Explainer: जहरीला हो रहा हरियाणा का पानी, जानें कौन सा जिला कितना सुरक्षित, कहां सबसे बड़ा खतरा?
Water Problem in Haryana: केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा के ज्यादातर जिलों में पानी प्रदूषित हो चुका है.जानें कितने चिंताजनक हैं हालात.

Published : January 10, 2026 at 7:25 PM IST
चंडीगढ़: 7 बार देश के साफ सुथरे शहर का खिताब जीत चुका इंदौर फिलहाल गंदे पानी की वजह से हुई मौतों को लेकर चर्चा में है. कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भागीरथपुरा में दूषित पानी से 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. अब सवाल ये है कि इन मौतों का जिम्मेदार कौन? दूसरा ये क्या सिर्फ इंदौर या भागीरथपुरा में ही ऐसे हालात हैं? जवाब है नहीं. केंद्रीय भूजल बोर्ड ने नवंबर 2025 की रिपोर्ट जारी की है. जिसमें पता चला है कि हरियाणा के ज्यादातर जिलों में पानी से हालात खराब हैं.
हरियाणा में दूषित पानी से बढ़ रहा खतरा: हरियाणा भी उस दौर से गुजर रहा है जहां पानी की मौजूदगी और उसकी उपयोगिता के बीच गहरी खाई बन चुकी है. एक तरफ राज्य के ज्यादातर इलाकों में पेयजल की गुणवत्ता इतनी खराब हो चुकी है कि वो सीधे सेहत के लिए खतरा बन गई है. वहीं दूसरी तरफ भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है. जिससे पानी की कुल उपलब्धता लगातार घट रही है. हालात ऐसे हैं कि जो पानी मिल रहा है, वो सुरक्षित नहीं है और जो सुरक्षित है, वो पर्याप्त नहीं है. यही वजह है कि हरियाणा में पानी का मुद्दा अब सिर्फ संसाधन का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, कृषि और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुका है.
केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट ने खोली पोल: जल शक्ति मंत्रालय के अधीन आने वाले केंद्रीय भूजल बोर्ड की नवंबर 2025 की रिपोर्ट हरियाणा के लिए एक कड़ा चेतावनी संकेत है. रिपोर्ट के अनुसार कुल 22 में से प्रदेश का एक भी जिला ऐसा नहीं है, जहां भूजल में नाइट्रेट की मात्रा तय मानकों के भीतर हो. कई इलाकों में फ्लोराइड, आर्सेनिक, यूरेनियम और ईसी यानी विद्युत चालकता की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है. ये स्थिति बताती है कि समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे राज्य में फैली हुई है.

18 जिलों के 51 गांवों में आर्सेनिक से जहरीला पानी: रिपोर्ट के मुताबिक 18 जिलों के 51 गांवों में पानी भूजल आर्सेनिक की अधिकता के कारण जहरीला हो चुका है. झज्जर के बहादुरगढ़ क्षेत्र के छारा गांव में आर्सेनिक का स्तर 0.299 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 30 गुना ज्यादा है. भिवानी के सूई और बवानी खेड़ा गांवों में ये स्तर 20 गुना तक पहुंच गया है. बहल क्षेत्र में भी आर्सेनिक तय मानक से 11 गुना अधिक पाया गया. इस जहरीले पानी के असर से कैंसर, त्वचा रोग, हृदय रोग और मधुमेह के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. बता दें कि 1.5 मिग्रा प्रति लीटर से अधिक फ्लोराइड वाला पानी पीने योग्य नहीं होता.

फ्लोराइड ने बढ़ाई हड्डियों और नसों की बीमारियां: केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के मुताबिक हरियाणा के 20 जिलों के 136 गांव ऐसे हैं. जहां भूजल में फ्लोराइड की मात्रा बहुत अधिक पाई गई है. भिवानी के लोहारवाला गांव में फ्लोराइड का स्तर 22 मिलीग्राम प्रति लीटर तक दर्ज हुआ, जो सामान्य से करीब 15 गुना ज्यादा है. पानीपत के अटावला और जींद के उचाना जैसे इलाकों में भी यही स्थिति है, जहां फ्लोराइड के कारण हड्डियों की कमजोरी, जोड़ों में दर्द और नसों से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं. वहीं विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक फ्लोराइड वाला पानी पीने योग्य नहीं होता.

नाइट्रेट और टीडीएस ने बिगाड़ी सेहत: केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के लगभग सभी जिलों में नाइट्रेट की मात्रा तय मानकों से अधिक पाई गई है. इसके साथ ही पानी में कुल घुलनशील ठोस पदार्थ यानी टीडीएस का स्तर 1000 से 2000 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जबकि सुरक्षित सीमा 200 से 300 मिलीग्राम प्रति लीटर मानी जाती है. सोडियम, मैग्नीशियम, मरकरी और अन्य रसायनों की अधिकता से उल्टी-दस्त, पेट के रोग, पीलिया, किडनी की बीमारी और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं.

प्रदूषण की जड़ में उद्योग और खेती: ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भूजल के प्रदूषण के पीछे औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला बिना शोधन किया गया अपशिष्ट जल बड़ी वजह बन रहा है. इसके साथ ही खेतों में कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध इस्तेमाल भी जल स्रोतों को लगातार जहरीला कर रहा है. कई ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा, जिससे यह संकट और गहरा होता जा रहा है.

भूजल गुणवत्ता के आंकड़े: केंद्रीय भूजल बोर्ड के मुताबिक राज्य में लिए गए 811 नमूनों में से 20 प्रतिशत से ज्यादा में ईसी तय सीमा से अधिक पाई गई. फ्लोराइड के मामले में 21.82 प्रतिशत नमूने फेल हुए, जबकि नाइट्रेट में यह आंकड़ा 14 प्रतिशत से ज्यादा रहा. यूरेनियम की अधिकता वाले नमूने भी 15 प्रतिशत तक दर्ज किए गए. ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि समस्या सिर्फ कुछ गांवों या जिलों तक सीमित नहीं है.

अति-दोहन ने भूजल को संकट में डाला: बोर्ड के मुतबाबिक हरियाणा में सालाना भूजल पुनर्भरण 10.27 बीसीएम आंका गया है, जबकि दोहन 12.72 बीसीएम तक पहुंच चुका है. यानी राज्य अपने भूजल संसाधन का करीब 137 प्रतिशत उपयोग कर रहा है. 143 में से 91 ब्लॉक अति-दोहन की श्रेणी में आ चुके हैं. कई इलाकों में पानी 200 से 450 फुट नीचे तक चला गया है, जिससे भविष्य के लिए हालात और चिंताजनक हो गए हैं.
3489 गांवों में पानी पीने लायक नहीं: ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भूजल स्तर गिरने और गुणवत्ता खराब होने का असर सीधा गांवों पर दिख रहा है. हरियाणा के 3489 गांवों का पानी पीने योग्य नहीं रह गया है. 2246 गांवों में भूजल 30 मीटर से भी नीचे चला गया है, जबकि कई इलाके सेम यानी जलभराव की समस्या से भी जूझ रहे हैं. कुल मिलाकर 7400 से ज्यादा गांव किसी न किसी रूप में भूजल संकट से प्रभावित हैं.

खेती में पानी की खपत सबसे बड़ी चुनौती: हरियाणा में करीब 86 प्रतिशत पानी खेती में खर्च होता है, जबकि पीने के लिए सिर्फ 14 प्रतिशत पानी बचता है. यही वजह है कि सरकार अब धान जैसी ज्यादा पानी लेने वाली फसलों को हतोत्साहित कर रही है और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है. कम पानी में बेहतर उत्पादन के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
भिवानी के लोगों की प्रतिक्रिया: भिवानी के बवानीखेड़ा के ग्रामीण दूषित पानी से परेशान हैं. स्थानीय निवासी अंकुश सिंह ने कहा "पानी दूषित होने से लोगों में कई तरह की बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है. जल्द ही इस पर काम नहीं किया गया, तो हालात गंभीर हो सकते हैं." संजय नाम के शख्स ने कहा "बवानीखेड़ा में आर्सेनिक का स्तर बढ़ता जा रहा है. पानी पीने लायक नहीं रह गया. इससे पानी से जुड़ी बीमारियों के फैलने का खतरा है".

झज्जर के लोगों ने भी जताई चिंता: झज्जर जिले के मदन पाल ने बताया कि "हरियाणा में सप्लाई किया जा रहा पेयजल हो या फिर भूमिगत जल, दोनों ही तय मानकों पर खरे नहीं उतर रहे. केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट डराती है. राज्य का एक भी जिला ऐसा नहीं है, जहां नाइट्रेट तय सीमा में हो." रणबीर दलाल नाम के स्थानीय निवासी ने सरकार से इस समस्या के समाधान की गुहार लगाई.
कांग्रेस ने उठाए सवाल: रिपोर्ट को लेकर पूछे गए सवाल पर कांग्रेस से अंबाला लोकसभा सीट से सांसद वरुण चौधरी ने कहा "ये चिंताजनक मुद्दा है, फिर चाहे वायु प्रदूषण हो या जल के दूषित होने का मुद्दा. वायु प्रदूषण को मापने के लिए ज्यादा से ज्यादा स्थानों पर मशीनें लगनी चाहिए. स्वच्छ जल पर सभी का अधिकार है, स्वच्छ जल ना मिलने से लोग बीमारी का शिकार हो रहे हैं. मौतें हो रही हैं, कैंसर की बीमारी बढ़ती जा रही हैं. जिसका भार सरकारों पर ही आता है. पानी के टेस्ट की जितनी लैब होने चाहिए, आज भी हरियाणा के अंदर नहीं है, लेकिन सरकार इन गंभीर मुद्दों को लेकर चिंतित नहीं है."

इनलो सुप्रीमो अभय चौटाला का पंजाब सरकार पर निशाना: वहीं इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय चौटाला ने केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट पर कहा "सबसे ज्यादा हमारा जमीन का पानी खराब हुआ है, तो उसकी वजह घग्गर नदी का पानी है, क्योंकि पंजाब के कई इलाकों की इंडस्ट्री का केमिकल युक्त वेस्ट उसमें आता है. उसकी वजह से रतिया से लेकर रानियां तक का इलाका कैंसर की गम्भीर बीमारी से ग्रस्त हो गया है. वहीं दिल्ली से सटे पलवल और मेवात में दिल्ली की इंडस्ट्री का केमिकल वेस्ट जाता है. जिसकी वजह से मेवात, पलवल और फरीदाबाद भी पीड़ित है. जिसकी वजह से कैंसर तेजी से फैल रहा है."
'इस पर युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत- सिंचाई मंत्री': सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने इस मुद्दे पर कहा "इस पर बहुत काम करने की जरूरत है. पर्यावरण की खराब होती स्थिति भी इसकी एक वजह है. इस पर युद्धस्तर पर काम करने की जरूरत है. हमारे 155 में से करीब 88 ब्लॉक डार्क जोन में हैं. हमारा विभाग इस तरह की दिक्कतों से निपटने के लिए समर्पित है.".
जनस्वास्थ्य मंत्री रणबीर गंगवा ने क्या कहा? हरियाणा के जनस्वास्थ्य मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा "हम प्रयोगशालाओं में लगातार पानी का टेस्ट करवाते हैं. नहर और इसके आस पास की इंडस्ट्रीज का पानी मिलने से पानी की गुणवत्ता खराब हो जाती है. हमारा पॉल्यूशन और सिंचाई विभाग इसको देखता है. जो पानी पीने लायक नहीं होता. उसका ट्रीटमेंट करने के बाद ही हम पीने के लिए सप्लाई करते हैं."

पर्यावरणविद की सरकार से अपील: पर्यावरण के लिए कम करने वाले लोकेश कटारिया ने इस मुद्दे पर कहा "हरियाणा के लिए डरावनी खबर है. पानी में ऐसे रसायन मिले हैं. जिसकी वजह से पानी जहरीला होता जा रहा है. कई तरह को बीमारियां इससे पैदा हो रही हैं. ये जीवन पर संकट माना जा सकता है. इस पर सरकार को गंभीरता से काम करने की जरूरत है. पारदर्शिता के लिए पानी की जांच लोगों के सामने होनी चाहिए. जनता और सरकार को इस मामले में मिलकर काम करने की जरूरत है. फतेहाबाद का नहला गांव खराब पानी की वजह से कैंसर की बीमारी से सबसे ज्यादा पीड़ित है."
ऐसा होने की वजह क्या है? पीजीआई चंडीगढ़ के प्रोफेसर डॉक्टर रवींद्र खैईवाल ने कहा कि "अगर हम हरियाणा और पंजाब की बात करें, यहां जो ग्राउंड वाटर में आर्सेनिक या अन्य जहरीले पदार्थ मिल रहे हैं, वो केमिकल की वजह से है. क्योंकि हम ग्राउंड वाटर का बेइंतहा दोहन कर रहे हैं. कृषि में इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल भी इसकी वजह हैं. कृषि में लंबे वक्त से जो पेस्टिसाइड और फर्टिलाइजर इस्तेमाल हो रहे हैं. उनके केमिकल नेचुरली जमीन के पानी में मिल जाते हैं. औद्योगिक क्षेत्र का केमिकल युक्त पानी भी इसकी वजह है. उद्योगों का पानी बिना ट्रीटमेंट के नदियों में छोड़ा जा रहा है. जिससे पानी दूषित हो रहा है.

दूषित पानी से होने वाली बीमारियां: चंडीगढ़ PGI के प्रोफेसर ने कहा "हथेलियों और नाखूनों पर कालापन होने लगता है. बच्चों पर इसका प्रभाव पड़ता है. कुछ केमिकल किडनी पर असर डालते हैं. फ्लोराइड हमारी हड्डियों को कमजोर करता है और बॉन कैंसर तक हो सकता है."
पानी में सुधार के उपाय: रवींद्र खैईवाल ने कहा "भूजल के सुधार के लिए पहले हमें अपनी कृषि में सुधार करना होगा. हरियाणा और पंजाब में पानी पर आधारित फसलों का उत्पादन होता है. हमें उनकी जगह कम पानी में पैदा होने वाली फसलों पर जाना पड़ेगा. पाइप या ड्रिप इरिगेशन में वो तकनीक इस्तेमाल करनी होगी. जिससे पानी का संग्रहण भी हो सके, ताकि कृषि में पानी का कम से कम इस्तेमाल हो. डार्क जोन में पानी के इस्तेमाल पर हमें नियंत्रण करना होगा. उसके लिए हमें काम करना होगा."
सरकारी प्रयास और भविष्य की रणनीति: हालात की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने जल संरक्षण की दिशा में कई कदम उठाए हैं. जल जीवन मिशन के तहत पानी की गुणवत्ता जांच, मोबाइल वाटर टेस्टिंग वैन, अमृत जल क्रांति और वाटर स्मार्ट स्टेट जैसी योजनाओं पर काम हो रहा है. विश्व बैंक की मदद से 5700 करोड़ रुपये की वाटर सिक्योर हरियाणा योजना के जरिए 2032 तक राज्य को जल सुरक्षित बनाने का लक्ष्य रखा गया है.
कानून और जनभागीदारी पर भरोसा: पानी की बर्बादी रोकने के लिए हरियाणा जल संसाधन अधिनियम 2020, अपशिष्ट जल पुन: उपयोग नीति और शहरी जल नीति जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई है. पीने योग्य पानी की बर्बादी पर जुर्माना और सजा का प्रावधान भी है. हाल ही में राष्ट्रीय जल पुरस्कारों में हरियाणा को तीसरा स्थान मिलना बताता है कि प्रयास हो रहे हैं, लेकिन असली चुनौती इन्हें जमीन पर पूरी तरह उतारने की है.
अब फैसले टालने का वक्त नहीं: हरियाणा के सामने पानी की समस्या अब भविष्य की नहीं, बल्कि वर्तमान की सच्चाई बन चुकी है. जहरीला पेयजल, गिरता भूजल और बढ़ती मांग अगर इसी रफ्तार से चलती रही तो हालात और गंभीर होंगे. जरूरत इस बात की है कि सरकारी योजनाओं के साथ समाज और किसान भी पानी को बचाने की जिम्मेदारी समझें, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाणा सिर्फ पानी देने वाला नहीं, बल्कि पानी बचाने वाला राज्य भी बन सके.

