इथेनॉल फैक्ट्री से बस्ती में उबाल, कोई विकास को दे रहा तवज्जो, तो कोई कह रहा है 'मौत का सामान'
ग्राम वालों के लिए अभिशाप बनी बस्ती एथेनॉल फैक्ट्री, संचालक ने कहा फैक्ट्री के सारे नॉर्म्स पूरे, किसी को कोई नुकसान नहीं.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : July 9, 2026 at 11:54 AM IST
बस्ती: बस्ती जनपद में करोड़ों की लागत से बन रही इथेनॉल फैक्ट्री को लेकर राजनीति गरमा गई है. ग्रामीणों ने फैक्ट्री का विरोध शुरू कर दिया है, तो वही बीजेपी और सपा के नेता भी उनके इस विरोध में और ताल मिलाते हुए नज़र आ रहे हैं. हद तो तब हो गई जब एक प्रशासनिक मीटिंग के दौरान बीजेपी के दो नेता आपस में ही एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर भिड़ गए.
बीजेपी विधायक अजय सिंह ने भरी मीटिंग में फैक्ट्री लगने का समर्थन किया, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी ने फैक्ट्री के नुकसान बताकर उसे तत्काल बंद करने की वकालत करते हुए अपनी ही पार्टी के नेता से बहस करने लगे और उनके करतूत का असर ये हुआ कि सपा के दो विधायक भी बीजेपी नेता का साथ हो लिए और उनका भरपूर साथ दिया.
भानपुर तहसील के थाना रुधौली के दसिया गांव में निर्माणाधीन अनीता डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड का इथेनॉल प्लांट अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का केंद्र बन गया है.
इस मामले में उस वक्त बड़ा मोड़ आ गया जब एक तरफ कंपनी प्रबंधन ने प्रेस वार्ता कर प्लांट को पर्यावरण अनुकूल और रोजगार परक साबित करने की पुरजोर कोशिश की.

वहीं दूसरी तरफ आक्रोशित ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंच कर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा और निर्माण कार्य तत्काल रोकने की मांग की. इस पूरे संवेदनशील मुद्दे पर क्षेत्र के दिग्गज राजनेताओं की एंट्री के बाद अब जिले की सियासत पूरी तरह गरमा गई है.
जनपद के रुधौली विधानसभा क्षेत्र के दसिया गांव में निर्माणाधीन अनीता डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड का इथेनॉल प्लांट इस समय क्षेत्र में चर्चा और विवादों के केंद्र में है. कंपनी प्रबंधन द्वारा कहा गया कि पूरी परियोजना को पर्यावरण अनुकूल और रोजगार परक के तहत लाया जा रहा है.

वहीं दूसरी ओर धरातल पर ग्रामीणों का आक्रोश और पर्यावरण को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन ने काफी बाधा उत्पन्न कर दी है. फैक्ट्री संचालकों ने केंद्र सरकार के द्वारा बनाए गए सभी नियम को पूरा करने के बाद ही फैक्ट्री का संचालन किया जाएगा.
गौरतलब है कि इसी मामले में कंपनी के निदेशक रोहन जायसवाल ने दावा किया है कि प्लांट का 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है और अक्टूबर 2026 तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य है. कंपनी का कहना है कि वे जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (अशोधित पानी बाहर न भेजने) की तकनीक पर काम कर रहे हैं और सभी एनओसी उनके पास हैं.

आसपास के ग्रामवासियों का आरोप है कि कंपनी के अत्याधुनिक तकनीक के दावों और ग्रामीणों के अस्तित्व के संकट के बीच अब सीधे टकराव है. 200 मीटर की दूरी पर स्थित सरकारी स्कूलों के बच्चों का भविष्य और 15 गांवों के किसानों का पानी दांव पर लगा है. जिला प्रशासन ने ग्रामीणों की शिकायत पर जांच शुरू कर दी है.

बस्ती लोकसभा के सांसद राम प्रसाद चौधरी ने कहा कि विकास के नाम पर विनाश को स्वीकार नहीं किया जा सकता. यदि 15 गांवों की जनता, किसान और स्कूली बच्चे इस प्लांट के प्रदूषण और पानी के संकट से प्रभावित हो रहे हैं, तो उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता. संसद से लेकर सड़क तक किसानों के हितों की रक्षा की जाएगी और प्रशासन को इस पर दोबारा विचार करना होगा.

सपा विधायक कविंद्र चौधरी ने कहा कि यह सीधे तौर पर स्थानीय जनता की अनदेखी का मामला है. ग्रामीणों का आरोप सही है कि उनकी वास्तविक सुनवाई नहीं हुई. दो सौ मीटर पर स्कूल और पास में घनी आबादी होना बेहद चिंताजनक है. हम सदन से लेकर धरातल तक ग्रामीणों के साथ खड़े हैं और इस जनविरोधी परियोजना का पुरजोर विरोध करेंगे.

वही जिला पंचायत अध्यक्ष संजय कुमार ने बताया कि भले ही कंपनी जिला पंचायत से अनुमति मिलने का दावा कर रही हो, लेकिन यदि धरातल पर प्रदूषण नियंत्रण के मानकों की अनदेखी पाई गई या ग्रामीणों-किसानों के हितों को नुकसान पहुंचा, तो इस पर सख्त रुख अपनाया जाएगा. विकास जरूरी है, लेकिन जनता की सांसों और पानी की कीमत पर नहीं. मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तर पर बात की जाएगी.

