इंजीनियरिंग की डिग्री से यह नहीं माना जा सकता कि कमाई ज्यादा है, भरण पोषण पति की इनकम के आधार पर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
डिलीवरी बॉय का काम कर रहे पति की आर्थिक स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 22, 2026 at 12:28 PM IST
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भरण पोषण के एक मामले में कहा है कि किसी व्यक्ति के पास इंजीनियरिंग की डिग्री होने से यह नहीं माना जा सकता कि उसकी कमाई ज्यादा है. भरण पोषण पति के नौकरी या व्यवसाय से मिलने वाली इनकम के आधार पर तय किया जाएगा. इसके साथ ही कोर्ट ने डिलीवरी बॉय का काम कर रहे पति की आर्थिक स्थिति को देखते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा तय 9 हजार रुपये मासिक भरण-पोषण को घटाकर 5 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया.
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने यह आदेश विवेक मोदी की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनाया. पति ने बताया था कि वह नियमित नौकरी में नहीं है और जोमैटो व रैपिडो के माध्यम से डिलीवरी का काम कर करीब 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह कमाता है.
मामले के अनुसार विवेक मोदी और स्वाति का विवाह 28 नवंबर 2023 को हुआ था. पत्नी ने आरोप लगाया कि शादी के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और मारपीट कर उसे मायके भेज दिया गया. वह फरवरी 2024 से अलग रह रही है. पत्नी ने आवेदन देकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण की मांग की थी. फैमिली कोर्ट ने 24 सितंबर 2025 को आवेदन आंशिक स्वीकार करते हुए पति को आवेदन दाखिल करने की तारीख से 9 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश दिया था.
पति ने हाईकोर्ट में कहा कि उसकी कोई नियमित नौकरी नहीं है. वह डिलीवरी का काम करता है और करीब 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह कमाता है. उसने अपनी बात के समर्थन में जोमैटो का पहचान पत्र और ई-श्रम कार्ड भी प्रस्तुत किया था. उसका यह भी कहना था कि उसके नाम दर्ज वाहन उसके पिता को एसईसीएल में करीब 40 वर्ष की सेवा के बाद मिले सेवानिवृत्ति लाभ से खरीदा गया था, इसलिए इसे उसकी नियमित आय का आधार नहीं माना जा सकता. इस आधार पर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के भरण पोषण के आदेश की राशि घटा दी.

