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झारखंड में SIR नोटिस पर सुनवाई से पहले चुनाव आयोग का दो दिवसीय विशेष कैंप, देश के कई राज्यों से अधिक यहां ASDDO वोटर

झारखंड में SIR के दौरान करीब 63 लाख से अधिक मतदाताओं को चुनाव आयोग ने नोटिस भेजकर जवाब मांगा है. भुवन किशोर झा की रिपोर्ट.

SIR IN JHARKHAND
झारखंड में SIR नोटिस पर सुनवाई (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : August 22, 2026 at 5:01 PM IST

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रांचीः राज्य में चल रहे मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान करीब 63 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस भेजकर चुनाव आयोग ने जवाब तलब किया है. इन मतदाताओं को 24 अगस्त से मतदाता होने का साक्ष्य के साथ दावा करना होगा. इससे पहले शनिवार 22 अगस्त से दो दिनों तक प्रत्येक मतदान केंद्र पर चुनाव आयोग विशेष कैंप आयोजित कर ऐसे मतदाताओं की समस्या का समाधान करने में जुटा है जिनका किसी वजह से ड्राफ्ट रोल में नाम नहीं है या कोई अशुद्धि है. ये वैसे मतदाता हैं जो या तो नो मैपिंग श्रेणी में हैं या जिनका डेमोग्राफिकल सीमिलर इंट्री है.

सबसे ज्यादा तार्किक विसंगति (Logical discrepancy) श्रेणी के वोटर हैं जिनकी संख्या 45,55,227 है. संदेह के घेरे में आए इन मतदाताओं में वैसे वोटर हैं, जिनका नाम पिछले एसआईआर से मैच करता है, मगर नाम या माता-पिता के नाम में अशुद्धि, जन्म तिथि या एक से अधिक जगहों पर वोटर लिस्ट में नाम है. इन्हें नोटिस भेजा जाएगा.

जानकारी देते मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मतदाता और बीएलओ (Etv Bharat)

झारखंड में इन राज्यों से अधिक हैं ASDDO वोटर

  • महाराष्ट्र -21.25%,
  • कर्नाटक- 19.60%,
  • तेलंगाना- 21.70%
  • दिल्ली - 33%
  • हरियाणा-16.39%
  • चंडीगढ़ - 12.8%
  • आंध्र प्रदेश- 10.80%
  • ओडिशा-6.02%
  • मणिपुर -7.5%
  • मिजोरम- 5.2%
  • मेघालय -7.68%
  • सिक्किम- 8%
  • झारखंड-16.50%

देश के चार राज्यों को छोड़कर अन्य 8 राज्यों से अधिक है झारखंड में ASDDO वोटर

देश के 12 राज्यों में इन दिनों चल रहे SIR के दौरान ASDDO श्रेणी में महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलांगना और दिल्ली को छोड़कर अन्य 8 राज्यों हरियाणा, चंडीगढ़, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय और सिक्किम से ज्यादा झारखंड में ASDDO श्रेणी के मतदाताओं का प्रतिशत है.

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में 21.25%, कर्नाटक में 19.60%, तेलंगाना में 21.70% और दिल्ली में 33% ASDDO पाया गया है. वहीं हरियाणा में 16.39%, चंडीगढ़ में 12.8%, आंध्र प्रदेश में 10.80%, ओडिशा में 6.02%, मणिपुर में 7.5%, मिजोरम में 5.2%, मेघालय में 7.68% और सिक्किम में 8% पाया गया है. जबकि झारखंड में कुल मतदाताओं का 16.50% है. यदि बात करें बिहार की जहां चुनाव आयोग के द्वारा 24 जून 2025 से 30 सितंबर 2025 तक कराए गए एसआईआर में अंतिम रुप से 65 लाख वोटर को मतदाता सूची से हटाया गया था.

  • वर्तमान मतदाता सूची के ड्राफ्ट पब्लिकेशन में मतदाताओं की कुल संख्या–2,21,01,249 है,
  • विभिन्न कैटेगरी के मतदाता जिन्हें निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी स्तर से नोटिस भेजे जाएंगे-63,24,116
  • नो मैपिंग वाले वोटर के सत्यापन हेतु-14,03,205
  • डेमोग्राफिकल सीमिलर इंट्री (DSE) के आधार पर सत्यापन हेतु मतदाताओं की कुल संख्या-3,65,684
  • तार्किक विसंगति के आधार पर सत्यापन हेतु मतदाताओं की संख्या-45,55,227

नोटिस देते वक्त बीएलओ वोटर के साथ लेंगे तस्वीर

राज्य में करीब 63 लाख ऐसे वोटर हैं जिन्हें नोटिस मिलने के बाद साक्ष्य देना होगा. ड्राफ्ट मतदाता सूची में नो-मैप अथवा तार्किक विसंगति की श्रेणी में आने वाले ऐसे सभी मतदाताओं की ईआरओ (Electoral registration officer) स्तर पर सुनवाई होगी. संबंधित मतदाताओं को नियमानुसार नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज प्राप्त किए जाएंगे. साथ ही निर्धारित दस्तावेज एवं तथ्यों के आधार पर ही ईआरओ (ERO) स्तर पर सकारण आदेश पारित किया जायेगा. नोटिस बीएलओ के माध्यम से भेजा जायेगा. इस दौरान बीएलओ संबंधित मतदाता के साथ तस्वीर खीचेंगे.

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार के अनुसार ड्राफ्ट सूची में नो-मैप अथवा तार्किक विसंगति वाले किसी भी मतदाता का नाम बिना विधिसम्मत सुनवाई एवं सक्षम प्राधिकारी द्वारा आदेश पारित किए मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा. प्रत्येक मामले का निष्पक्ष, पारदर्शी एवं भारत निर्वाचन आयोग द्वारा बताये गये दिशा निर्देशों के अनुसार निस्तारण सुनिश्चित किया जायेगा.

मतदाता को एक सप्ताह का समय दिया जा रहा है

चुनाव आयोग द्वारा जारी नोटिस के अनुसार निर्धारित तिथि को सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी के समक्ष संबंधित वोटर को उपस्थित होना पड़ेगा. यदि पहली बार भेजे गए नोटिस पर संबंधित मतदाता उपस्थित नहीं होते हैं तो दूसरी नोटिस जारी की जाएगी और उसके बाद सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी के द्वारा निर्णय लिया जाएगा. नोटिस मिलने के बाद साक्ष्य के साथ उपस्थित होने के लिए एक सप्ताह का समय संबंधित मतदाता को दिया जा रहा है.

विशेष कैंप में लगी रही भीड़, मतदाता करते रहे शिकायत

चुनाव आयोग के द्वारा आयोजित दो दिनों के विशेष कैंप में मतदाताओं की भीड़ लगी रही. इस दौरान मतदान केंद्रों पर फॉर्म-6 और फॉर्म-8 भरने के लिए लोग पहुंचते रहे. हरमू के एक मतदान केंद्र पहुंचे एमएस प्रसाद कहते हैं कि वो हमेशा से यहां मतदान करते रहे हैं. मगर अब शुकुरहुटू में अपना आवास होने की वजह से अब वोटर लिस्ट में वहां नाम है, मगर उनके नाम में गड़बड़ी कर दिए जाने के कारण ड्राफ्ट रोल में नाम नहीं है, इसको लेकर तीन बार वह जा चुके हैं. अब कहा जा रहा है कि पेंशन या कोई ऐसे दस्तावेज की कॉपी दीजिए जो यहां के आप वोटर होने को प्रमाणित करता हो. इसी तरह एक अन्य वोटर उमेश प्रसाद कहते हैं कि उनका नाम एक वार्ड में है और परिवार के दूसरे सदस्यों का नाम अन्य वार्ड में कर दिया गया है.

विशेष कैंप में लोगों की समस्या सुन रहे बीएलओ जावेद अख्तर कहते हैं कि ट्रेसलेस वोटर की संख्या काफी है जिन्हें ढूंढना बेहद ही मुश्किल है. फोन से संपर्क कर रहे हैं, मगर जागरूकता के अभाव के कारण लोग आवेदन नहीं कर पा रहे हैं. बहरहाल चुनाव आयोग ने 1 अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष पूरा करने वाले सभी लोगों का नाम वोटर लिस्ट में शामिल हो इसके लिए सभी से पहल करने की अपील की है.

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