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ऑनलाइन सट्टा एप केस में विकास गर्ग पर शिकंजा, 21 अगस्त तक भेजे गए ईडी रिमांड पर

ऑनलाइन बेटिंग एप केस में विकास गर्ग की मुश्किलें बढ़ती जा रही है. रायपुर से रितेश तंबोली की रिपोर्ट

Raipur ED Office
रायपुर ईडी दफ्तर (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : August 19, 2026 at 10:51 PM IST

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रायपुर: ऑनलाइन सट्टा एप केस में विकास गर्ग को अदालत ने तीन दिनों की कस्टोडियल रिमांड दी है. अब विकास गर्ग 21 अगस्त तक ईडी की रिमांड पर रहेंगे. ऑनलाइन बुक और स्काई एक्सचेंज से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विकास गर्ग से प्रवर्तन निदेशालय पूछताछ करेगी. उसके बाद 21 अगस्त को फिर से उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा.

इससे पहले 14 दिनों की कस्टोडियल रिमांड खत्म होने के बाद बुधवार को ईडी ने विकास गर्ग को कोर्ट में पेश किया. अदालत में ईडी ने कोर्ट से 3 दिनों की कस्टोडियल रिमांड मांगी. जिसे कोर्ट ने मंजूर करते हुए 21 अगस्त तक प्रवर्तन निदेशालय को रिमांड दे दी है. इस तरह विकास गर्ग पर ईडी का शिकंजा और कस गया है.

ईडी के वकील ने दी जानकारी

प्रवर्तन निदेशालय के अधिवक्ता सौरभ कुमार पांडे ने बताया कि ऑनलाइन बेटिंग एप और स्काई एक्सचेंज से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विकास गर्ग को गिरफ्तार किया गया था. उसे बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया. इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने कस्टोडियल रिमांड की मांग की थी. कोर्ट ने इसे मंजूर करते हुए तीन दिनों की रिमांड दे दी है. इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय आरोपी विकास गर्ग से पूछताछ करेगी. विकास गर्ग को 14 जुलाई को दिल्ली स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया था. विकास गर्ग EBIX Inc. के चेयरमैन हैं. जिस पर विभिन्न कंपनियों, विदेशी निवेश और संपत्तियों के जरिए निवेश का आरोप है.

940 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का आरोप

विकास गर्ग पर ऑनलाइन सट्टा एप से 940 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का आरोप है. विकास गर्ग के कनेक्शन हरिशंकर टिंबरेवाल से भी था. हरिशंकर टिंबरेवाल के माध्यम से पैसा विकास गर्ग के पास जाता था. विकास गर्ग विदेश में अलग अलग कंपनिया खोलकर इस पैसे को इन्वेस्ट करके शेयर मार्केट और दूसरी चीजों में लगाया करता था. प्रवर्तन निदेशालय की जानकारी में यह बात आई कि विकास गर्ग स्काई एक्सचेंज नाम का एक और एप संचालित करते हैं. जिसमें बेसिकली ऑनलाइन ऐप का पैसा वहां ट्रांसफर किया जाता था. उसके बाद उस पैसे को शेयर कैपिटल के रूप में या फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के नाम पर इंडियन इकॉनमी में इन्वेस्टमेंट किया करता था.

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