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ऊर्जा मंत्री ने निजी बिजली कंपनी के अधिकारियों को फटकारा, बोले – शहर से बेहतर गांव का सिस्टम...10 बार तो मेरी ही लाइट चली गई

मंत्री नागर ने KEDL के अधिकारियों को भीलवाड़ा और बांसवाड़ा के बिजली मॉडल का उदाहरण देते हुए उसे कोटा में अपनाने का सुझाव दिया.

ELectricity Problem In Kota
निजी बिजली कंपनी के अधिकारियों को फटकार लगाते ऊर्जा मंत्री (Etv Bharat Kota)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : May 30, 2026 at 3:00 PM IST

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कोटा: भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट ने कोटा में लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. बार-बार ट्रिपिंग और घंटों बिजली गुल रहने से नागरिक परेशान हैं. इसी समस्या को लेकर शनिवार को ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने खुद मोर्चा संभाल लिया. जनसुनवाई के दौरान लगातार आ रही शिकायतों से नाराज होकर उन्होंने कोटा की निजी बिजली कंपनी KEDL के सीईओ और तकनीकी प्रमुख को अपने आवास पर बुलाया और जमकर फटकार लगाई. मंत्री ने कहा कि सुबह से ही उनके घर में 10 बार बिजली ट्रिप हो चुकी है. उन्होंने शहर से बेहतर गांव का बिजली तंत्र बताते हुए KEDL पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाया. नागर ने चेतावनी दी कि अगर दो महीने में व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो सरकार सख्त निर्णय लेगी. उन्होंने कंपनी पर उपभोक्ताओं को बाउंसरों से धमकाने और अवैध सेटलमेंट करने के भी आरोप लगाए. KEDL को भीलवाड़ा मॉडल का अध्ययन करने और एआई-आधारित तकनीक अपनाने के निर्देश दिए.

मंत्री नागर ने KEDL के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मनीष अरोड़ा और टेक्निकल हेड वेंकटेशन कोड़ी को उपभोक्ताओं की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करने और बिजली तंत्र को तुरंत सुदृढ़ करने की हिदायत दी. उन्होंने कहा कि कोटा शहर की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों का बिजली प्रबंधन कहीं अधिक बेहतर है. ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर नए जीएसएस बन रहे हैं, जबकि शहरी क्षेत्र में लोड के अनुपात में बुनियादी ढांचे का विस्तार नगण्य है. आंधी-तूफान आने पर जहां JVVNL ग्रामीण क्षेत्रों में रातों-रात फॉल्ट ठीक कर आपूर्ति बहाल कर देता है, वहीं कोटा शहर में घंटों बिजली गुल रहती है. उन्होंने भीलवाड़ा और बांसवाड़ा के बिजली मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लाइनमैन बिना शटडाउन लिए चालू लाइन पर काम कर लेते हैं, जबकि कोटा में छोटे-छोटे घरेलू कनेक्शनों के लिए भी लंबा शटडाउन लिया जा रहा है. उन्होंने KEDL को भीलवाड़ा मॉडल का अध्ययन कर उसे लागू करने के निर्देश दिए. साथ ही रोजाना होने वाली ट्रिपिंग, फॉल्ट, शटडाउन और जले हुए ट्रांसफार्मर बदलने की विस्तृत दैनिक रिपोर्ट सरकार को सौंपने के आदेश जारी किए.

बिजली कंपनी के अधिकारियों को फटकार लगाते ऊर्जा मंत्री (Etv Bharat Kota)

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FRT टीम व स्टाफ नहीं, कुशल मैनेजमेंट की जरूरत: मंत्री नागर ने फॉल्ट रिपेयर टीम (FRT) और शिकायत निवारण के बुनियादी ढांचे पर ही सवाल उठा दिया. उन्होंने कहा कि कंपनी के पास FRT के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है, जिससे फॉल्ट ठीक होने में लंबा समय लगता है. उन्होंने कहा कि पर्याप्त फील्ड स्टाफ और उपकरण भी होने चाहिए, लेकिन समस्या के निदान के लिए इच्छाशक्ति और कुशल प्रबंधन की जरूरत है, जो कंपनी के पास नहीं है. बिजली व्यवस्था में दो महीने के भीतर सुधार नहीं हुआ तो परिणाम गंभीर होंगे. उन्होंने अधिकारियों से दो टूक कहा कि वे अपने उच्च प्रबंधन से बात कर कमियां दूर करें, अन्यथा सरकार सख्त निर्णय लेने को मजबूर होगी. मंत्री नागर ने कहा कि KEDL का कार्य पूरी तरह असंवेदनहीन है.

बाउंसरों से धमका रही कंपनी: ऊर्जा मंत्री ने कहा कि KEDL अपने दफ्तर में आम उपभोक्ताओं की सुनवाई नहीं करती, वहां आने वालों को डराया-धमकाया जा रहा है, उनके लिए बाउंसर बैठा दिए गए हैं. कंपनी के संगठन ढांचे में डिवीजन स्तर पर एक्शन का पद गायब है, एईएन ही वहां बैठे हैं, जिससे जवाबदेही तय नहीं हो पाती. मंत्री ने KEDL द्वारा ऑफलाइन सतर्कता जांच रिपोर्ट (VCR) भरने और अवैध रूप से मामलों का सेटलमेंट करने पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि KEDL को खुद से कंपाउंडिंग या सेटलमेंट करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, फिर भी पिछले दो वर्षों में JVVNL के पास KEDL का एक भी सेटलमेंट केस नहीं आया, जो बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है. अंडरग्राउंडिंग के तर्क पर उन्होंने कहा कि पहले इसी नाम पर 250 करोड़ रुपए जमीन में दबा दिए गए, लेकिन लाइनें चालू नहीं हो सकीं. उन्होंने KEDL को पुराने ढर्रे को छोड़कर एआई-आधारित और हाईटेक तकनीक अपनाने की सलाह दी.