साल के आखिरी तीन दिन सरकारी कामकाज ठप, छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने दी ये चेतावनी
कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की तीन दिवसीय हड़ताल बुधवार को खत्म हो गई.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 1, 2026 at 1:15 PM IST
दंतेवाड़ा: 11 सूत्रीय मांगों को लेकर दंतेवाड़ा में कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन की तीन दिवसीय हड़ताल का बुधवार को समापन हुआ. भव्य रैली निकालकर कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया और 15 दिन में मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई.
29 दिसंबर से शुरू हुई थी हड़ताल
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर 29 दिसंबर से हड़ताल शुरू हुई थी. 31 दिसंबर को हड़ताल के आखिरी दिन, जिलेभर के अधिकारी-कर्मचारियों ने एकजुट होकर भव्य रैली निकाली. फेडरेशन ने मांग रखी है कि उनकी लंबित मांगों को जल्द पूरा किया जाए.
कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की चेतावनी
कर्मचारियों ने 15 दिनों के भीतर मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिए जाने पर आने वाले समय में उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है. कर्मचारियों का कहना है कि सभी अधिकारी-कर्मचारी एकजुट होकर बड़े और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.
तीन दिन तक ठप रहा सरकारी कामकाज
तीन दिवसीय हड़ताल के कारण दंतेवाड़ा जिले के लगभग सभी सरकारी विभागों में कामकाज पूरी तरह से ठप रहा. कलेक्ट्रेट, तहसील कार्यालय, जनपद पंचायत, नगर पालिका, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास, राजस्व विभाग सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्यालयों में सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं.
ग्रामीणों को हुई ये परेशानियां
दूरदराज के ग्रामीण इलाकों से आए लोगों को प्रमाण पत्र, पेंशन, राजस्व प्रकरणों, जनकल्याणकारी योजनाओं और अन्य जरुरी सरकारी कामों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. कई लोग बिना काम हुए ही वापस लौटने को मजबूर दिखे.
कर्मचारियों में गहरा असंतोष
कर्मचारियों ने बताया कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है. छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि कर्मचारियों के हक और भविष्य की सुरक्षा के लिए किया गया है.
पदाधिकारी ने लगाए ये आरोप
फेडरेशन के जिला पदाधिकारी अरविंद यादव ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि 11 सूत्रीय मांगों को लेकर लगातार ज्ञापन सौंपे गए, बैठकें हुईं और आश्वासन भी मिले, लेकिन जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे मजबूर होकर हड़ताल जैसा कदम उठाना पड़ा.कर्मचारियों का कहना है कि ये मांगें उनके और उनके परिवार के भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं.
प्रमुख मांगें
⦁ पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
⦁ वेतन विसंगतियों को दूर करना
⦁ लंबित महंगाई भत्ते का भुगतान
⦁ पदोन्नति में आ रही बाधाओं को समाप्त करना
⦁ कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
⦁ सेवा शर्तों में सुधार

