स्कूल की किताब में किन्नौर को ट्रांसजेंडर, मंडी को मार्केट लिखने पर टूटी विभाग की नींद, ETV Bharat की खबर के बाद रिपोर्ट तलब
किताब में ब्लंडर मिस्टेक्स पर शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने ETV भारत को बताया, गलतियों को लेकर HPBOSE के सचिव से रिपोर्ट मांगी गई है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : May 6, 2026 at 7:54 AM IST
|Updated : May 6, 2026 at 3:56 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की तरफ से मुद्रित छठी क्लास की किताब में चिंताजनक व हास्यास्पद गलतियों के मामले में राज्य सरकार के शिक्षा सचिव ने संज्ञान लिया है. ETV भारत की खबर पर संज्ञान लेते हुए शिक्षा सचिव ने स्कूल शिक्षा बोर्ड से रिपोर्ट तलब की है. शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने ईटीवी भारत को बताया कि गलतियों को लेकर हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है. वहीं, स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव में शिक्षा सचिव को बताया है कि इस मामले का परीक्षण किया गया है. गलतियों को सुधारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. वहीं, शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने बताया कि रिपोर्ट आने के बाद आगामी एक्शन लिया जाएगा.
किताब में ब्लंडर मिस्टेक्स पर सचिव ने मांगा जवाब
उल्लेखनीय है कि छठी कक्षा की पुस्तक हिमाचल की लोक संस्कृति और योग में गंभीर हास्यास्पद गलतियां देखी गयी हैं. किताब में किन्नौर जिला को ट्रांसजेंडर लिखा गया है. वहीं, मंडी जिला का अंग्रेजी अनुवाद किसी ऐप के माध्यम से करते हुए मार्किट कर दिया गया. ईटीवी भारत ने इन गलतियों पर केंद्रित विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की. उसके बाद शिक्षा सचिव के नोटिस में बात आई तो उन्होंने स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव से रिपोर्ट तलब की है.
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की किताब में त्रुटियां
दरअसल, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की लोक संस्कृति और योग पुस्तक के अंग्रेजी संस्करण में जिला किन्नौर को 'ट्रांसजेंडर' छाप दिया गया है. इतना ही नहीं, मंडी जिले को 'मार्केट' लिखा गया है. AI और चैट जीपीटी के इस युग में मुद्रित शब्द को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है. स्पष्ट है कि किसी ऐप का प्रयोग किया गया है, जिसने किन्नौर को किन्नर समझ लिया और उसका अनुवाद ट्रांसजेंडर कर दिया. इसी तरह मंडी शब्द को बाजार समझकर मार्केट लिख दिया गया. हिमाचल शिक्षा बोर्ड की इस पुस्तक को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इसे बिना किसी विशेषज्ञ की जांच के या किसी पुराने AI टूल से अनुवाद कर सीधे बाजार में उतार दिया गया हो.


त्रुटियां होने के बावजूद बाजार में किताबें
सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि, इतनी बड़ी त्रुटियां होने के बावजूद किताब छप भी गई और बाजार में भी आ गई, लेकिन किसी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी. हिमाचल के सुप्रसिद्ध शब्द शिल्पी, कवि-संपादक स्व. मधुकर भारती कहा करते थे, "मुद्रित शब्द पर संकट की बात करने वालों को यह समझना चाहिए कि किताबें छपना कभी बंद नहीं होंगी. शब्द मुद्रित होकर अपनी शाश्वत सत्ता का परिचय देते रहेंगे." हैरानी की बात यह है कि, हिमाचल शिक्षा विभाग में ऐसी किताब छपी है, जिसने गंभीर लापरवाही के कारण मुद्रित शब्द (प्रिंटेड वर्ड) को जगहंसाई का पात्र बना दिया है.

'भूगोल और इतिहास दोनों का अपमान'
किताब में ब्लंडर मिस्टेक्स पर भाषाविद नवनीत शर्मा कहते हैं, "किसी जनजातीय जिले के नाम को 'ट्रांसजेंडर' लिख देना टाइपिंग की गलती तो है ही, जब आप अनुवाद के लिए केवल तकनीक (Google Translate या AI) पर निर्भर हो जाते हैं और उसमें मानवीय दिमाग का इस्तेमाल नहीं करते, तो ऐसे ही 'हास्यास्पद' और 'अपमानजनक' परिणाम सामने आते हैं. यह भूगोल और इतिहास दोनों का अपमान है."

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