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ETV भारत का ग्राउंड रियलिटी चेक : जयपुर का डॉग शेल्टर कितना तैयार, कितना अधूरा?

बढ़ते डॉग बाइट मामलों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ईटीवी भारत ने जयपुर नगर निगम की व्यवस्थाओं का रियलिटी चेक किया.

जयपुर के श्वान गृह का हाल
जयपुर के श्वान गृह का हाल (ETV Bharat GFX)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : July 9, 2026 at 6:31 AM IST

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Updated : July 9, 2026 at 10:02 AM IST

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जयपुर : देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों और रेबीज के खतरे के बीच हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स और अन्य सार्वजनिक परिसरों से आवारा डॉग्स को हटाकर नसबंदी और टीकाकरण के बाद शेल्टर में रखा जाए. अदालत ने ये भी कहा कि ऐसे परिसरों की प्रभावी बाड़ाबंदी की जाए ताकि आवारा डॉग्स अंदर प्रवेश न कर सकें. इसी आदेश के बाद ईटीवी भारत ने जयपुर नगर निगम की व्यवस्थाओं का रियलिटी चेक किया. टीम जयसिंहपुरा स्थित नगर निगम के एकमात्र श्वान गृह पहुंची, जहां शहर में बढ़ती आवारा श्वानों की समस्या से निपटने के लिए चल रहे एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम की जमीनी स्थिति सामने आई.

हर दिन 1100 से ज्यादा डॉग बाइट के शिकार : राजस्थान में आवारा डॉग्स का खतरा अब गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है. सड़कों पर चलते वाहनों के पीछे दौड़ना, कॉलोनियों और बाजारों में राहगीरों को काटना और रात में झुंड बनाकर हमला करना जैसी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं. हेल्थ डिपार्टमेंट की रिपोर्ट्स के अनुसार प्रदेश में बीते एक साल में 4.22 लाख से अधिक डॉग बाइट केस दर्ज किए गए, यानी औसतन हर दिन 1100 से ज्यादा लोग डॉग बाइट के शिकार हुए. सबसे चिंताजनक स्थिति जयपुर, कोटा, भरतपुर, उदयपुर और अलवर जैसे शहरों में सामने आई, जहां कॉलोनियों, पार्कों, बाजारों में बच्चों और बुजुर्गों पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं.

डॉग शेल्टर का रियलिटी चेक. (ETV Bharat jaipur)

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जयसिंहपुरा श्वान गृह में फिलहाल 300 डॉग्स रखने की क्षमता : ईटीवी भारत की टीम जब जयसिंहपुरा स्थित डॉग शेल्टर पहुंची तो वहां 33 केनेल और 11 बाड़े बने हुए मिले. यहां एक समय में करीब 300 डॉग्स को रखा जा सकता है. मौके पर मौजूद गार्ड विक्रम ने बताया कि नगर निगम के पास ऑनलाइन शिकायतें आती हैं. शिकायत मिलने पर डॉग कैचिंग टीम संबंधित क्षेत्र में पहुंचती है और स्ट्रीट डॉग्स को पकड़कर केंद्र पर लाती है. फिलहाल, यहां करीब 20 कर्मचारी और 6 डॉग कैचर वाहन हैं. उन्होंने बताया कि डॉग्स को पकड़ने के बाद उनका एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) प्रोग्राम किया जाता है. इसके बाद उन्हें तीन-चार दिन तक निगरानी में रखकर उसी क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है, जहां से पकड़ा गया था.

राजस्थान में स्थिति
राजस्थान में स्थिति (ETV Bharat GFX)

ह्यूमन वेलफेयर सोसाइटी कर रही संचालन : नगर निगम प्रशासन ने वर्ष 2024 में ह्यूमन वेलफेयर सोसाइटी को एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम का टेंडर दिया था. फिलहाल यही संस्था श्वान गृह का संचालन कर रही है. केंद्र पर मौजूद डॉ. नीरज ने बताया कि इस प्रोग्राम के तहत स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी और रेबीज वैक्सीनेशन किया जाता है ताकि उनकी आबादी नियंत्रित की जा सके. सबसे पहले कैचिंग टीम डॉग्स को पकड़कर केंद्र पर लाती है, फिर उन्हें फास्टिंग पर रखा जाता है और अगले दिन सर्जरी की जाती है. इसके बाद तीन दिन तक पोस्ट ऑपरेटिव केयर के तहत निगरानी रखी जाती है.

डॉग्स को रखने के लिए श्वान गृह
डॉग्स को रखने के लिए श्वान गृह (ETV Bharat Jaipur)

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स्टरलाइजेशन के बाद डॉग्स का अग्रेशन हो जाता है कम : डॉ. नीरज के अनुसार स्टरलाइजेशन के बाद डॉग्स के व्यवहार में बड़ा बदलाव आता है. मेल और फीमेल दोनों डॉग्स में हार्मोनल एक्टिविटी कम होने से उनका आक्रामक व्यवहार घटता है. स्टरलाइजेशन के बाद अधिकतर डॉग्स डोसाइल यानी शांत स्वभाव के हो जाते हैं, जिससे अटैक की संभावना काफी कम हो जाती है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कई बार इंसानों का व्यवहार भी डॉग बाइट की वजह बनता है. कई लोग डॉग्स को मारने या भगाने के लिए उनके पीछे दौड़ते हैं, ऐसे में आत्मरक्षा में डॉग्स आक्रामक हो जाते हैं. वर्तमान में जयसिंहपुरा स्थित सेंटर पर प्रतिदिन लगभग 35 से 45 डॉग्स का स्टरलाइजेशन किया जा रहा है. सिर्फ मई 2026 में अब तक करीब 600 डॉग्स की नसबंदी की जा चुकी है.

श्वान गृह में तीन-चार दिन तक निगरानी में रखा जाता है
श्वान गृह में तीन-चार दिन तक निगरानी में रखा जाता है (ETV Bharat Jaipur)

रेबीज संदिग्ध डॉग्स के लिए अलग क्वॉरेंटाइन व्यवस्था : श्वान गृह में रेबीज संदिग्ध डॉग्स के लिए अलग क्वॉरेंटाइन केनेल बनाए गए हैं. डॉ. नीरज ने बताया कि ऐसे डॉग्स को अलग निगरानी में रखा जाता है और उनकी पुष्टि के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी रेबीज संक्रमित डॉग को दोबारा समाज में नहीं छोड़ा जाता. जयपुर में ये पहला श्वान गृह वर्ष 2002 में बनाया गया था. अब इसकी क्षमता बढ़ाने के लिए एक नया एक्सटेंशन सेंटर भी तैयार किया गया है. इस नए केंद्र में करीब 100 केनेल, 4 बाड़े और एक ऑपरेशन थिएटर बनाया गया है. इसके शुरू होने के बाद कुल क्षमता 500 से अधिक डॉग्स तक पहुंच जाएगी. हालांकि, ये सेंटर अभी चालू नहीं हुआ है. भीषण गर्मी को देखते हुए वहां कुछ अतिरिक्त व्यवस्थाएं अभी बाकी हैं.

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश और जमीनी हकीकत : सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि सार्वजनिक परिसरों से हटाए गए डॉग्स को वापस उसी स्थान पर न छोड़ा जाए, लेकिन जयपुर में वर्तमान व्यवस्था अब भी 'कैच-स्टरलाइज-रिलीज' मॉडल पर आधारित है, यानी डॉग्स को पकड़कर नसबंदी और वैक्सीनेशन के बाद दोबारा उसी क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था. नगर निगम की पशु प्रबंधन शाखा से आने वाली डॉक्टर नेहा गौड़ का कहना है कि शहर में स्ट्रीट डॉग्स की संख्या इतनी ज्यादा है कि सभी को स्थायी रूप से शेल्टर में रखना फिलहाल संभव नहीं है.

डॉग्स पकड़ने वाले वाहन
डॉग्स पकड़ने वाले वाहन (ETV Bharat Jaipur)

एक शेल्टर से पूरी राजधानी संभालना मुश्किल : डॉ. नेहा गौड़ ने माना कि फिलहाल नगर निगम के पास जयसिंहपुरा स्थित यही एकमात्र श्वान गृह है. सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार सभी डॉग्स को शेल्टर में रखना व्यवहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण है, इसीलिए प्राथमिकता ऐसे डॉग्स को पकड़ने पर दी जा रही है जो रेबीज संदिग्ध हों या लगातार लोगों को काट रहे हों. भविष्य में हिंगोनिया गौशाला क्षेत्र और लांगड़ियावास में भी नए डॉग शेल्टर विकसित करने की योजना है, ताकि शहर के अलग-अलग हिस्सों में अलग शेल्टर उपलब्ध हो सकें.

डॉग्स को पकड़कर स्टरलाइज किया जाता है
डॉग्स को पकड़कर स्टरलाइज किया जाता है (ETV Bharat Jaipur)

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Last Updated : July 9, 2026 at 10:02 AM IST