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छत्तीसगढ़ में ईडी का बड़ा खुलासा, 2883 करोड़ का शराब महाघोटाला, सत्ता और सिस्टम की मिलीभगत उजागर

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी ने बड़ा खुलासा किया है. ईडी ने सत्ता, सिस्टम और सिंडिकेट की मिलीभगत की बात कही है.

Raipur ED office
रायपुर ईडी दफ्तर (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : December 30, 2025 at 7:26 PM IST

5 Min Read
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रायपुर: छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले में ईडी ने बड़ा खुलासा किया है. ईडी ने 26 दिसंबर 2025 को PMLA, 2002 के तहत छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में एक और सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की है. इसमें 2019 से 2023 के बीच राज्य के आबकारी विभाग में चले एक संगठित और सुनियोजित भ्रष्टाचार का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है, जिससे लगभग 2883 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) होने का दावा किया गया है. ईडी ने जांच में दावा किया है कि यह घोटाला बिना राजनीतिक संरक्षण और उच्च प्रशासनिक सहभागिता के संभव नहीं था.

क्या है ईडी के बड़े खुलासे जानिए ?

शराब घोटाले में ईडी ने बड़ा खुलासा करते हुए कवासी लखमा और चैतन्य बघेल को घोटाले का पॉलीटिकल एग्जीक्यूटिव बताया है. ED ने मुख्यमंत्री दफ्तर में पदस्थ रही सौम्या चौरसिया को पूरे घोटाले का की कॉर्डिनेटर बताया है. ED ने बताया कि छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला 2883 करोड़ का हुआ. शराब घोटाले में 382.82 करोड़ की चल चल और अचल संपत्तियों को अटैच किया गया है. रायपुर के होटल वेलिंगटन कोर्ट समेत ढेबर और बघेल परिवार की 1000 से ज्यादा प्रॉपर्टी को ईडी ने अटैच किया है.

ED Letter On Chhattisgarh Liquor Scam
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले पर ईडी का लेटर (ETV BHARAT)

चार चैनलों से चली लूट की मशीन

ED की जांच में सामने आया है कि एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट ने छत्तीसगढ़ की शराब नीति को निजी फायदे के लिए पूरी तरह हाईजैक कर लिया. अवैध कमाई चार अलग-अलग तरीकों से की गई.नीति में हेरफेर, बिना हिसाब की बिक्री, कार्टेल कमीशन और नए लाइसेंस सिस्टम के जरिए उगाही हुई. इस पूरे सिस्टम में सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाकर निजी जेबें भरी गईं.

सरकारी कीमत बढ़ाकर रिश्वत की वसूली

जांच के मुताबिक शराब सप्लायरों से रिश्वत वसूलने के लिए सरकारी खरीद में “लैंडिंग प्राइस” को कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया. इससे राज्य सरकार द्वारा चुकाए गए अतिरिक्त पैसे से ही रिश्वत का इंतजाम किया गया, यानी सरकारी खजाने को लूटकर उसी से भ्रष्टाचार को वित्तपोषित किया गया.

ED Investigation In Chhattisgarh Liquor Scam
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी की जांच (ETV BHARAT)

सरकारी दुकानों से काली शराब की बिक्री

एक समानांतर सिस्टम के जरिए सरकारी शराब दुकानों से ऑफ-द-बुक देसी शराब बेची गई. डुप्लीकेट होलोग्राम का इस्तेमाल किया गया और बोतलें नकद में खरीदी गईं, जिससे एक्साइज ड्यूटी और टैक्स पूरी तरह बचा लिया गया. इस अवैध बिक्री से करोड़ों रुपये की काली कमाई हुई.

डिस्टिलरी कार्टेल और सालाना कमीशन

ED के अनुसार डिस्टिलरी कंपनियों से हर साल मोटी रिश्वत ली जाती थी ताकि उनका बाजार हिस्सा सुरक्षित रहे और संचालन लाइसेंस में कोई दिक्कत न आए. इस कार्टेल सिस्टम ने प्रतिस्पर्धा को खत्म कर दिया और शराब कारोबार को पूरी तरह सिंडिकेट के कब्जे में कर दिया.

FL-10A लाइसेंस: विदेशी शराब से 60% मुनाफा सिंडिकेट को

जांच में यह भी सामने आया कि विदेशी शराब निर्माताओं से उगाही के लिए FL-10A नाम की नई लाइसेंस कैटेगरी बनाई गई. इसके तहत होने वाले मुनाफे का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा सीधे सिंडिकेट तक पहुंचाया गया.

सिस्टम और प्रशासन के शामिल होने का दावा

ED की प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में बताया गया है कि तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी नीति में हेरफेर और अवैध वसूली की रीढ़ थे. रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा, तत्कालीन एक्साइज कमिश्नर निरंजन दास और CSMCL के एमडी अरुण पति त्रिपाठी की भूमिका को केंद्रीय बताया गया है. इसके अलावा करीब 30 फील्ड-लेवल एक्साइज अधिकारियों पर प्रति केस तय कमीशन लेकर अवैध शराब बिक्री कराने का आरोप है.

राजनीतिक संरक्षण के आरोप

जांच में उच्च राजनीतिक स्तर पर संरक्षण के आरोप भी लगाए गए हैं. तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र चैतन्य बघेल और मुख्यमंत्री कार्यालय की डिप्टी सेक्रेटरी सौम्या चौरसिया पर नीति को मंजूरी देने और अपराध की कमाई के उपयोग में भूमिका निभाने का आरोप है.

प्राइवेट सिंडिकेट और कारोबारी नेटवर्क

ED के अनुसार इस घोटाले की कमान अनवर ढेबर और अरविंद सिंह के हाथों में थी. उनके साथ छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज लिमिटेड, भाटिया वाइन मर्चेंट्स और वेलकम डिस्टिलरीज जैसी कंपनियों ने अवैध निर्माण और कमीशन सिस्टम में भागीदारी की. कैश कलेक्शन और डुप्लीकेट होलोग्राम सप्लाई जैसे कामों के लिए अलग-अलग निजी एजेंट सक्रिय थे.

गिरफ्तारी, जब्ती और आगे की जांच

अब तक इस शराब घोटाले में 9 प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें अफसर, नेता और कारोबारी शामिल हैं. ED ने 382.32 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अटैच की हैं, जिनमें रायपुर का होटल वेनिंगटन कोर्ट सहित 1041 से अधिक संपत्तियां शामिल हैं. जांच एजेंसी के अनुसार यह कार्रवाई अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले समय में और बड़े खुलासे संभव हैं.

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