अप्रैल में शुरू होगा झारखंड में SIR, चुनाव आयोग की तैयारी पूरी, दूसरे राज्यों के सैकड़ों आवेदन रद्द
चुनाव आयोग ने झारखंड में एसआईआर कराने की तैयारी पूरी कर ली है.

Published : March 3, 2026 at 4:35 PM IST
रिपोर्ट-भुवन किशोर झा.
रांचीः झारखंड में मतदाता गहन पुनरीक्षण अप्रैल में शुरू होगा. चुनाव आयोग के निर्देश पर एसआईआर को लेकर सभी प्रारंभिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार के अनुसार राज्य में होने वाले मतदाता गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम एक ही चरण में संपन्न होगा. उन्होंने कहा कि यह देश का नौवां एसआईआर है. इससे पहले 8 एसआईआर हो चुके हैं.
चुनाव आयोग के निर्देशानुसार अप्रैल में राज्य में रहनेवाले सभी मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित की जाएगी. इसके लिए बीएलओ स्तर से लेकर राज्यस्तर पर सभी तैयारियां पूरी की गई हैं. उन्होंने कहा कि इसकी औपचारिक घोषणा होने के बाद डोर-टू-डोर वोटरों का सत्यापन होगा.
पश्चिम बंगाल से सत्यापन के लिए आए सर्वाधिक आवेदन रद्द
पश्चिम बंगाल सहित देश के अन्य राज्यों में हो रहे मतदाता गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने झारखंड का दस्तावेज देकर मतदाता होने की दावेदारी पेश की है.चुनाव आयोग द्वारा इन मतदाताओं के दस्तावेज की चल रही छानबीन में अब तक सैकड़ों डाक्यूमेंट्स फर्जी निकले हैं. चुनाव आयोग से मिली जानकारी के अनुसार मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में सर्वाधिक 2769 आवेदन पश्चिम बंगाल से आए हैं. जिसमें से अब तक 316 आवेदनों के साथ लगा दस्तावेज अवैध पाए गए हैं.
इसी तरह से देश के अन्य राज्य छत्तीसगढ़ से प्राप्त 106 में 14 आवेदन, गोवा से प्राप्त 69 आवेदन में 12, मध्यप्रदेश से प्राप्त 25 में से 2, गुजरात से प्राप्त 109 आवेदन में से 6, अंडमान से प्राप्त 58 आवेदन में से 3, राजस्थान से प्राप्त 25 में से 6, उत्तर प्रदेश से 44 आवेदन में से 9 आवेदन रद्द किए गए हैं. इस तरह से अब तक कुल 3208 प्राप्त आवेदन में से 368 रद्द कर दिए गए हैं. रद्द करने के पीछे की वजह प्राप्त दस्तावेज में गड़बड़ियां सामने आ रही हैं.
एसआईआर का आधार 2003 का वोटर लिस्ट होगा
झारखंड में अप्रैल 2026 में होने वाले मतदाता गहन पुनरीक्षण का आधार 2003 का वोटर लिस्ट होगा. चुनाव आयोग गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य स्पष्ट कर चुका है. जिसके तहत सभी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल करना है, ताकि वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें. कोई भी अपात्र मतदाता मतदाता सूची में शामिल न हों और वोटर लिस्ट में मतदाताओं के नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता लाई जा सके.
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार के अनुसार जिस किसी का नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज है उसे मतदाता होने की अपनी पात्रता स्थापित नहीं करनी होगी और जिनका नाम उसमें नहीं है उसके माता-पिता या घर के किसी सदस्य जो 2003 के वोटर लिस्ट में नाम दर्ज हैं उनके आधार पर मतदाता प्रमाणित किए जाएंगे.इसके अलावे विभिन्न प्रकार के पात्र सरकारी दस्तावेजों को भी मान्य किया है. जिसका उपयोग करके प्रमाण प्रस्तुत करना होगा.
1 जुलाई, 1987 से पहले जन्मे लोगों को अपनी जन्मतिथि और जन्मस्थान का कोई भी दस्तावेज जमा करना होगा. 1 जुलाई, 1987 और 2 दिसंबर, 2004 के बीच जन्मे युवाओं को अपनी जन्मतिथि और जन्मस्थान के साथ-साथ अपने माता-पिता में से किसी एक का दस्तावेज भी जमा करना होगा. 2 दिसंबर, 2004 के बाद जन्मे लोगों को अपनी और अपने माता-पिता दोनों की जन्मतिथि और जन्मस्थान का प्रमाण देना होगा.
बहरहाल, चुनाव आयोग के द्वारा की जा रही तैयारी के बीच इतना तो साफ हो गया है कि राज्य में मतदाता गहन पुनरीक्षण अप्रैल में होगा, जिसकी शुरुआत होते ही एक बार फिर झारखंड में भी सियासत गरमाने की आशंका है.
ये भी पढ़ें-
SIR के लिए दिए जा रहे झारखंड के दस्तावेज, पश्चिम बंगाल से सबसे अधिक 1640 आवेदन, 135 फर्जी
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का विवादित बयान, कहा- झारखंड में SIR का होगा पुरजोर विरोध

