देशव्यापी हड़ताल का कोयला खदानों में दिखा असर, सुबह से शाम तक डटे रहे मजदूर नेता
छत्तीसगढ़ की उर्जाधानी कोरबा में भारत बंद और मजदूर यूनियन की हड़ताल का असर दिखा है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 12, 2026 at 10:07 PM IST
कोरबा: चार नए लेबर कोड और सार्वजनिक उपक्रमों की निजीकरण सहित सरकार की अन्य नीतियों के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया गया था. गुरुवार को देशव्यापी हड़ताल का व्यापक असर एसईसीएल एरिया मुख्यालयों में देखने को मिला. कोरबा में सुबह से खदानों के बाहर यूनियन के नेता प्रदर्शन करते नजर आए. नारेबाजी कर उन्होंने सरकार की नीतियों की खिलाफत की. इस दौरान यूनियन नेताओं ने देश में लागू लेबर कोड बिल को उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने और श्रमिकों के अधिकारों का हनन बताया. एसईसीएल प्रबंधन ने हड़ताल का खदानों पर आंशिक असर का बयान जारी किया है. यह भी कहा है कि अंडरग्राउंड माइन्स में कुछ खास असर नहीं रहा.
हड़ताल में ये यूनियन रहे शामिल
हड़ताल को एचएमएस, इंटक, एटक और सीटू के पदाधिकारियों ने संबोधित किया. इन चारों ट्रेड यूनियनों ने लेबर कोड बिल वापस लेने समेत अन्य मांगों पर देशव्यापी हड़ताल को समर्थन दिया है. एसईसीएल समेत कोल इंडिया की दूसरी सहयोग कंपनियों में चारों ट्रेड यूनियन कोयला कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, ऐसे में कोल इंडिया ने हड़ताल को टालने अपील भी की थी.मगर आम सभा के बाद अब हड़ताल से पीछे नहीं हटने का संकेत ट्रेड यूनियनों ने दिया था और हड़ताल को सफल बनाने तैयारी में जुटे रहे.
यूनियन नेताओं ने हड़ताल को बताया सफल
यूनियन नेताओं ने कहा देश की आजादी से पहले और बाद के संघषों से 44 श्रम कानून बने और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हुई. कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी कानून बने. इसी श्रम कानून से खदान हादसे में किसी कर्मचारी के जान गंवाने या घायल होने पर परिवार को सहायता मिलती है.

अब उद्योगपतियों के हित के लिए केन्द्र सरकार ने नए लेबर कोड बिल लाने का काम किया है. इसके जरिए श्रमिकों के अधिकार के लिए आंदोलन को रोकना है. इससे श्रमिकों का शोषण बढ़ेगा. उद्योगपतियों को संसाधन के दोहन की खुली छूट मिल जाएगी-आरपी खांडे, मजदूर नेता

नए लेबर कोड से मजदूरों के हक पर डाका पड़ेगा. उनके अधिकार छीने जाएंगे. आने वाले समय में कोयला कर्मियों की नौकरी खतरे में पड़ जाएगी- नवीन सिंह, मजदूर नेता

दीपका, गेवरा और कुसमुंडा क्षेत्रों में हड़ताल का असर
सभी एरिया से एसईसीएल मुख्यालय में लेबर कोड बिल के खिलाफ यूनियनों ने मोर्चा खोल दिया.नए लेबर कोड बिल के जरिए मजदूरों का हक और अधिकार छीना जा रहा है. इसे हर हाल में बचाना होगा. मजदूरों की सुरक्षा से ही देश सुरक्षित होगा. नए लेबर कोड बिल के प्रभावी होने से आने वाले समय में कोयला कर्मियों की नौकरी पर खतरा बढ़ जाएगा.

