बिहार के इस गांव का 1 KM हिस्सा गंगा में विलुप्त, महाकटान रोकने के लिए युद्धस्तर पर हो रहा काम
पिछले साल भोजपुर के जवइनियां गांव का 1 किलोमीटर का हिस्सा गंगा में समा गया था. इसबार प्रशासन युद्धस्तर पर सुरक्षा कार्य कर रही है.

Published : July 4, 2026 at 4:01 PM IST
भोजपुर: जिले के शाहपुर और बड़हरा प्रखंड के कई गांव हर वर्ष गंगा नदी की बाढ़ और कटाव की चपेट में आ जाते हैं. इनमें शाहपुर प्रखंड की दामोदरपुर पंचायत स्थित जवइनियां गांव सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है. बीते वर्ष गंगा के विकराल रूप ने इस गांव में भारी तबाही मचाई थी, जिसके कारण सैकड़ों परिवारों का आशियाना उजड़ गया था. जानकारी के अनुसार गांव का 1 किलोमीटर हिस्सा आज भी गंगा में समाया हुआ है.
बाढ़ में तबाह हो गई थी जवइनियां गांव: ग्रामीणों के अनुसार पिछले वर्ष गंगा नदी के भीषण कटाव से जवइनियां गांव में करीब 400 पुश्तैनी पक्के और कच्चे मकान नदी में समा गए थे. कटाव के दौरान पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा. वहीं यूपी के बलिया जिले से सटे क्षेत्रों को मिलाकर 500 से अधिक घर गंगा की धारा में विलीन हो गए थे.
कटावरोधी कार्य लायी गई तेजी: कटाव के कारण बड़ी संख्या में परिवार बेघर हो गए और उन्हें सुरक्षित स्थानों की तलाश करनी पड़ी. इस वर्ष संभावित बाढ़ और कटाव से गांव को बचाने के लिए बिहार के भोजपुर जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश के बलिया जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से कटावरोधी कार्य तेजी से कराया जा रहा है.
युद्धस्तर पर चल रहा सुरक्षा कार्य: नदी किनारे सुरक्षा कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि बरसात के मौसम में गंगा का रौद्र रूप गांव के लिए फिर से संकट न बन सके. ईटीवी भारत की टीम जब जवइनियां गांव पहुंची तो ग्रामीणों ने पिछले वर्ष की भयावह स्थिति को याद करते हुए बताया कि गंगा नदी ने गांव में भारी तबाही मचाई थी.
कई परिवारों को नहीं मिली जमीन: कई परिवारों के मकान, खेत और अन्य संपत्तियां नदी में समा गई थी. ग्रामीणों ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से कुछ विस्थापित परिवारों को जमीन उपलब्ध कराई गई है, लेकिन अभी भी कई दर्जनों परिवार ऐसे हैं जिन्हें पुनर्वास के लिए जमीन नहीं मिल सकी है.
तिरपाल बांधकर रहने को मजबूर विस्थापित: जमीन नहीं मिलने के कारण कई विस्थापित परिवार इस भीषण गर्मी में भी तिरपाल लगाकर बांध पर रहने को मजबूर हैं. वे अपने परिवार और मवेशियों के साथ अस्थायी शिविरों में जीवनयापन कर रहे हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से शेष प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था जल्द करने तथा कटावरोधी कार्यों को समय पर पूरा कराने की मांग की है.
तटबंध को किया जा रहा मजबूत: ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार चल रहे सुरक्षा कार्यों से गंगा के कटाव पर प्रभावी रोक लगेगी और उन्हें हर वर्ष होने वाली तबाही से राहत मिलेगी.गंगा नदी के कटाव से प्रभावित क्षेत्रों को बचाने के लिए सरकार ने शाहपुर प्रखंड के जवइनिया गांव के पास तटबंध को मजबूत करने की योजना शुरू की है.
"पिछले साल बड़ी तबाही हुई थी. यहां 400 से अधिक घर और यूपी में 150 से अधिक घर गंगा में समा गए हैं. कटाव के कारण तबाही मची थी. अभी भी गंगा की धारा विपरीत है. लोकल विधायक आए थे. आपदा विभाग के अधिकारी भी कैंप कर रहे हैं और अच्छा काम चल रहा है. 40-45 दिन से काम चल रहा है."- ग्रामीण
"पिछले बार भी काम हुआ था, लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ था. इस बार क्या होता है देखते हैं. एक डेढ़ महीने में फिर कटाव शुरू हो जाएगा. डर के साय में हम सभी जी रहे हैं."- ग्रामीण
कम होगा कटाव का खतरा: इस परियोजना के तहत गंगा के किनारे व्यापक कटावरोधी कार्य कराया जा रहा है. इस योजना के पूरा होने के बाद आधा दर्जन गांवों को गंगा के कटाव से राहत मिलने की उम्मीद है और गांवों के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा.
45 करोड़ 84 लाख की लागत से हो रहा कार्य: गंगा नदी के बढ़ते कटाव को रोकने के लिए जल संसाधन विभाग, बिहार सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर कटाव निरोधक (एंटी इरोजन) कार्य शुरू किया गया है. विभाग की ओर से लगाए गए सूचना बोर्ड के अनुसार गंगा नदी के तट पर बीकेजीई (BKGE) के 58.00 किलोमीटर से 59.20 किलोमीटर के बीच, गंगापुर, भुसावला, नंदपुर एवं दमोदरपुर (जवाइनिया) गांवों के सामने कटावरोधी कार्य कराया जा रहा है.
जानकारी के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना की स्वीकृत लागत 45 करोड़ 84 लाख 73 हजार 207 रुपये निर्धारित की गई है. कार्य का अनुबंध 01SBD/2026-27 के तहत किया गया है, जिसकी तिथि 2 मई 2026 है. इस परियोजना को पूरा करने की समय सीमा 15 जुलाई 2026 तय की गई है.
कार्य का क्रियान्वयन बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बक्सर के अधीन कराया जा रहा है.इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के चक्की नौरंगा से लेकर बिहार के जवइनिया के पूरब तक कटावरोधी बोल्डर पिचिंग का कार्य कराया जाएगा. स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा नदी के लगातार कटाव से हर वर्ष कृषि भूमि एवं आबादी प्रभावित होती रही है.
सैंड बैग से तैयार किया जाएगा मजबूत बेस: परियोजना के तहत गंगा नदी के पानी के अंदर पहले मजबूत आधार तैयार किया जाएगा. इसके लिए सफेद बालू से भरे सैकड़ों सैंड बैग लगाकर एनसी बेस बनाया जाएगा.इस बेस को इस तरह तैयार किया जाएगा कि वह बोल्डर पिचिंग के भारी वजन को सह सके और अधिक दबाव पड़ने पर भी धंसने की आशंका न रहे.
एनसी बेस तैयार होने के बाद लोहे के मजबूत तारों से जालीनुमा ढांचा बनाया जाएगा. इस ढांचे में बड़े-बड़े पत्थरों के बोल्डर भरकर मजबूत संरचना तैयार की जाएगी. परियोजना के अंतर्गत 21 गुणा तीन मीटर क्षेत्र में ऊपर की ओर 25 क्रेटेड बोल्डर का बेड बनाया जाएगा, जिसका आकार तीन मीटर लंबा, डेढ़ मीटर चौड़ा और 60 सेंटीमीटर मोटा होगा.
"10 मई के काम शुरू हुआ है और 15 जुलाई तक काम खत्म कर देंगे. एनसी का काम हो रहा है. जिसके तहत बोरा में बालू भरते हैं और जाल से नीचे डाला जाता है. फिर बोल्डर पिचिंग का काम कर रहे हैं."- दीपक कुमार, सुपरवाइजर
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