ETV Bharat / state

जिस लोईये को शान से पहनते थे हिमाचल निर्माता डॉ परमार, उसे मिला GI टैग, किन्नौर के लिए भी सुख की खबर

इन्हें मिलाकर अब तक हिमाचल प्रदेश के कुल 17 पारंपरिक उत्पादों को जीआई पंजीकरण मिल चुका है.

HIMACHAL PRODUCTS GET GI TAG
हिमाचल के उत्पादों को मिला GI टैग (FILE@ETVBHARAT)
author img

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : July 1, 2026 at 8:25 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

शिमला: छोटे पहाड़ी राज्य हिमाचल की शान लोइया अब GI टैग के साथ विश्व मंच पर स्थापित होगा. हिमाचल निर्माता डॉ वाई एस परमार जिस लोईये को शान के साथ धारण करते थे, उसे GI टैग के लिए चुना गया है. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और कृषि महत्व वाले कुल आठ पारंपरिक उत्पादों को GI रजिस्ट्रेशन मिली है. सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस उपलब्धि के लिए हिमाचल वासियों को बधाई दी है.

HIMACHAL PRODUCTS GET GI TAG
सीएम सुक्खू ने इस उपलब्धि के लिए हिमाचल वासियों को दी बधाई (DIPR)

जिन पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई पंजीकरण मिला है, उनमें एनर्जी बूस्टर लाहौल स्पीति का सी-बकथॉर्न (छरमा), चम्बा के सलूणी इलाके की सफेद मक्का, चंबा मेटल आर्ट, सिरमौरी लोइया, किन्नौरी टोपी, मंडी की स्वादिष्ट डिश सेपूबड़ी, किन्नौरी सेब और किन्नौरी आभूषण शामिल हैं. इन आठ नए उत्पादों के साथ अब हिमाचल प्रदेश के कुल 17 पारंपरिक उत्पादों को हिमाचल प्रदेश विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद् (हिमकोस्ट) के माध्यम से जीआई पंजीकरण मिल चुका है. ये सभी उत्पाद हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान, हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों की खासियत दर्शाता है.

Sea-buckthorn of Lahaul Spiti
लाहौल स्पीति का सी-बकथॉर्न (FILE@ETVBHARAT)

सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार के कार्यकाल में हिमाचल की पारंपरिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के निरंतर प्रयासों का परिणाम है, जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की मौलिकता और पहचान सुरक्षित रहेगी, बाजार में इनकी मांग और मूल्य बढ़ेगा. साथ ही नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे. इस से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

Kinnauri cap and Kinnauri apple
किन्नौरी टोपी और किन्नौरी सेब (FB@KANGANARANAUT)

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चार अन्य पारंपरिक उत्पादों को भी जीआई टैग दिलाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है. इनमें चंबा जिले के पांगी क्षेत्र का भोट जौ, चंबा चुख, भरमौर क्षेत्र का प्लेक्ट्रेंथस शहद तथा सिरमौर जिले का अदरक शामिल हैं. मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को इन उत्पादों का जीआई पंजीकरण जल्द सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिए.

Sepu Badi GI TAGS
मंडी की स्वादिष्ट डिश सेपूबड़ी (FILE@ETVBHARAT)

सीएम सुक्खू ने कहा कि जीआई टैग मिलने से जनजातीय समुदायों, कारीगरों, बुनकरों, किसानों और पारंपरिक उत्पादकों की आजीविका को मजबूती मिलेगी. साथ ही उत्पादों में मूल्य संवर्धन, ग्रामीण उद्यमिता और सतत आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा. वहीं, हिमाचल प्रदेश पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव सुशील कुमार सिंगला ने कहा कि जीआई पंजीकरण इन उत्पादों को नकली और अनाधिकृत उपयोग से बचाने का प्रभावी माध्यम है. इससे इनकी ब्रांड पहचान मजबूत होगी, बाजार में इनकी स्वीकार्यता बढ़ेगी और निर्यात की संभावनाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा.

Sirmauri Loiya
सिरमौरी लोइया (FILE@ETVBHARAT)

उल्लेखनीय है कि इससे पहले हिमाचल प्रदेश के नौ उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है. इनमें कुल्लू शॉल, कांगड़ा चाय, चंबा रूमाल, किन्नौरी शॉल, कांगड़ा पेंटिंग, हिमाचली काला जीरा, हिमाचली चुल्ली का तेल, चंबा चप्पल के साथ लाहौली बुने हुए मोजे और दस्ताने शामिल हैं.

White Corn and Chamba Metal Art
सफेद मक्का और चंबा मेटल आर्ट (FILE@ETVBHARAT)

ये भी पढ़ें: हिमाचल के पूर्व मंत्री का निधन, 80 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

ये भी पढ़ें: 'हिमाचल में जारी रहेगी OPS, NPS नहीं होगी लागू, आउटसोर्स कर्मियों के लिए भी बनेगी नई नीति'