ईद-उल-अजहा पर खुला अजमेर दरगाह का जन्नती दरवाजा, अकीदतमंदों ने मांगी अमन-चैन की दुआ
साल में केवल चार बार खुलने वाला 'जन्नती दरवाजा' से गुजरने के लिए देशभर से आए अकीदतमंदों की लंबी कतारें लगी रहीं.

Published : May 28, 2026 at 8:24 AM IST
अजमेर : देशभर में आज ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार पूरे हर्षोल्लास और अकीदत के साथ मनाया जा रहा है. इस मुबारक मौके पर सूफी संत सुल्तानुल हिन्द हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज रहमतुल्लाह अलैही की नगरी अजमेर में आस्था का एक बेहद खूबसूरत और अनोखा नजारा देखने को मिला. सूफी संस्कृति के इस सबसे बड़े केंद्र पर तड़के फज्र की नमाज के ठीक बाद दरगाह शरीफ का पवित्र 'जन्नती दरवाजा' जायरीन के लिए विशेष तौर पर खोल दिया गया. जिसके बाद हजारों अकीदतमंदों ने दरवाजे से होकर ख्वाजा गरीब नवाज की बारगाह में हाजिरी दी और 7 चक्कर लगा कर ज़िंदगी मे अमन-चैन और ख़ुशहाली की दुआ मांगी.
इस खास मौके पर सुबह से ही दरगाह परिसर में जायरीन की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने जन्नती दरवाजे से गुजरने को अपनी खुशनसीबी बताया. दरगाह क्षेत्र “ख्वाजा का हिंदुस्तान जिंदाबाद” और धार्मिक नारों से गूंज उठा. पूरे परिसर में रूहानी और आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला. महिलाएं , बच्चे और बुज़ुर्ग ईद की खुशियो में जन्नती दरवाज़ा से ख्वाजा साहब के आस्ताना शरीफ में हाज़री के लिए पहुंचे,जहा उन्हें विशेष तौर पर सऊदी अरब के "गिलाफ़े क़ाबा" का दीदार भी नसीब हुआ.
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प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था : त्योहार पर भीड़ को देखते हुए दरगाह कमेटी, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. केसरगंज ईदगाह से लेकर दरगाह क्षेत्र के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया है. आला अधिकारी खुद सुबह से ही व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए हैं ताकि जायरीन को जियारत में कोई परेशानी न हो. गौरतलब है कि अजमेर दरगाह का यह ऐतिहासिक जन्नती दरवाजा साल में सिर्फ चार विशेष मौकों पर ही खोला जाता है. इसमें ईद, ईद-उल-अजहा (बकरीद), ख्वाजा साहब का सालाना उर्स और उनके पीरे मुर्शिद का उर्स शामिल है.

