LUCC घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, ₹30 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति जब्त, ₹1.53 करोड़ कैश और सोना-चांदी बरामद
ईडी ने मुंबई और भोपाल में समीर अग्रवाल और उसके सहयोगियों से जुड़े कई आवासीय और व्यावसायिक ठिकानों पर PMLA के तहत सर्च ऑपरेशन चलाया

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 20, 2026 at 11:14 AM IST
देहरादून: लोन और निवेश के नाम पर हजारों करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़े LUCC घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है. ईडी मुख्यालय, नई दिल्ली की टीम ने 13 से 16 अगस्त 2026 तक मुंबई और भोपाल में समीर अग्रवाल और उसके सहयोगियों से जुड़े कई आवासीय और व्यावसायिक ठिकानों पर PMLA के तहत सर्च ऑपरेशन चलाया.
तलाशी के दौरान 30 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सूचीबद्ध शेयर और सिक्योरिटीज, म्यूचुअल फंड, LIC पॉलिसियां, बैंक खातों में जमा रकम और 9 महंगी गाड़ियां जब्त की गईं. साथ ही 1.53 करोड़ रुपए नकद, करीब 35.28 लाख रुपए की विदेशी मुद्रा और 5.25 करोड़ रुपए मूल्य का सोना-चांदी का बुलियन भी बरामद किया गया है.
ED, Headquarters Unit, New Delhi has carried out search operations under PMLA, 2002 from 13.08.2026 to 16.08.2026 at multiple residential and business premises linked to Sameer Agarwal and his associates across Mumbai and Bhopal, in connection to the SAGA group ponzi scam,… pic.twitter.com/UZA1DCIPmN
— ED (@dir_ed) August 18, 2026
LUCC और SAGA ग्रुप के खिलाफ जांच: ईडी ने बताया कि LUCC और उससे जुड़ी सहकारी समितियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों की पुलिस द्वारा दर्ज FIR के आधार पर जांच शुरू की गई थी. जांच में सामने आया कि साल 2009 से लोगों को फिक्स्ड डिपॉजिट और मंथली इनकम स्कीम के नाम पर निवेश के लिए आकर्षित किया गया.
आरोप है कि समीर अग्रवाल के SAGA ग्रुप की ओर से लोगों को तीन से पांच साल के भीतर निवेश की रकम को दोगुना या तिगुना करने का भरोसा दिया जाता था. इसके साथ ही कार, मकान और अन्य महंगे उपहार देने का लालच भी दिया गया. ईडी के अनुसार, बैंकिंग व्यवस्था और अवास्तविक रिटर्न का भरोसा देकर जनता से 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई गई.
निवेशकों के पैसे को निजी फायदे के लिए इस्तेमाल करने का आरोप: जांच एजेंसी के अनुसार, शुरुआत में निवेशकों को कुछ भुगतान किए गए, लेकिन बाद में निवेश की बड़ी रकम समीर अग्रवाल और उसके सहयोगियों की ओर से निजी फायदे और एजेंटों को मार्केट कमीशन देने में इस्तेमाल की गई. जनता से रकम मुख्य रूप से नकद में जुटाई गई और क्षेत्रीय कैश-चेस्ट के जरिए अलग-अलग जगहों पर भेजी गई.
ईडी का कहना है कि निवेश की रकम को देश-विदेश में अचल संपत्तियों में लगाने के लिए शेल कंपनियों और हवाला चैनलों का इस्तेमाल किया गया. जांच में ऐसे 50 से ज्यादा शेल संस्थानों का नेटवर्क सामने आया है, जिन्हें ऑपरेटरों द्वारा नियंत्रित किए जाने की बात सामने आई है.
समीर अग्रवाल फरार, पहले भी हो चुकी है कार्रवाई: ईडी के मुताबिक, समीर अग्रवाल को SAGA ग्रुप का CMD और मुख्य नियंत्रक बताया गया है. जांच एजेंसी ने इस मामले में पहले ही दो अलग-अलग अनंतिम कुर्की आदेश (Provisional Attachment Orders) के तहत संपत्तियों को अटैच किया है. साथ ही ग्रुप के एक प्रमुख पदाधिकारी रवि शंकर तिवारी को 14 जुलाई 2026 को PMLA के तहत गिरफ्तार किया गया था. ईडी ने 24 जुलाई 2026 को विशेष अदालत के समक्ष अभियोजन शिकायत भी दाखिल की है. फिलहाल मामले में ईडी की जांच जारी है.
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