उत्तराखंड चुनाव 2027: पोलिंग बूथों की संख्या बढ़ने से बदल सकता है चुनावी गणित, नई रणनीति बनाने में जुटे राजनीतिक दल
उत्तराखंड में 810 पोलिंग बूथों की संख्या बढ़ने के साथ ही राजनीतिक पार्टियों को ग्राउंड पर अपनी रणनीति भी बदलनी पड़ेगी. रिपोर्ट- रोहित सोनी-

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 27, 2026 at 1:35 PM IST
देहरादून: अगले साल 2027 में होने वाले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की वोटरों की तस्वीर में एक बड़ा बदलाव आया है. प्रदेश में चल रहे एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के दौरान निर्वाचन आयोग ने प्रदेश में मौजूद 11,733 बूथों में 810 नए बूथों को शामिल किया है, जिसने राजनीतिक दलों की रणनीतियां बदल दी हैं. ऐसे में राजनीतिक दल नए बूथों पर संगठन को मजबूत करने में लगे हुए हैं.
दरअसल, राजनीतिक पार्टियां 'बूथ जीता तो चुनाव जीता' फॉर्मूले पर काम करती हैं. लंबे समय से कांग्रेस और बीजेपी उत्तराखंड में अपने बूथों को मजबूत करने में लगी हुई थी, लेकिन उत्तराखंड में एसआईआर शुरू होने के बाद प्रदेश में बूथों की संख्या बढ़ गई है. ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस को भी अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ेगा.
चुनाव आयोग से मिली जानकारी के अनुसार एसआईआर शुरू होने से पहले उत्तराखंड में कुल 11,733 बूथ थे. वहीं एसआईआर के दौरान बूथों की संख्या बढ़कर 12,543 हो गई है. यानी प्रदेश में 810 नए बूथ बनाए जाने हैं. यही बूथ बीजेपी और कांग्रेस के लिए फिलहाल चुनौती बने हुए हैं, क्योंकि नए बूथों पर न सिर्फ दोनों प्रमुख पार्टियों को नए सिरे से संगठनात्मक ढांचा खड़ा करना होगा, बल्कि नए बूथ पर वोटरों के हिसाब से जो नए समीकरण बने हैं, उस पर भी रणनीति तैयार करनी है.

उत्तराखंड में जिलावार बूथों की स्थिति:
- उत्तरकाशी जिले में पहले बूथों की संख्या 544 थी जो अब बढ़कर 558 हो गई है.
- चमोली जिले में पहले बूथों की संख्या 592 थी जो अब बढ़कर 633 हो गई है.
- रुद्रप्रयाग जिले में पहले बूथों की संख्या 362 थी जो अब बढ़कर 364 हो गई है
- टिहरी जिले में पहले बूथों की संख्या 963 थी जो अब बढ़कर 994 हो गई है.
- देहरादून जिले में पहले बूथों की संख्या 1882 थी जो अब बढ़कर 2045 हो गई है.
- हरिद्वार जिले में पहले बूथों की संख्या 1715 थी जो अब बढ़कर 1872 हो गई है.
- पौड़ी जिले में पहले बूथों की संख्या 945 थी जो अब बढ़कर 1008 हो गई है.
- पिथौरागढ़ जिले में पहले बूथों की संख्या 611 थी जो अब बढ़कर 651 हो गई है.
- बागेश्वर जिले में पहले बूथों की संख्या 381 थी जो अब बढ़कर 405 हो गई है.
- अल्मोड़ा जिले में पहले बूथों की संख्या 920 थी जो अब बढ़कर 949 हो गई है.
- चंपावत जिले में पहले बूथों की संख्या 344 थी जो अब बढ़कर 354 हो गई है.
- नैनीताल जिले में पहले बूथों की संख्या 1010 थी जो अब बढ़कर 1068 हो गई है.
- उधमसिंह नगर जिले में पहले बूथों की संख्या 1464 थी जो अब बढ़कर 1642 हो गई है.
मतदाता घटे, बूथों की संख्या: चुनाव आयोग के अनुसार एसआईआर से पहले प्रदेश में मतदाताओं की कुल संख्या 79,60,762 थी, लेकिन 14 जुलाई को जारी अनंतिम मतदाता ड्राफ्ट में मतदाताओं की संख्या घटकर 71,33,785 हो गई है. यानी 8,26,977 मतदाताओं के नाम डिलीट कर दिए गए. जिसके पीछे की वजह मतदाता की मृत्यु, स्थायी रूप से शिफ्ट होना, दो जगह पर नाम का होना और मतदाता का एब्सेंट होना शामिल है.

बावजूद इसके बूथों की संख्या बढ़ने की वजह ये है कि जिन भी बूथों पर मतदाताओं की संख्या 1200 से अधिक थी, या फिर चुनाव के दौरान सब बूथ बनाए जाते थे, उसको देखते हुए निर्वाचन आयोग ने नए बूथों का गठन किया. वहीं वोटरों की बात की जाए तो एसआईआर के बाद 14 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी, तब वोटरों की संख्या बढ़ या घट भी सकती है. राजनीतिक दलों की यहीं सबसे बड़ी परीक्षा है.
बीजेपी की तैयारी: नए बूथों के गठन के बाद राजनीति पार्टियों की तैयारियों के सवाल पर उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने कहा कि निर्वाचन आयोग के अनुसार उत्तराखंड में 810 बूथ बढ़ गए हैं. इन बढ़े हुए बूथों में भाजपा भी बूथ समिति का गठन करेगी. वर्तमान समय में बूथ की जो कमेटी है, उसमें से कुछ नेत एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले गए हैं. साथ ही बूथों की संख्या में भी बदलाव हुआ है. इसीलिए भाजपा प्रदेश में बूथ सशक्तिकरण अभियान चला रही है, जिसके तहत बूथ का गठन करना, बूथ का पुनर्गठन करना और उसको सरल ऐप में अपलोड करने का काम किया जा रहा है.

प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने बताया कि बूथ सशक्तिकरण अभियान में भाजपा के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता लगे हुए हैं. ऐसे में अगले कुछ दिनों में ही बढ़े हुए बूथों में बूथ गठन की प्रक्रिया संपन्न हो जाएगी.
चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण बूथ ही होता है. क्योंकि चुनाव के जीत का आधार बूथ से ही तय होता है. यही वजह है कि भाजपा ने अपना पूरा फोकस बूथ पर ही किए हुए है. भाजपा की ओर से चलाए जा रहे बूथ सशक्तिकरण अभियान से जहां एक ओर पार्टी के कार्यकर्ताओं में सक्रियता का माहौल बनेगा तो वही दूसरी ओर बूथ को सशक्त और मजबूत बनाने का काम होगा.
-कुंदन परिहार, प्रदेश महामंत्री, भाजपा-
कांग्रेस की रणनीति: वहीं कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉ प्रतिमा सिंह ने कहा कि जिला और महानगर अध्यक्षों का चयन होने के साथ ही पार्टी ने बूथ पर काम करना शुरू कर दिया है.
फिलहाल साढ़े 11 हजार से अधिक बूथों पर बूथ अध्यक्ष के साथ ही पूरी कमेटी का गठन किया जा चुका है. ऐसे में जो 810 नए बूथ बढ़े हैं, उसको लेकर पार्टी में मंथन चल रहा है. साथ ही वार्ड अध्यक्ष से लेकर महानगर व जिला अध्यक्ष को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि नए बूथों पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी जाए.
-डॉ प्रतिमा सिंह, प्रदेश प्रवक्ता- उत्तराखंड कांग्रेस
कांग्रेस भी मानती है कि चुनाव जीतने के लिए बूथ काफी महत्वपूर्ण होता है. यही वजह है कि कांग्रेस इस बात पर जोर दे रही है कि जब बूथ मजबूत होगा तभी पार्टी मजबूत होगी. कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी का पूरा फोकस बूथ और वार्ड पर है. क्योंकि बूथ और वार्ड मजबूत होगा तो उस विधानसभा में कांग्रेस की मजबूती तय है.
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