बिहार के इस जिले में 15 दिनों में बिक गए 455 इलेक्ट्रिक वाहन, PM की अपील और सब्सिडी का असर
बिहार के गया में 15 दिनों में 455 इलेक्ट्रिक वाहन बिक गए. सरकार की ओर से सब्सिडी भी दी जा रही है.

Published : May 23, 2026 at 7:45 PM IST
गयाजी: पीएम मोदी की अपील और बिहार सरकार की सब्सिडी योजना की घोषणा के बाद राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ गयी है. गया में 15 दिनों में 455 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई है. शहरी क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों में उछाल देखने को मिल रहा है.
इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ी: बांके बाजार में स्थित आयरा सेल्स के मालिक मो. इकराम खान कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब से पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील की है, तब से इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ी है. यहां हर दिन 5-6 स्कूटी बिक रही है, जबकि यह ग्रामीण क्षेत्र है. इसके पीछे बिहार सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी योजना भी है.
"वाहनों की अचानक बिक्री बढ़ने का कारण बिहार सरकार के द्वारा दी जाने वाली अनुदान की राशि भी है, जिसका लाभ लेने के लिए लोग तेजी से इसे खरीदारी शुरू कर रहे हैं. शोरूम में गाड़ियों की संख्या भी बढ़ा दी है." - मो. इकराम खान, आयरा सेल्स के मालिक
बिहार सरकार दे रही है भारी सब्सिडी: दरअसल तेल ईंधन की किल्लत के बाद इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ गई है. बिहार सरकार इसके लिए सब्सिडी भी दे रही है. सामान्य वर्ग के लोग अगर फोर-व्हीलर वाहन खरीदते हैं तो उन्हें 1.25 लाख रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाती है, जबकि अगर एससी-एसटी को 1.50 लाख रुपए दिए जाते हैं. दूसरी ओर, टू-व्हीलर की खरीदारी पर सामान्य वर्ग को 7500 रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाती है, जबकि एससी-एसटी वर्ग के लोगों को 10000 रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाती है.
437 लोगों ने टू व्हीलर खरीदी: डीटीओ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, गयाजी में 410 से अधिक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर गाड़ियों पर सब्सिडी दी गई. जिला में टू-व्हीलर की खरीदारी करने वालों में 437 लोगों को 10000 और 7500 के अनुसार प्रोत्साहन राशि भेजी जा चुकी है, जबकि फोर-व्हीलर की खरीदारी करने वाले कुल 18 व्यक्ति इस सब्सिडी का लाभ ले चुके हैं. अभी कुछ और खरीदारों को राशि भेजने की प्रक्रिया में है. प्रोत्साहन राशि देने में लेट नहीं किया जाता है.
ऑनलाइन आवेदन आसान: डीटीओ ने बताया कि जिला परिवहन विभाग के अनुदान पोर्टल पर लगातार आवेदन आ रहे हैं. अनुदान की राशि लेने की प्रक्रिया भी ज्यादा जटिल नहीं है. इस प्रक्रिया को शोरूम के द्वारा ही किया जाता है. जिस शोरूम से इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदा जाएगा, वहीं शोरूम की ओर से परिवहन विभाग के पोर्टल पर आवेदन कर दिया जाता है.
"टू व्हीलर की खरीदने वालों में 437 लोग शामिल हैं. 7500 से 10000 रुपये तक सब्सिडी दी गयी है. फोर व्हीलर खरीने वालों में कुल 18 व्यक्ति शामिल हैं. इन्हें 1.25 लाख से 1.50 लाख तक सब्सिडी दी गयी है." -राजेश कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी, गया
पहले करनी होगी खरीदारी: पहले गाड़ी परचेज करेंगे तभी सब्सिडी के लिए अप्लाई होगा और सब्सिडी की राशि मिलेगी. गाड़ी खरीदने से पहले राशि नहीं दी जाती है. डीबीटी के माध्यम से पैसे लाभकों के खाते में सीधे ट्रांसफर कर दिए जाते हैं. अगर किसी तरह की कोई समस्या होती है तो लोग यहां सीधे जिला परिवहन विभाग में आकर भी आवेदन कर सकते हैं. हालांकि ऐसी नौबत कम ही आती है, क्योंकि शोरूम से सारा काम हो जाता है.
महिलाओं के लिए भी सब्सिडी: महिला को अतिरिक्त सरकारी मदद दी जा रही है. इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन पर 12,000 की सब्सिडी दी जाएगी. कार खरीदने पर 1 लाख रुपये मिलेंगे. कमर्शियल या मालवाहक वाहन पर महिला को 50 हजार और SC/ST महिला को 60,000 तक सब्सिडी मिलेगी.
पीएम मोदी की अपील का असर: डीटीओ राजेश कुमार ने बताया कि जब से सरकार ने, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से ईंधन बचाने की अपील की है, तब से सड़कों पर गाड़ियों के परिचालन में कमी आई है. लोगों ने अपनी गाड़ियों की संख्या में कमी की है. सरकारी कार्यालय में भी देखा जा रहा है कि अधिकारी गाड़ियों का कम उपयोग कर रहे हैं.

ट्रैफिक की समस्या कम: रोड पर ट्रैफिक कम हुआ है. पहले सिंगल कार में एक ही व्यक्ति चलते थे, लेकिन अब देखा जा रहा है कि गाड़ियों में लोग सिंगल नहीं चल रहे हैं. एक गाड़ी में चार-पांच लोग आ रहे हैं. जिले के सभी सरकारी कार्यालय में भी गाड़ियों का उपयोग कम कर दिया गया है.
ट्रैफिक नियमों का उलंघन कम: ट्रैफिक कम होने से चालान कटने में भी आई बड़ी कमी जिला परिवहन पदाधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि चूंकि ट्रैफिक में कमी आई है, ऐसे में चालान कटने में भी कमी आई है. चालान तभी कटता है जब ट्रैफिक नियमों का लोग उल्लंघन करते हैं. अभी ट्रैफिक में कमी है तो उल्लंघन करने वालों की भी कमी आई है, जिसकी वजह से चालान कम कट रहे हैं.
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