि सुबह-शाम में काफी लोग घूमने आते हैं. गार्डन के एक कोने में करीब तीन से चार ट्रॉली कचरा डंप पड़ा हुआ है. इस कचरे से चौबीसों घंटे इतनी भयंकर दुर्गंध आती है कि वॉकर्स को उस हिस्से से गुजरते समय अपनी नाक पर कपड़ा बांधना पड़ता है.

कोटा का नेहरू पार्क बदहाल (ETV Bharat kota)

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टूटे झूलों से बच्चों को हादसे का डर : पार्क में बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाए गए झूले पूरी तरह से टूट चुके हैं. लोहे के ढांचों पर जंग लग चुकी है, जिससे मासूमों के गिरकर चोटिल होने का खतरा हर वक्त बना रहता है. डड़वाड़ा निवासी महेश योगी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि टूटे हुए झूलों के कारण बच्चे यहां आकर मायूस हो जाते हैं. कुछ बच्चे मजबूरी में एक कोने में बचे-खुचे झूलों पर ही वक्त बिताते हैं. स्थानीय किशोरी नेहा का भी यही कहना है कि झूलों की हालत इतनी खराब है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. नेहा का कहना है कि अधिकांश झूले टूटे हुए हैं और इससे बच्चों के गिरकर घायल होने का खतरा भी है.

नेहरू पार्क की बदहाली.
नेहरू पार्क की बदहाली. (ETV Bharat gfx)
REALITY CHECK OF PARKS IN KOTA,  ETV BHARAT PARK SAFETY CAMAPAIGN
खतरनाक है ट्रैक. (ETV Bharat gfx)

गार्डन में ड्यूटी कर रहे गार्ड बनवारी ने बताया कि यहां चूहों का आतंक बना हुआ है. इनके चलते में सांप भी गार्डन में आ जाते हैं. चूहों ने पार्क में कई जगहों पर बड़े-बड़े बिल बना रखे हैं. इन बिलों के अंदर तक भी छेद कर दिया है, इसी के चलते कई जगह पर बच्चे खेल नहीं पाते हैं. बनवारी ने बताया कि यहां चूहे भी इसलिए पनप रहे हैं कि लोग इन्हें दाना डाल देते हैं, हम लोग जब उन्हें रोकते हैं तो वह लड़ाई झगड़ा करते हैं या फिर दुर्व्यवहार करते हैं. यहां तक कि जो पार्क का मैनेजमेंट करने वाले अधिकारी भी इस पर ध्यान नहीं देते और ठेकेदार भी उसे पर कोई ध्यान नहीं देता है.

नयापुरा स्थित नेहरू पार्क में टूटे झूले
नयापुरा स्थित नेहरू पार्क में टूटे झूले (फोटो ईटीवी भारत कोटा)

पार्क में सुविधाओं का अभाव: सुविधाओं के नाम पर पार्क में जीरो व्यवस्था है. पीने के साफ पानी का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है. सबसे ज्यादा खराब स्थिति शौचालयों की है. महिलाओं के टॉयलेट में इस कदर गंदगी है कि वहां कीड़े-मकोड़े रेंगते नजर आते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है. वहीं, बारिश के मौसम में मुख्य एंट्री गेट के पास ही पानी जमा हो जाता है, जिससे पार्क के अंदर घुसना ही किसी चुनौती से कम नहीं होता. रात के समय स्मेकची (नशेड़ी) लोग अंदर प्रवेश कर जाते हैं, कभी लोहे की जाली को तोड़ते हैं, कभी नल को नुकसान कर जाते हैं.

कचरे की बदबू से वॉकर्स परेशान
कचरे की बदबू से वॉकर्स परेशान (फोटो ईटीवी भारत कोटा)

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चंद्र प्रकाश मित्तल का कहना है कि गार्डन में देखने के लिए केवल एक माली लगाया हुआ है, वह पौधों में पानी दे देता है. इसके अलावा कोई साफ सफाई यहां पर नहीं होती है. किसी तरह की कोई मेंटेनेंस भी नहीं हो रही है. मित्तल का कहना है कि गार्डन में काफी अव्यवस्थाएं हैं, जिनको सुधारने के लिए किन से संपर्क करें, यह भी नहीं लिखा हुआ है. केवल गार्डन में शिलान्यास व उद्घाटन का पत्थर लगा हुआ है.

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गंदगी का अंबार. (ETV Bharat gfx)
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चूहों व सांपों का आतंक. (ETV Bharat gfx)

गार्डन में रोज वॉक और रनिंग करने आने वाले लोगों का कहना है कि ट्रैक की हालत भी काफी खराब हो चुकी है. ट्रैक काफी टफ हो गया है और कड़क हो जाने के चलते घुटने व जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है. इवनिंग वॉक करने पहुंची प्रेक्षा नीमा का कहना है कि मिट्टी का ट्रैक सीमेंट जैसा ठोस हो गया है. कड़क हो जाने के चलते घुटनों में जर्क की समस्या हो सकती है. जोड़ों के दर्द की शिकायत भी होती है, इस ट्रैक को खोद कर सही करवाना चाहिए, लेकिन नहीं होता है. ट्रैक पर रोज हल्का पानी भी छिड़काव होना चाहिए, ताकि लोगों को राहत मिले. वहीं, जो सीमेंटेड ट्रैक है, वह भी उबड़ खाबड़ हो गया है, उसे भी कई साल बने हुए हो गए हैं, उसमें भी सुधार की आवश्यकता है.

पार्क में चूहों ने बनाया बिल
पार्क में चूहों ने बनाया बिल (फोटो ईटीवी भारत कोटा)
खुले बिजली वायर हादसों का खतरा
खुले बिजली वायर हादसों का खतरा (फोटो ईटीवी भारत कोटा)

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​कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) ने दिया सुधार का भरोसा : ​इस पूरे गंभीर मामले और जनसमस्या पर जब कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) के सेक्रेटरी मुकेश चौधरी से बात की गई, तो उन्होंने सकारात्मक रुख दिखाया. मुकेश चौधरी ने बताया कि कोटा शहर के कुल 587 पार्कों को केडीए ने अपने हाथ में (टेकअप) ले लिया है और चरणबद्ध तरीके से इन सभी पार्कों की व्यवस्थाओं को सुधारा जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक अधिकांश पार्कों में काम शुरू हो चुका है, जबकि नेहरू पार्क सहित करीब 47 पार्कों में कार्य होना अभी शेष है. केडीए सचिव ने आश्वासन दिया कि वे जल्द ही संबंधित अभियंताओं (इंजीनियर्स) और तकनीकी टीम को मौके पर भेजकर निर्देश देंगे. नेहरू पार्क के रनिंग ट्रैक, टूटे झूले, ओपन जिम, बिजली, पानी और टॉयलेट की सभी अव्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द दुरुस्त करवाकर आम जनता को राहत दी जाएगी.

बिजली खंभे पर ओपन बॉक्स
बिजली खंभे पर ओपन बॉक्स (फोटो ईटीवी भारत कोटा)
टूटे झूलों से बच्चों को हादसे का डर
टूटे झूलों से बच्चों को हादसे का डर (फोटो ईटीवी भारत कोटा)