मानसून अलर्ट: कुचामन के स्कूलों में जर्जर कमरों पर 'ताला', झालावाड़ हादसे से लिया सबक, DEO बोले- सुरक्षा पहले
शिक्षा विभाग ने अधिकारियों को कागजी रिपोर्टों पर निर्भर रहने के बजाय अधिक से अधिक विद्यालयों का स्वयं निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं.

Published : July 2, 2026 at 2:17 PM IST
कुचामनसिटी: डीडवाना-कुचामन जिले में मानसून के मद्देनजर शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी सरकारी विद्यालयों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं.
जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) अजीत सिंह देथा एवं जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) रूपाराम ने सभी सीबीईओ और संस्था प्रधानों को आदेश जारी कर मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरतने को कहा है. विद्यालय खुलने के साथ ही भवनों की छतों की सफाई, नालियों की मरम्मत, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने तथा भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच अनिवार्य की गई है. जर्जर, असुरक्षित अथवा छत से पानी टपकने वाले भवनों में विद्यार्थियों को बैठाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है. ऐसे भवनों की बैरिकेडिंग कर प्रवेश रोकने के भी निर्देश दिए गए हैं.
जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) देथा ने बताया कि पूरी तरह जर्जर घोषित विद्यालय भवनों को ध्वस्त (डिस्मेंटल) करने की कार्रवाई जारी है. जिन विद्यालयों में एक या अधिक कमरे जर्जर हैं, उन्हें भी चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे. जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) रूपाराम ने बताया कि विभाग ने जर्जर विद्यालय भवनों को चिह्नित कर उन्हें शीघ्र ध्वस्त करने तथा निर्माण एवं मरम्मत कार्य के दौरान विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. जिन विद्यालयों में अतिरिक्त भवन या पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां अध्ययन कार्य सुरक्षित वैकल्पिक भवनों में संचालित कराया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो.
उन्होंने बताया कि अधिकारियों को केवल कागजी रिपोर्टों पर निर्भर रहने के बजाय अधिक से अधिक विद्यालयों का स्वयं निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं. निरीक्षण के दौरान सुरक्षा व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.शिक्षा विभाग का उद्देश्य मानसून के दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों को सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि पिछले वर्ष झालावाड़ में हुए स्कूल हादसे जैसी किसी भी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति न हो.

