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भिवाड़ी की आबोहवा साफ की कवायद, 70 उद्योगों से वसूला 45 लाख जुर्माना

प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने नियमों की पालना नहीं करने वाले उद्योग इकाइयों पर कार्रवाई की.

Efforts to reduce pollution in Bhiwadi
भिवाड़ी में प्रदूषण घटाने की कवायद (ETV Bharat Alwar)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 16, 2026 at 8:38 AM IST

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अलवर: देश के टॉप 10 प्रदूषित शहरों में शामिल औद्योगिक नगरी भिवाड़ी की आबोहवा साफ रखने के लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने सख्ती दिखाई है. लिहाजा भिवाड़ी में प्रदूषण का स्तर हरियाणा के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र धारू हेड़ा से नीचे आने लगा है. प्रदूषण के खिलाफ सरकार की सख्ती का बड़ा कारण भिवाड़ी के लोगों को शुद्ध हवा मुहैया कराने के साथ ही साल में करीब चार महीने ग्रेप की मार झेलने उद्योगों की उत्पादन संबंधी परेशानियों को दूर करना है.

भिवाड़ी प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी अमित जुयाल ने बताया कि राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने भिवाड़ी में नियमों की पालना नहीं करने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई की. भिवाड़ी में करीब 70 उद्योगों पर विभाग की ओर से कार्रवाई कर करीब 45 लाख रुपए का जुर्माना वसूला गया. उद्योगों पर यह कार्रवाई ग्रेप की पाबंदी के दौरान निर्माण कार्य करने के कारण की.

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क्षेत्रीय अधिकारी जुयाल ने बताया कि भिवाड़ी में प्रदूषण की समस्या स्थानीय से ज्यादा आसपास के राज्यों से जुड़ी है. प्रशासन भिवाड़ी में प्रदूषण घटाने के लिए सख्ती से काम कर रहा है. ग्रेप 4 लागू होने के दौरान मंडल की ओर से मैकेनाइज्ड रोड स्वीपर मशीन से धूल के कणों को नियंत्रित करने के साथ 10 से 12 टैंकरों से सड़कों पर लगातार पानी का छिड़काव कराया जाता है. जुयाल ने बताया कि भिवाड़ी से करीब 5 किमी दूर धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्र है, लेकिन वहां का एक्यूआई अधिकतर भिवाड़ी से ज्यादा रहता है. भिवाड़ी में करीब 5 हजार औद्योगिक इकाइयां है, लेकिन यहां प्रदूषण नियंत्रण के नियमों की सख्ती से पालना कराई जाती है. नियम तोड़ने पर उद्योगों पर मोटा जुर्माना लगाते हैं.

प्रदूषण के लिए पड़ोसी जिम्मेदार: जुयाल ने कहा कि भिवाड़ी में प्रदूषण के लिए पड़ोसी राज्य भी जिम्मेदार हैं. हर साल बारिश के बाद पड़ोसी हरियाणा, पंजाब में पराली जलाने की समस्या बढ़ती है. पराली जलाने का असर दिल्ली, हरियाणा व भिवाड़ी तक रहता है. इससे दीपावली के बाद भिवाड़ी के एक्यूआई में तेजी से बढ़ोतरी होती है. उद्योगों व स्थानीय लोगों को ग्रेप की पाबंदियां झेलनी पड़ती है.

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