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अल्बर्ट हॉल का स्थापना दिवस: 140 साल पहले अंग्रेज शहजादे के नाम पर बनी यह इमारत, आज है जयपुर की शान

चार गैलरी से शुरू हुए अल्बर्ट हॉल में आज 18 गैलरी मौजूद हैं. यहां इजिप्ट की ममी है, तो 1622 ईसवीं का पर्शियन कार्पेट भी.

Foundation Day of Albert Hall
अल्बर्ट हॉल संग्रहालय (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 21, 2026 at 3:33 PM IST

5 Min Read
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जयपुर: जयपुर की पहचान बन चुका अल्बर्ट हॉल संग्रहालय केवल एक इमारत नहीं, बल्कि इतिहास का जीवंत दस्तावेज है. यह शहर की एकमात्र ऐसी प्रमुख इमारत है, जिसका नाम किसी राजा या स्थानीय शख्सियत की बजाय एक अंग्रेज शहजादे प्रिंस अल्बर्ट के नाम पर रखा गया. यह भव्य इमारत 140 वर्ष पूरे कर चुकी है. यह राजशाही आभा, अंग्रेजी हुकूमत के दौर और स्वतंत्र भारत में लोकतांत्रिक बहाली की साक्षी रही है. जयपुर के पूर्व राजा सवाई राम सिंह ने उन लोगों के लिए, जो शहर से बाहर निकलकर दुनिया नहीं देख पाते थे, एक ही छत के नीचे देश-विदेश की अनोखी वस्तुओं को प्रदर्शित करने वाले पहले म्यूजियम की नींव रखी. इसकी विरासत, स्थापत्य कला और यहां प्रदर्शित अनोखी वस्तुएं आज भी जयपुर आने वाले हर एक व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करती हैं.

अल्बर्ट हॉल के अधीक्षक महेंद्र कुमार ने बताया कि इसका निर्माण जयपुर के दूरदर्शी शासक पूर्व महाराजा राम सिंह द्वितीय के काल में शुरू हुआ था. उस दौर में यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि आधुनिक सोच का प्रतीक था. 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जब भारत में इंडो-सार्सेनिक शैली का प्रभाव बढ़ रहा था, तब जयपुर में इस इमारत ने परंपरागत राजस्थानी स्थापत्य के साथ मुगल और यूरोपीय कला का अद्भुत संगम पेश किया. इसके मेहराबदार बरामदे, संगमरमर और बलुआ पत्थर की नक्काशी, जालियों का सौंदर्य और विशाल गुंबद उस मिश्रित स्थापत्य शैली की बानगी हैं, जिसने आगे चलकर जयपुर के आधुनिक निर्माण की दिशा तय की.

अल्बर्ट हॉल का स्थापना दिवस (ETV Bharat Jaipur)

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विरासत से आधुनिकता की ओर: अल्बर्ट हॉल जयपुर में विरासत और परंपरा से आधुनिकता की ओर बढ़ते कदमों का गवाह है. इतिहासकार जितेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि इसकी स्थापत्य छाप आगे चलकर कई महत्वपूर्ण संस्थानों पर दिखाई दी. जयपुर के प्रमुख महारानी गायत्री देवी गर्ल्स स्कूल, महाराजा कॉलेज और महारानी कॉलेज जैसे शैक्षणिक संस्थानों की इमारतों में भी परंपरागत और औपनिवेशिक शैली का संतुलित प्रभाव देखने को मिलता है. बाद के वर्षों में जब जयपुर के आधुनिकीकरण की बागडोर मिर्जा इस्माइल के हाथों में आई, तब शहर के नियोजित विस्तार, चौड़ी सड़कों और भव्य सार्वजनिक भवनों में भी अल्बर्ट हॉल की स्थापत्य विरासत की छाप स्पष्ट दिखाई दी.

Foundation Day of Albert Hall
इजिप्ट की ममी (ETV Bharat Jaipur)
Foundation Day of Albert Hall
सेल्फी का आनंद लेते पर्यटक (ETV Bharat Jaipur)

सांस्कृतिक आयोजनों का केंद्र: रामनिवास बाग के बीच स्थित यह भवन आज भी उसी गरिमा के साथ खड़ा है, मानो किसी युग का प्रहरी हो. आज अल्बर्ट हॉल संग्रहालय केवल पर्यटकों का आकर्षण नहीं, बल्कि जयपुर के स्थापत्य विकास की बुनियाद का प्रतीक भी है. यह इमारत बताती है कि कैसे गुलाबी नगरी ने अपनी पारंपरिक पहचान को बचाए रखते हुए आधुनिकता को आत्मसात किया और इसी संतुलन ने जयपुर को विश्व मानचित्र पर एक विशिष्ट स्थान दिलाया.

Foundation Day of Albert Hall
अल्बर्ट हॉल को कैनवास पर उकेरते कला प्रेमी (ETV Bharat Jaipur)

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कैनवास पर उकेरा अल्बर्ट हॉल: जयपुर की ऐतिहासिक धरोहर अल्बर्ट हॉल आज अपना 140वें स्थापना दिवस का जश्न मना रहा है. इस खास मौके पर पर्यटकों और कला प्रेमियों के लिए बड़ी सौगात दी गई है. आज पूरे दिन संग्रहालय में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहेगा. अल्बर्ट हॉल अधीक्षक महेंद्र कुमार ने बताया कि स्थापना दिवस को यादगार बनाने के लिए सुबह 'कैनवास एट द अल्बर्ट हॉल' ड्राइंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के कलाकारों और छात्रों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया. प्रतिभागियों ने अल्बर्ट हॉल की स्थापत्य सुंदरता, विरासत और सांस्कृतिक परिवेश को कैनवस पर उकेरा.

Foundation Day of Albert Hall
स्थापना दिवस पर अल्बर्ट हॉल में पर्यटकों का स्वागत किया गया (ETV Bharat Jaipur)

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पर्यटकों का किया स्वागत: देशी-विदेशी पर्यटकों का तिलक लगाकर और फूल-मालाओं से स्वागत किया गया. यहां पहुंचे पर्यटकों ने बताया कि उन्होंने अब तक अल्बर्ट हॉल को केवल तस्वीरों में देखा था, आज इसे देखकर काफी खुशी हुई. उन्होंने कहा कि इसे बेहतर ढंग से संरक्षित किया गया है और यहां आज भी हजारों साल पुरानी मम्मी से लेकर सैकड़ों साल पुरानी स्थापत्य कला और संस्कृति के साक्ष्य मौजूद हैं. वहीं, यहां पहुंचे छात्रों ने इसे एक अनोखा अनुभव बताया.

Foundation Day of Albert Hall
अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में रखी पुरासामग्री (ETV Bharat Jaipur)

अल्बर्ट हॉल की 18 गैलरी:

  • कार्पेट हॉल
  • पॉटरी गैलरी
  • हथियार गैलरी
  • लाख सामग्री गैलरी
  • मार्बल कला दीर्घा
  • पेंटिंग दीर्घा (द्वितीय)
  • वाद्य यंत्र दीर्घा
  • पेंटिंग दीर्घा (प्रथम)
  • वेशभूषा दीर्घा
  • वुडन आर्ट गैलरी
  • क्ले मॉडल
  • अंतरराष्ट्रीय गैलरी
  • मूर्ति गैलरी
  • धातु गैलरी
  • कॉइन्स गैलरी
  • मिश्र कला दीर्घा
  • आभूषण एवं हाथी दांत गैलरी
  • क्ले मॉडल (योगासन)

322 ईसा पूर्व की इजिप्ट की ममी सहित 18,500 से ज्यादा पुरासामग्री: 1887 में चार गैलरी से शुरू हुए अल्बर्ट हॉल में आज 18 गैलरी मौजूद हैं. यहां 322 ईसा पूर्व की इजिप्ट की ममी है, तो 1622 ईसवीं का पर्शियन कार्पेट भी मौजूद है. साथ ही जयपुर के राज परिवार के चित्र, राजचिह्न, भारत और विदेशी कला के नमूनों की प्रतिकृतियां और भित्ति चित्र यहां की गैलरी में पर्यटकों के लिए प्रदर्शित किए जाते हैं. अल्बर्ट हॉल अधीक्षक ने बताया कि सैकड़ों स्ट्रक्चर, सिक्के, हथियार, ब्लू पॉटरी, धातु वस्तुएं, पेंटिंग, वस्त्र, वुडन आर्ट, आभूषण जैसे कई सेक्शन में अल्बर्ट हॉल में प्रदर्शनी लगाई गई है. यहां करीब 18,500 से ज्यादा पुरासामग्री मौजूद है. यह अल्बर्ट हॉल ठीक उसी तरह है, मानो कोई व्यक्ति चारों तरफ से हाथ फैलाए सबकुछ अपने अंदर समेटने की कोशिश कर रहा हो.