शिक्षा मंत्री दिलावर बोले-पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने संस्कृत शिक्षा की उपेक्षा की, अब बदली रही तस्वीर
सरकार ने संस्कृत शिक्षा के विस्तार और बेहतर बनाने की दिशा में पांच नए संस्कृत विद्यालय खोलने और 224 विद्यालयों को क्रमोन्नत किया.

Published : February 23, 2026 at 8:29 PM IST
जयपुर: संस्कृत शिक्षा को लेकर राज्य सरकार के फैसलों के बीच संस्कृत शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को कठघरे में खड़ा किया. दिलावर ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने संस्कृत शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि जानबूझकर उपेक्षा की. इससे प्रदेश में संस्कृत की स्थिति कमजोर हुई. उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार इस स्थिति को बदलने के लिए ठोस फैसले ले रही है.
वेद पाठशालाएं और संस्कृत को नई पहचान :राज्य सरकार ने संस्कृत शिक्षा के विस्तार और बेहतर बनाने की दिशा में हाल में पांच नए संस्कृत विद्यालय खोलने और 224 विद्यालयों को क्रमोन्नत करने का कदम उठाया. नए विद्यालय आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू भी हो जाएंगे. सरकार के इस फैसले से ग्रामीण और छोटे कस्बों के छात्रों के लिए अपने ही क्षेत्र में उच्च स्तर तक संस्कृत विषय की पढ़ाई का मार्ग प्रशस्त होगा. छात्रों को संस्कृत आगे की शिक्षा के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही वरिष्ठ उपाध्याय स्तर तक अध्ययन की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी.
सरकार का दावा
- 5 नए विद्यालयों के खुलने से लगभग 975 छात्रों को मिलेगा सीधा लाभ
- वर्तमान में प्रदेश में कुल 1814 संस्कृत विद्यालय संचालित
- 1,26,306 छात्र फिलहाल अध्ययनरत
- पांच नए विद्यालय जुड़ने के बाद 1819 हो जाएगी संख्या
संस्कृत भाषा को मिल रही नई पहचान : संस्कृत शिक्षा को लेकर मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने संस्कृत शिक्षा की उपेक्षा की. बीजेपी सरकार ने 224 सेकेंडरी स्कूलों को सीनियर सेकेंडरी में क्रमोन्नत किया. साथ ही वेद पाठशालाओं का संचालन और संस्कृत में नवाचार को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. दिलावर ने दावा किया कि इस बार संस्कृत शिक्षा में जितने शिक्षकों की भर्ती की जा रही है, उतने पहले कभी नहीं हुए.
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रिक्तियों को भरने की कवायद :संस्कृत शिक्षा में लंबे समय से कक्षा 6 से 8 तक शिक्षकों की कमी महसूस की जा रही थी. इसे दूर करने के लिए हाल ही में तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती लेवल-2 ली गई. संस्कृत विद्यालयों के क्रमोन्नयन के साथ यदि समय पर शिक्षक नियुक्ति प्रकिया भी पूरी हो जाती है तो संस्कृत शिक्षा की गुणवत्ता में ठोस सुधार देखने को मिलेगा.
| विषय | पद |
| एसएसटी | 296 |
| हिंदी | 174 |
| अंग्रेजी | 221 |
| संस्कृत | 389 |
| गणित-विज्ञान | 1046 |
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