सीजीएल रद्द होने से नौकरी गंवाने वाले कर्मियों का आंदोलन, प्रोजेक्ट भवन के समक्ष धरना भी रहा जारी
जेपीएससी से चयनित सरकारी पदाधिकारियों की नौकरी बहाल होने के बाद सीजीएल से चयनित कर्मियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है. भुवन किशोर झा की रिपोर्ट.

Published : August 20, 2026 at 10:36 PM IST
रांचीः झारखंड हाईकोर्ट के द्वारा 11वीं से 13वीं जेपीएससी से चयनित सरकारी पदाधिकारियों, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नौकरी बहाल होने के बाद सीजीएल से चयनित कर्मियों को भी राहत मिलने की उम्मीदें जग गई है. इन सबके बीच सरकार के फैसले से नौकरी गंवाने वाले कर्मियों का आंदोलन गुरुवार भी जारी रहा.
कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद कार्मिक विभाग द्वारा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द किए जाने से नाराज कर्मियों ने एक बार फिर प्रोजेक्ट भवन पहुंचकर सरकार विरोधी नारे लगाए और इस फैसले को वापस लेने की मांग की. प्रोजेक्ट भवन के समक्ष आंदोलन कर रहे इन कर्मियों को हालांकि समझा बूझाकर बाहर कर दिया गया, मगर इनकी नाराजगी साफ झलक रही थी.
आंदोलन जारी रखेंगेः नौकरी गंवाने वाला व्यक्ति
सरकार के फैसले से एक झटके में नौकरी गंवाने वाले पवन कुमार चौबे कहते हैं कि जब तक यह फैसला वापस नहीं होता है तब तक हम आंदोलन जारी रखेंगे. उन्होंने कहा कि इस मामले में न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया गया है और हमें उम्मीद है कि जरूर हमें राहत मिलेगी. लेकिन सरकार ने जिस तरह से आनन फानन में यह फैसला लिया है उससे मेरे जैसे हजारों लोग सड़क पर आ गए हैं.
तिरंगा यात्रा के अलावा प्रदर्शन का दौर रहेगा जारी
सरकार के फैसले से नौकरी गंवाने वाले कर्मियों का आंदोलन आगे जारी रखने का निर्णय लिया गया है. तिरंगा यात्रा के अलावा अलग-अलग कार्यक्रम के जरिए प्रदर्शन कर रहे इन कर्मियों का मानना है कि सरकार जब तक हमारी मांगे नहीं मानती हैं तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा.
तिरंगा यात्रा भी निकाली
जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद्द किए जाने से नाराज कर्मियों ने आज मोरहाबादी बापू बाटिका से अलवर्ट एक्का चौक तक तिरंगा यात्रा निकालकर विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान कई आंदोलनकारी गले में रस्सी लगाकर न्याय दो फांसी दो का नारा लगाते नजर आए. गुरुवार देर शाम राजधानी की सड़क पर हाथों में तिरंगा लेकर उतरे इन सरकारीकर्मियों ने हेमंत सरकार के इस फैसले के विरोध में जमकर नारेबाजी की.

सरकार के फैसले से नाराज इन कर्मियों ने कहा कि हम न्यायालय का दरवाजा तो खटखटाएंगे ही मगर जिस तरह से सरकार ने यह तुगलकी फरमान जारी किया है उससे हजारों सरकारीकर्मी सड़क पर आ गए हैं. उन्होंने सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार इस परीक्षा की जांच करना चाहती है तो जरूर कराए और जो भी गलत नियुक्त हुए हैं उन्हें सेवा से हटाया जाए. मगर जिस तरह से पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द किया गया यह कतई हमें बर्दाश्त नहीं है और हम अंतिम दम तक लड़ाई लड़ते रहेंगे.
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