दिल्ली में मुकदमों की राजनीति का अंत, भाजपा सरकार ने वापस लिए 'AAP' शासन के सभी केस
दिल्ली सरकार ने पिछली आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार, उपराज्यपाल और नौकरशाहों के खिलाफ दायर सभी मुकदमों को लिया वापस

Published : February 10, 2026 at 1:56 PM IST
नई दिल्ली : दिल्ली में सत्ता परिवर्तन के साथ ही प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारे में बड़े बदलावों का दौर शुरू हो गया है. दिल्ली की भाजपा सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पिछली आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार, उपराज्यपाल और नौकरशाहों के खिलाफ दायर किए गए सभी मुकदमों को वापस ले लिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इन कानूनी लड़ाइयों को ‘राजनीति से प्रेरित’ और ‘संसाधनों की बर्बादी’ करार दिया है.
प्रशासनिक गतिरोध खत्म करने की पहल
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि पिछली सरकार द्वारा दायर किए गए ये मामले न केवल राजनीतिक द्वेष से प्रेरित थे, बल्कि इनसे प्रशासनिक कामकाज में भी भारी बाधा उत्पन्न हो रही थी. मंत्री कपिल मिश्रा के नेतृत्व में कानून विभाग द्वारा तैयार प्रस्ताव में कहा गया है कि इस तरह की मुकदमेबाजी से नौकरशाही के भीतर ‘कठिनाई’ और ‘प्रशासनिक गतिरोध’ पैदा होता है, जिसका सीधा असर दिल्ली की नीति निर्माण और विकास परियोजनाओं पर पड़ रहा था.सरकार का मानना है कि इन मुकदमों के कारण अधिकारियों में भय का माहौल था और वे स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में हिचकिचा रहे थे. अब इन मामलों को वापस लेकर सरकार प्रशासन और उपराज्यपाल के बीच एक सामंजस्यपूर्ण माहौल बनाना चाहती है.

अदालतों में जल्दी सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया
भाजपा सरकार के गठन के तुरंत बाद पिछले साल ही इन मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया तेज कर दी गई थी. चूंकि ये मामले सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट की विभिन्न पीठों के समक्ष लंबित थे, इसलिए सरकार ने सभी संबंधित अदालतों में शीघ्र सुनवाई के आवेदन दायर किए थे. हाल ही में हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को वह याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी है, जिसमें उपराज्यपाल द्वारा किसानों के आंदोलन और दंगा मामलों में अपनी पसंद के वकील नियुक्त करने के फैसले को चुनौती दी गई थी. इसी तरह, पिछले साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने भी एलजी के खिलाफ दायर सात मामलों को वापस लेने की अनुमति प्रदान की थी.
कई मामले केवल राजनीतिक नंबर बनाने के लिए दायर-सरकार
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इनमें से कई मामले केवल राजनीतिक नंबर बनाने के लिए दायर किए गए थे. जनहित में इन परियोजनाओं और प्रशासनिक कार्यों को गति देने के लिए मुकदमों को वापस लेना आवश्यक था. चूंकि सुनवाई अलग-अलग तारीखों पर थी, इसलिए हमने अलग-अलग आवेदन देकर अदालतों से इन्हें बंद करने का आग्रह किया. विभागीय नोट के अनुसार, मुकदमों की इस वापसी से न केवल सरकारी खजाने पर वकीलों की फीस का बोझ कम होगा, बल्कि उन अधिकारियों को भी राहत मिलेगी जिन्हें बार-बार अदालतों के चक्कर काटने पड़ रहे थे.

दशक से चली आ रही 'जंग' पर लगा विराम
बता दें कि आम आदमी पार्टी के शासनकाल के दौरान पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, अनिल बैजल और वर्तमान एलजी वीके सक्सेना के साथ सरकार का लगातार टकराव बना रहा था. अब भाजपा सरकार का यह कदम दिल्ली के शासन मॉडल में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जहाँ 'टकराव' की जगह 'समन्वय' को प्राथमिकता दी जा रही है. इस फैसले से दिल्ली में केंद्र और राज्य के बीच पिछले एक दशक से चली आ रही 'जंग' पर विराम लग सकता है, जिससे रुकी हुई विकास योजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है.
पिछली आम आदमी पार्टी सरकार और उपराज्यपाल कार्यालय के बीच जिन मुद्दों पर सबसे ज्यादा तकरार हुई थी और जो मामले अदालतों तक पहुंचे थे, उनमें मुख्य रूप से ये शामिल हैं.
जिन मुद्दों पर सबसे ज्यादा तकरार हुई थी और जो मामले अदालतों तक पहुंचे
- डीईआरसी चेयरमैन की नियुक्ति: विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष के चयन को लेकर हुआ विवाद.
- सर्विसेज डिपार्टमेंट: अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग पर नियंत्रण का मुद्दा.
- आयुष्मान भारत मिशन: केंद्र की स्वास्थ्य योजना को दिल्ली में लागू करने पर खींचतान.
- दिल्ली जल बोर्ड फंड: फंड जारी करने को लेकर मुख्य सचिव और मंत्रियों के बीच विवाद.
- दंगा मामलों में वकील: दिल्ली दंगा और किसान आंदोलन से जुड़े मामलों में अभियोजकों (वकीलों) की नियुक्ति का अधिकार.
- यमुना प्रदूषण समिति: यमुना सफाई के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के अधिकार क्षेत्र का मामला.
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