अब दफ्तर में बैठे लिपिक भी करेंगे स्कूलों की निगरानी, देवघर प्रशासन की पहल
देवघर में स्कूलों की निगरानी के लिए जिला प्रशासन की ओर से अनोखी पहल की गई है. हितेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट.

Published : September 2, 2026 at 9:04 PM IST
देवघर:जिले की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए देवघर जिला प्रशासन की ओर से एक नई पहल शुरू की गई है. अब स्कूलों की निगरानी सिर्फ शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिला और प्रखंड स्तर के शैक्षणिक कार्यालयों में तैनात लिपिक भी स्कूलों की ऑनलाइन निगरानी करेंगे.
जिला शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार और जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार की ओर से जिले के विभिन्न शैक्षणिक कार्यालयों में कार्यरत लिपिक स्तर के कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने नियमित कार्यों के अलावा प्रतिदिन दो से तीन स्कूलों का वीडियो कॉल के माध्यम से निरीक्षण करें.
आधे से एक घंटे तक होगी स्कूलों की ऑनलाइन निगरानी
जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने बताया कि समय-समय पर शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों की ओर से स्कूलों का निरीक्षण किया जाता है. अब इस व्यवस्था में लिपिक स्तर के कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है, ताकि अधिक से अधिक स्कूलों की नियमित निगरानी हो सके और वहां की कमियों की जानकारी समय रहते मिल सके.
शिक्षा विभाग के लिपिकों को दी गई जिम्मेदारी
उन्होंने बताया कि जिला शिक्षा परियोजना कार्यालय, जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय और जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में कार्यरत सभी लिपिकों को प्रतिदिन अपने काम के अलावा करीब आधे से एक घंटे तक वीडियो कॉल के माध्यम से स्कूलों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है.
शिक्षकों और बच्चों की उपस्थिति पर खास नजर
वीडियो कॉल के जरिए होने वाले निरीक्षण के लिए शिक्षा विभाग की ओर से एक निर्धारित प्रारूप तैयार किया गया है. निरीक्षण के दौरान शिक्षकों की उपस्थिति, बच्चों की उपस्थिति, मध्याह्न भोजन की स्थिति, पुस्तकालय और किताबों की उपलब्धता के साथ-साथ अंग्रेजी और कंप्यूटर कक्षाओं के संचालन की जानकारी ली जाएगी.
बच्चों से भी होगी बातचीत
खास बात यह है कि निरीक्षण के दौरान सिर्फ शिक्षकों से जानकारी नहीं ली जाएगी, बल्कि स्कूल के कम से कम दो बच्चों से भी बातचीत की जाएगी. इसका उद्देश्य स्कूल की वास्तविक स्थिति की जानकारी सीधे बच्चों से हासिल करना है.
अब लिपिक स्तर के कर्मचारी भी वीडियो कॉल के माध्यम से स्कूलों का जायजा लेंगे. इस संबंध में लिपिक तरुण कांत झा ने बताया कि अधिकारियों के निर्देश के बाद नियमित रूप से स्कूलों की ऑनलाइन जांच की जाएगी. विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए प्रारूप के आधार पर स्कूलों की शैक्षणिक और व्यवस्थागत स्थिति की जानकारी लेकर एंट्री की जाएगी. इसकी रिपोर्ट भी अधिकारियों को सौंपी जाएगी है.
ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में होगा फायदा
वहीं, गोवर्धन उच्च विद्यालय के प्राचार्य हिमांशु शेखर ने जिला प्रशासन की इस पहल को सराहनीय बताया. उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा फायदा ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों को मिल सकता है, जहां कई बार शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति तथा कक्षा संचालन में अपेक्षित अनुशासन नहीं दिखता. उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ शिक्षक स्कूल की व्यवस्था के प्रति उदासीन रहते हैं. ऐसे में नियमित ऑनलाइन निगरानी से शिक्षकों में जवाबदेही बढ़ेगी और पढ़ाई की गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद है.
करीब दो हजार स्कूलों की निगरानी का लक्ष्य
देवघर जिला प्रशासन की यह पहल महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इससे शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ कार्यालय में बैठे कर्मचारियों को भी स्कूलों की जमीनी स्थिति से जोड़ने का प्रयास किया गया है.
हालांकि, इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगा कि ऑनलाइन निरीक्षण में कितनी गंभीरता और निरंतरता जारी रखा जाता है. जिले में करीब दो हजार स्कूल हैं. ऐसे में यदि लगातार इस व्यवस्था के तहत स्कूलों की निगरानी होती रही, तो कमियों की पहचान कर समय रहते उनमें सुधार किया जा सकता है और जिले की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है.
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