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मुजफ्फरपुर और मोतिहारी में ED की छापेमारी, फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले में एक्शन

ईडी ने बिहार में दबिश दी है. फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले में मुजफ्फरपुर और मोतिहारी में छापेमारी की है. पढे़ें पूरी खबर..

ED Action In Bihar
बिहार में ईडी का छापा ((IANS))
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : January 8, 2026 at 5:02 PM IST

2 Min Read
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पटना: फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है. बिहार समेत देश के छह राज्यों में एक साथ छापेमारी कर संगठित जालसाज गिरोह के नेटवर्क को बेनकाब किया गया है. शुरुआती जांच में यह घोटाला रेलवे से जुड़ा हुआ सामने आया था लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, इसका दायरा 40 से अधिक सरकारी विभागों तक फैला पाया गया.

6 राज्यों में छापेमारी: ईडी की टीमें बिहार के मुजफ्फरपुर और मोतिहारी, पश्चिम बंगाल के कोलकाता, केरल, तमिलनाडु, गुजरात और उत्तर प्रदेश में कुल 15 ठिकानों पर तलाशी अभियान चला रही हैं. सूत्रों के मुताबिक यह गिरोह लंबे समय से सरकारी विभागों के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कर बेरोजगार युवाओं को ठग रहा था.

जांच में सामने आया है कि आरोपी सरकारी विभागों के आधिकारिक डोमेन से मिलते-जुलते नकली ईमेल आईडी का इस्तेमाल करते थे. इन ईमेल के जरिए उम्मीदवारों को फर्जी नियुक्ति पत्र भेजे जाते थे, जिससे नौकरी असली होने का भरोसा पैदा हो सके. गिरोह ने कई लोगों को रेलवे सुरक्षा बल, टिकट चेकर और तकनीशियन जैसे पदों पर नियुक्त दिखाया.

रेलवे में पता चला था घोटाला: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सबसे पहले भारतीय रेलवे में इस घोटाले का पता चला. बाद में ये बात सामने आई कि वन विभाग, रेलवे भर्ती, भारतीय डाक, आयकर विभाग, हाईकोर्ट, लोक निर्माण विभाग, बिहार सरकार, दिल्ली विकास प्राधिकरण और राजस्थान सचिवालय समेत 40 से अधिक सरकारी विभागों में भी फर्जी नियुक्ति हुई है.

जालसाजों का ट्रिक: पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए गिरोह ने कुछ मामलों में 2 से 3 महीने का शुरुआती वेतन भी दिया. इससे अभ्यर्थियों को नौकरी के असली होने का यकीन हो जाता था. इसके बाद उनसे नियुक्ति के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती थी. कई पीड़ितों ने नौकरी पक्की होने की उम्मीद में अपनी जमा पूंजी तक लगा दी.

गुरुवार सुबह से ही मुजफ्फरपुर और मोतिहारी समेत अन्य तमाम जगहों पर ईडी की कार्रवाई जारी है. छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.

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