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हल्द्वानी में जारी है निजी स्कूलों की मनमानी, 10 और विद्यालयों को नोटिस, अब तक 27 संस्थानों को चेतावनी

हल्द्वानी के कई निजी स्कूलों ने एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के बजाय महंगी निजी प्रकाशनों की किताबें अनिवार्य कर दीं, इससे अभिभावक परेशान हैं

PRIVATE SCHOOLS ARBITRARY HALDWANI
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : May 5, 2026 at 2:30 PM IST

3 Min Read
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हल्द्वानी: नैनीताल जिले के हल्द्वानी में निजी स्कूलों की मनमानी पर जिला प्रशासन सख्त हो गया है. 10 और निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. आरोप है कि स्कूलों ने महंगी किताबें अनिवार्य कर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाला और नियमों का उल्लंघन किया. प्रशासन ने 15 दिन में जवाब और सुधार के निर्देश दिए हैं, वरना कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. इससे पूर्व भी 17 निजी विद्यालयों को नोटिस थमाए गए थे.

हल्द्वानी में निजी विद्यालयों की मनमानी जारी: नैनीताल जिले में निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर जिला प्रशासन सख्त रुख अपनाये हुए है. जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने जांच आख्या के आधार पर 10 और निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं. इससे पूर्व भी 17 स्कूल प्रशासन की कार्रवाई के दायरे में आ चुके हैं.

10 और विद्यालयों को भेजा गया नोटिस: जिन 10 विद्यालयों को नोटिस भेजा गया है, उन पर आरोप है कि उन्होंने निर्धारित एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के बजाय महंगी निजी प्रकाशनों की किताबें अनिवार्य कर दीं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा. इतना ही नहीं, कुछ स्कूलों द्वारा विशेष दुकानों से ही किताबें खरीदने का दबाव बनाने की शिकायतें भी सामने आई हैं.

निजी प्रकाशन की किताबें अनिवार्य करने और वेबसाइट पर जानकारी नहीं देने का आरोप: जांच में यह भी पाया गया कि कई विद्यालयों ने अपनी वेबसाइट पर आवश्यक जानकारी जैसे फीस स्ट्रक्चर और पुस्तक सूची सार्वजनिक नहीं की, जो नियमों का उल्लंघन है. यह कार्रवाई शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 और उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत की जा रही है.

निजी स्कूलों को दिया गया 15 दिन का समय: प्रशासन ने सभी संबंधित स्कूलों को 15 दिनों के भीतर संशोधित पुस्तक सूची जारी करने, एनसीईआरटी किताबों को प्राथमिकता देने और किसी भी प्रकार की विक्रेता बाध्यता खत्म करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही अभिभावकों से पहले खरीदी गई अनावश्यक किताबों के लिए धन वापसी या समायोजन सुनिश्चित करने को भी कहा गया है. अतिरिक्त शुल्क की वसूली को आगामी फीस में एडजस्ट करने के निर्देश दिए गए हैं.

मनमानी करने वाले निजी स्कूलों की मान्यता हो सकती है रद्द: प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में आदेशों का पालन नहीं किया गया, तो स्कूलों की मान्यता निलंबित या निरस्त की जा सकती है और कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी.
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