बिहार में इस महीने से महंगी हो जाएगी बिजली! जानें प्रति यूनिट क्या होगी कीमत
125 यूनिट फ्री बिजली देने वाली बिहार सरकार अब उपभोक्ताओं को बड़ा झटका दे सकती है. 1 अप्रैल से बिजली की दरें बढ़ सकती हैं.

Published : February 11, 2026 at 1:39 PM IST
पटना: बिहार में बिजली उपभोक्ताओं को नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ महंगाई का सामना करना पड़ सकता है. यानी 1 अप्रैल से बिहार में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं. इसके पीछे कारण है कि राज्य की दोनों बिजली वितरण कंपनियों, साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने पुराने बकाये की भरपाई के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव बिहार विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखा है.
1 अप्रैल से महंगा हो सकता है बिजली: कंपनियों ने लगभग 3200 करोड़ रुपये की बकाया राशि की वसूली को इसका मुख्य आधार बताया है. इस पैसा को लेने के लिए विद्युत अपीलीय न्याधिकरण ने फैसला दिया है. ऐसे में यदि बिहार विद्युत नियामक आयोग इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो 1 अप्रैल से घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के बिजली बिल में इजाफा होना तय माना जा रहा है.

बिजली कंपनियों का पक्ष: बिजली कंपनियों का कहना है कि वर्ष 2012 में बिहार राज्य विद्युत बोर्ड के विभाजन के बाद बनी वितरण कंपनियों को पुराने खर्चों और देनदारियों की भरपाई राज्य सरकार द्वारा की जानी थी. हालांकि अब तक यह राशि पूरी तरह अदा नहीं हो सकी है. कंपनियों के अनुसार, इस बकाये के कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार दबाव में है और बिजली खरीद और संचालन से जुड़े खर्चों को वहन करना मुश्किल होता जा रहा है.
11 वर्ष बाद फिर उठा मुद्दा: कंपनियों ने आयोग को बताया है कि यह पहली बार नहीं है जब इस बकाये का मुद्दा उठाया गया हो. साल 2015 में भी इसी राशि को बिजली टैरिफ में जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उस समय नियामक आयोग ने इसे अस्वीकार कर दिया था. अब 11 वर्ष बाद एक बार फिर इसे नए सिरे से आयोग के समक्ष इसे प्रस्तुत किया गया है. कंपनियों का तर्क है कि यदि इस बकाये का समाधान नहीं किया गया तो बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा.
आयोग ने प्रस्ताव पर विचार शुरू किया: बिहार विद्युत नियामक आयोग ने इस प्रस्ताव पर विचार प्रक्रिया शुरू कर दी है. आयोग का कहना है कि बिजली दरों का निर्धारण वास्तविक खर्च, राजस्व की स्थिति और उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखकर किया जाता है. राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी के कारण फिलहाल उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम दरों पर बिजली उपलब्ध हो रही है. लेकिन यदि सब्सिडी की राशि में वृद्धि नहीं की जाती है तो प्रस्तावित दर बढ़ोतरी का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है.

35 पैसा प्रति यूनिट के दर से बढ़ोतरी का प्रस्ताव: बिजली कंपनियों का यह भी दावा है कि हाल के वर्षों में बिजली उत्पादन और खरीद की लागत में लगातार वृद्धि हुई है. कोयले की कीमतों में इजाफा, परिवहन खर्च बढ़ना और रखरखाव पर आने वाला खर्च उनकी वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर रहा है. ऐसे में कंपनियों का मानना है कि पुराने बकाये की भरपाई और दरों में संशोधन उनके लिए आवश्यक हो गया है. इस बकाया राशि समेत बढ़ने वाले कीमतों की भरपाई के लिए बिजली कंपनियों ने आयोग को 35 पैसा प्रति यूनिट के दर से बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है.
सरकार निकाले समाधान: बिहार में ऊर्जा क्षेत्र से लंबे समय से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडे का कहना है कि बिजली कंपनियों की आर्थिक समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं. लेकिन केवल दर बढ़ाना इसका स्थायी समाधान नहीं हो सकता. सरकार और कंपनियों को मिलकर ऐसी नीति तैयार करनी होगी जिससे घाटा कम हो और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ भी न पड़े.
"35 पैसा प्रति यूनिट बढ़ोतरी का जो प्रस्ताव है, वह बिजली उपभोक्ताओं पर काफी आर्थिक बोझ देगा. महंगाई बढ़ जाएगी. सरकार सब्सिडी राशि बढ़ाकर इसकी भरपाई कर सकती है."- सुनील पांडे,वरिष्ठ पत्रकार
आयोग के अंतिम फैसले पर नजर: फिलहाल यह मामला बिहार विद्युत नियामक आयोग के विचाराधीन है. यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होकर 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रह सकती हैं. ऐसे में राज्य के लाखों बिजली उपभोक्ताओं की नजरें आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं. यह निर्णय तय करेगा कि आने वाले वित्तीय वर्ष में बिहार के लोगों को बिजली के मोर्चे पर राहत मिलेगी या उन्हें महंगाई का एक और झटका झेलना पड़ेगा.
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