ETV Bharat की खबर का असर: झोलाछाप डॉक्टर का क्लिनिक सील, दवाइयों के साथ गांजा बरामद
बलोदाबाजार के पलारी में राजस्व, स्वास्थ्य व पुलिस की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की है. बिना डिग्री के सालों से अस्पताल चल रहा था.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : March 2, 2026 at 11:56 AM IST
बलौदाबाजार: पलारी तहसील के ग्राम छेरकाडीह जारा में एक गर्भवती महिला की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया. मामला सामने आते ही प्रशासन हरकत में आया और राजस्व, स्वास्थ्य व पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने गांव में चल रहे एक अवैध क्लिनिक पर छापा मारकर उसे सील कर दिया. कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में दवाइयां, प्रेग्नेंसी किट और चार-पांच पुड़िया गांजा बरामद होने से मामला और गंभीर हो गया है. 28 फरवरी को ईटीवी भारत ने ये खबर प्रमुखता से दिखाई थी. जिसके बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए. बताया जा रहा है कि आरोपी पिछले दो दशकों से बिना किसी मेडिकल डिग्री या वैध लाइसेंस के गांव में अस्पताल संचालित कर रहा था.
गर्भवती महिला की मौत ने उठाए सवाल
ग्राम छेरकाडीह जारा की रहने वाली 25 वर्षीय इंदु साहू गर्भवती थी. परिजनों के अनुसार उसे हल्की सर्दी-खांसी की शिकायत हुई थी. इलाज के लिए वह गांव में संचालित क्लिनिक पहुंची. पहली बार डॉक्टर के मौजूद न होने पर लौट गई, लेकिन कुछ घंटों बाद दोबारा वहां गई. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दवा लेने के करीब 15 से 20 मिनट के भीतर उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई. शरीर पर खून के धब्बे उभरने लगे और हालत तेजी से गंभीर हो गई.कुछ ही देर में उसने वहीं दम तोड़ दिया.मामले को और संदिग्ध तब माना गया जब परिजनों ने बिना पोस्टमॉर्टम कराए ही अंतिम संस्कार कर दिया. इससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मौत का वास्तविक कारण क्या था.

बिना डिग्री 20 साल से इलाज
प्रशासनिक जांच में सामने आया कि क्लिनिक संचालक जयंत साहू के पास कोई मान्य मेडिकल डिग्री या पंजीकरण नहीं है. इसके बावजूद वह सालों से इलाज कर रहा था. ग्रामीणों का कहना है कि वह सामान्य बुखार से लेकर प्रसूति संबंधी मामलों तक का उपचार करता था. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान पाया कि क्लिनिक में रखी कई दवाइयां ऐसी थीं जिन्हें केवल पंजीकृत और प्रशिक्षित चिकित्सक ही लिख सकते हैं.यह तथ्य अपने आप में गंभीर है.
छापे में दवाइयों के साथ गांजा
संयुक्त टीम ने क्लिनिक की तलाशी ली तो भारी मात्रा में दवाइयां, इंजेक्शन और प्रेग्नेंसी किट मिलीं. लेकिन सबसे चौंकाने वाली बरामदगी चार-पांच पुड़िया गांजा रही. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्लिनिक में गांजा क्यों रखा गया था. क्या इसका उपयोग किसी तरह की नशीली दवा के रूप में किया जा रहा था, या यह किसी और अवैध गतिविधि से जुड़ा मामला है? पुलिस ने बरामद सामग्री को जब्त कर जांच शुरू कर दी है.
संयुक्त टीम की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम दीपक निकुंज के निर्देश पर नायब तहसीलदार पंकज बघेल और बीएमओ डॉ. पंकज वर्मा के नेतृत्व में टीम ने क्लिनिक का निरीक्षण किया. जांच के दौरान दस्तावेज मांगे गए, लेकिन संचालक किसी भी प्रकार की वैध डिग्री या लाइसेंस नहीं दिखा सका. जिसके बाद तुरंत प्रभाव से क्लिनिक को सील कर दिया गया. संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है कि वह किस आधार पर अस्पताल चला रहा था. स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण चिकित्सा सेवा देना कानूनन अपराध है. साथ ही, प्रतिबंधित दवाइयों का उपयोग और गांजा बरामद होने से मामला और गंभीर हो गया है.
गांव में दहशत, अन्य क्लिनिक बंद
कार्रवाई के बाद पूरे पलारी क्षेत्र में हड़कंप मच गया है. ग्रामीणों में डर और आक्रोश दोनों है. कई लोग इस बात पर हैरान हैं कि इतने वर्षों तक बिना डिग्री के क्लिनिक कैसे चलता रहा. सूत्रों के अनुसार इलाके के अन्य झोलाछाप संचालकों ने भी अपने क्लिनिक अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं. प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आगे भी ऐसे अवैध चिकित्सा केंद्रों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा.
जांच कई एंगल से
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अब मामले की कई पहलुओं से जांच कर रहे हैं.
1. गर्भवती महिला को कौन सी दवा दी गई थी?
2. क्या दवा की डोज गलत था?
3. क्या नशीले पदार्थ का किसी तरह उपयोग किया गया?
4. बिना पोस्टमॉर्टम अंतिम संस्कार क्यों किया गया?
कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी
प्रशासन ने संकेत दिया है कि आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा. बिना डिग्री चिकित्सा सेवा देना, प्रतिबंधित दवाइयों का भंडारण और गांजा रखने जैसे आरोप गंभीर हैं. स्वास्थ्य विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि इस मामले को उदाहरण बनाकर अवैध क्लिनिकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

