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जंगल के बीच मड हाउस का लीजिए आनंद, देवपुर नेचर कैंप का शुभारंभ, ईको टूरिज्म की ओर बलौदा बाजार

बारनवापारा पर्यटन ग्राम में आधुनिक रिसेप्शन भवन की भी शुरूआत हुई, स्थानीय समुदाय को मिलेगा सीधा

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ईको टूरिज्म की ओर बलौदा बाजार (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : February 24, 2026 at 3:14 PM IST

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बलौदा बाजार: देवपुर नेचर कैंप का शुभारंभ हो चुका है. नेचर कैंप का शुभारंभ इस बात का संकेत है कि बलौदा बाजार खासकर बारनवापारा ईको टूरिज्म की राह पर बढ़ चला है. पर्यटन विभाग की ओर से यहां पर मड हाउस मॉडल बनाए गए हैं. इन मड हाउस में ठहरने वालों को प्रकृति और ग्रामीण परिवेश का पूरा आनंद मिले, इसकी व्यवस्था की गई है. बारनवापारा में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक रिसेप्शन भवन भी बनाए गए हैं. इन तमाम सुविधाओं और व्यवस्थाओं से स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी, उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा, बेरोजगारी भी कम होगी.

देवपुर नेचर कैंप का शुभारंभ, मड हाउस का लीजिए आनंद

दरअसल, वनमंडल बलौदा बाजार के अंतर्गत वन परिक्षेत्र देवपुर में विकसित ईको-टूरिज्म नेचर कैंप के मड हाउस का सोमवार को औपचारिक लोकार्पण हुआ. यह पहल सिर्फ एक पर्यटन परियोजना नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को साथ लेकर चलने वाला मॉडल है. इस नए कैंप को स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक निर्माण शैली के साथ तैयार किया गया है. मिट्टी, लकड़ी और प्राकृतिक सामग्री से बने मड हाउस पर्यावरण के अनुकूल हैं. आसपास के जंगल के साथ पूरी तरह घुलते-मिलते नजर आने वाले ये मड हाउस पर्यटकों को आकर्षित करेंगे. वन विभाग का उद्देश्य है, पर्यटन हो लेकिन प्रकृति पर दबाव कम से कम पड़े.

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ईको टूरिज्म की ओर बलौदा बाजार (ETV Bharat)



प्रकृति के करीब ठहरने का नया अनुभव

देवपुर नेचर कैंप में विकसित मड हाउस का मुख्य संदेश यह है कि पर्यटक होटल जैसे कृत्रिम माहौल से अलग हटकर प्रकृति के बीच वास्तविक अनुभव ले सकें. यहां आधुनिक सुविधाओं को इस तरह जोड़ा गया है, कि जंगल की मूल पहचान बनी रहे. कैंप के आसपास फैली हरियाली, पक्षियों की आवाज और स्वच्छ वातावरण इसे खास बनाएंगे. मड हाउस और उसके आस पास का वातावरण न सिर्फ शहर के लोगों के लिए सुकून भरा पड़ाव बनेगा, बल्कि विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र साबित होगा.

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स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार का अवसर

इस परियोजना की खास बात यह है कि इसमें स्थानीय ग्रामीणों और महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी. कैंप संचालन, खानपान, गाइड सेवा और रखरखाव जैसे कामों के लिए स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिलेगी. इससे गांव के युवाओं और महिलाओं को स्थायी आय का स्रोत मिलेगा. ईको-टूरिज्म का यह मॉडल जंगल संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण दोनों को एक साथ साधने की कोशिश है. DFO का मानना है कि जब स्थानीय समुदाय सीधे तौर पर पर्यटन गतिविधियों से जुड़ता है, तो वह जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण में भी अधिक जिम्मेदारी निभाता है.

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बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में आधुनिक रिसेप्शन भवन शुरू

इसी क्रम में बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य के पर्यटन ग्राम में नव-निर्मित रिसेप्शन भवन की शुरूआत की गई. यह भवन अभयारण्य की जैव विविधता और प्राकृतिक विरासत को दिखाने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं. नए रिसेप्शन परिसर में स्थानीय वनस्पतियों, प्रमुख वन्यजीवों और पर्यटन मार्गों की जानकारी आकर्षक तरीके से दिखाई गई है. पर्यटक यहां पहुंचते ही अभ्यारण्य के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. वन विभाग के मुताबिक यह भवन केवल स्वागत केंद्र नहीं, बल्कि जानकारी और जागरूकता का केंद्र भी होगा. यहां से पर्यटकों को सफारी, प्रकृति भ्रमण और अन्य गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी.

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संरक्षण और आत्मनिर्भरता का संगम

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी एवं जैव विविधता) और मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक अरुण कुमार पांडे ने कहा, ईको-टूरिज्म आधारित पहल संरक्षण को मजबूत करने के साथ स्थानीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम बनेंगी. उनका कहना है, जब विकास और संरक्षण के बीच संतुलन साधा जाता है, तभी दीर्घकालिक परिणाम सामने आते हैं. देवपुर नेचर कैंप और बारनवापारा रिसेप्शन भवन इसी दिशा में उठाया गया ठोस कदम है.

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देवपुर क्षेत्र को नई पहचान

देवपुर पहले से ही प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, लेकिन अब संगठित ईको-टूरिज्म गतिविधियों के कारण इसे नई पहचान मिलने की संभावना मजबूत हुई है. मड हाउस मॉडल राज्य में ईको-फ्रेंडली पर्यटन का उदाहरण बन सकता है. यदि यह पहल सफल होती है, तो अन्य वन क्षेत्रों में भी इसी तरह की परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं. स्थानीय लोगों का मानना है, इससे क्षेत्र में सड़क, संचार और अन्य बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार आएगा, पर्यटन बढ़ने से छोटे व्यवसायों को लाभ मिलेगा.

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वन विभाग की दीर्घकालिक योजना

वन विभाग की योजना है कि ईको-टूरिज्म को केवल पर्यटन गतिविधि तक सीमित न रखकर इसे संरक्षण अभियान से जोड़ा जाएगा. आने वाले समय में यहां प्रकृति शिक्षा शिविर, छात्र भ्रमण कार्यक्रम और जैव विविधता जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा सकती हैं. इससे नई पीढ़ी को जंगल और वन्यजीवों के महत्व को समझने का अवसर मिलेगा.

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईको-टूरिज्म यदि सही ढंग से संचालित हो, तो यह संरक्षण और विकास दोनों को गति देगा. इससे जंगलों पर अवैध गतिविधियों का दबाव कम होगा और लोगों को वैकल्पिक आजीविका मिलेगी. देवपुर नेचर कैंप की शुरुआत इसी सोच का परिणाम है. यहां पर्यटकों को प्राकृतिक अनुभव मिलेगा, वहीं स्थानीय समुदाय को रोजगार और सम्मानजनक आय का अवसर मिलेगा.

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