सारंडा में नक्सलियों की आर्थिक घेराबंदी, लॉजिस्टिक सपोर्ट पर ब्रेक लगाने के साथ मैन-टू-मैन मार्किंग शुरू
सारंडा में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है. लॉजिस्टिक सपोर्ट पर ब्रेक के साथ मैन-टू-मैन मार्किंग शुरू है.


Published : February 18, 2026 at 5:04 PM IST
रांची: सारंडा जंगलों में 22 जनवरी 2026 को हुए बड़े एनकाउंटर में एक साथ 17 नक्सलियों के मारे जाने के बाद सुरक्षा बलों का मनोबल सातवें आसमान पर है. इस मुठभेड़ में एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष कमांडर अनल उर्फ पतिराम मांझी समेत कई हार्डकोर नक्सली ढेर हुए थे. अब नक्सली जंगलों में छिपकर लुका-छिपी का खेल खेल रहे हैं और किसी भी हाल में सुरक्षा बलों के सामने आने से बच रहे हैं.
झारखंड पुलिस ने अभियान को और तेज करते हुए नक्सलियों के समर्थकों और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने वालों के खिलाफ भी जंग छेड़ दी है. पुलिस का टारगेट 31 मार्च 2026 तक सारंडा को पूरी तरह नक्सली मुक्त करना है, क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने झारखंड सहित अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों से नक्सलवाद के पूर्ण सफाए की डेडलाइन मार्च 2026 तय की है. छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य रोजाना सफलता हासिल कर रहे हैं, जबकि झारखंड भी केंद्रीय बलों की मदद से मजबूत लड़ाई लड़ रहा है. झारखंड भी केंद्रीय बलों की सहायता से नक्सलों के खिलाफ एक मजबूत लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन नक्सलियों के एकमात्र गढ़ सारंडा फतेह करने में अभी भी कई तरह की मुश्किलें झारखंड पुलिस के सामने है.
साल के पहले ही महीने में एक साथ 17 नक्सलियों को एनकाउंटर में मार गिराने के बाद झारखंड पुलिस के हौसले बुलंद है. नक्सली बिहार जंगलों का फायदा उठाकर अपने आप को बचाने की जुगत में लगे हुए हैं. पुलिस को जो इनपुट मिल रहा है उसके अनुसार नक्सली किसी भी तरह के मूवमेंट को पूरी तरह से बंद कर चुके हैं. ऐसे में झारखंड पुलिस केंद्रीय बलों के साथ मिलकर अब नक्सलियों के खिलाफ नई रणनीति पर काम कर रही है.
एक तरफ जंगलों में नक्सलियों की तलाश तेज की गई है वहीं नक्सलियों तक पहुंचने वाले लॉजिस्टिक सपोर्ट पर पूरी तरह से ब्रेक लगाने के लिए नक्सल समर्थकों की तलाश में शुरू कर दी गई है. एक तरफ जहां झारखंड पुलिस और केंद्रीय बल के अफसर और जवान नक्सलियों की मांद तक पहुंचने की कोशिश में लगे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ नक्सलियों के मददगारों के खिलाफ भी छापेमारी शुरू कर दी गई है. वैसे तमाम नक्सलियों के सपोर्टर जो उन्हें अनाज और दूसरे तरह के सामान उपलब्ध करवा रहे हैं वे सभी सुरक्षाबलों के राडार पर है.
17 नक्सलियों के एनकाउंटर के बाद विशेष फोकस
22 जनवरी 2026 को किरीबुरू थाना क्षेत्र के अंतर्गत ऑपरेशन में 209 कोबरा, झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने शीर्ष माओवादी अनल उर्फ पतिराम मांझी के सशस्त्र दस्ते पर हमला बोला. सुबह करीब 6:30 बजे शुरू हुई मुठभेड़ में नक्सलियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, लेकिन जवानों ने आत्मरक्षा में प्रभावी जवाब दिया. मुठभेड़ के दौरान 17 नक्सलियों के शव बरामद हुए, साथ ही भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और दैनिक उपयोग की सामग्री जब्त की गई.
इससे पहले सारंडा में तीन साल से अधिक समय से जंग जैसे हालात थे, जहां नक्सलियों के विस्फोटों से जवान, ग्रामीण और जंगली जानवर हताहत हो रहे थे. लेकिन इस एनकाउंटर ने समीकरण पलट दिया.
अब मात्र दो एक करोड़ के इनामी बचे
कोल्हान क्षेत्र में पहले तीन एक करोड़ के इनामी नक्सली कमांडर थे, लेकिन 22 जनवरी के एनकाउंटर में अनल (एक करोड़) और अनमोल (25 लाख) समेत 17 मारे गए. अब भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता मिसिर बेसरा और असीम मंडल (दोनों पर एक-एक करोड़ का इनाम) के अलावा मोछु, अजय महतो, सागेन अंगरिया, अश्विन, चंदन लोहरा, अमित हांसदा उर्फ अपटन, जयकांत, रापा मुंडा अपने दस्ता सदस्यों के साथ सारंडा और कोल्हान में छिपे हैं. वर्तमान में दो एक करोड़ के इनामी नक्सलियों के साथ करीब 45 हार्डकोर कैडर डेरा डाले हुए हैं.
मैन-टू-मैन मार्किंग और रसद पर ब्रेक
वर्तमान समय की बात करें तो झारखंड में नक्सलवाद अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. सारंडा में वर्तमान समय में दो एक करोड़ के इनामी नक्सलियों के साथ करीब 45 हार्डकोर कैडर डेरा डाले हुए है. नक्सलियों के मूवमेंट पूरी तरह बंद होने के बाद सुरक्षा बलों ने रणनीति बदली है. अब मैन-टू-मैन मार्किंग शुरू की गई है. मसलन अगर एक करोड़ का इनामी नक्सली जंगल में छिपा है तो उसके समर्थक कौन हैं, कौन उन्हें मदद पहुंचा रहा है कौन उन तक जा रहा है, इन सभी बातों का गुप्त रूप से पता लगाया जा रहा है. विशेष टीमों का गठन किया गया है और सीआरपीएफ कोबरा टीम ठिकाने मिलते ही घेराबंदी के लिए तैयार बैठी है. सीआरपीएफ कोबरा टीम को नक्सलियों पर वार करने के लिए रखा गया है. जो नक्सलियों के ठिकाने का पता चलते ही उसे घेरने की पूरी तैयारी करके बैठे हैं.
झारखंड पुलिस ने नक्सलियों की रसद पूरी तरह रोक दी है. अनाज, कपड़े, दवाइयां और अन्य सामग्री की सप्लाई पर ब्रेक लगा दिया गया है. बंकरों में छिपाई गई सामग्री जब्त कर ध्वस्त की जा रही है. आईजी अभियान डॉ. माइकल राज ने बताया, "हमने नक्सलियों की लॉजिस्टिक सपोर्ट को पूरी तरह बंद करवा दिया है. उनके समर्थकों पर विशेष नजर रखी जा रही है और कार्रवाई की जा रही है."
आईजी अभियान के अनुसार नक्सलियों को आत्म समर्पण का भी प्रस्ताव दिया है. अगर वह आत्म समर्पण करते हैं तो उन्हें झारखंड पुलिस के बेहतरीन सरेंडर नीति का फायदा मिलेगा. आईजी अभियान ने बताया कि हम नक्सलियों के परिवार वालों से भी मिल रहे हैं और उन्हें यह भरोसा दिला रहे हैं कि समर्पण ही सबसे सुरक्षित रास्ता है. परिवार वाले भी सारंडा में रहने वाले नक्सलियों को समर्पण के लिए लगातार संपर्क कर रहे हैं. आईजी अभियान ने बताया कि हमने ग्रामीणों को भी नक्सलियों का सपोर्ट नहीं करने को लेकर समझाया है इस संबंध में लगातार जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है.
नए कैडर नहीं मिल रहे, आत्मसमर्पण का प्रस्ताव
नक्सलियों को नए कैडर नहीं मिल रहे हैं, जो संगठन की कमजोरी की बड़ी वजह है. रसद की कमी से जंगलों में रहना मुश्किल हो गया है. पुलिस ने आत्मसमर्पण का प्रस्ताव दिया है और झारखंड की बेहतरीन सरेंडर नीति का फायदा दिलाने का भरोसा दिया है. नक्सलियों के परिवार वालों से संपर्क कर उन्हें समझाया जा रहा है कि समर्पण ही सुरक्षित रास्ता है. ग्रामीणों को भी जागरूकता अभियान चलाकर नक्सल सपोर्ट न करने की सलाह दी जा रही है.
लगभग 15,000 जवान सारंडा की घेराबंदी में तैनात हैं, जिसे तोड़ना नक्सलियों के लिए बेहद मुश्किल है. सारंडा के फतेह होते ही झारखंड से नक्सलवाद का अंत माना जा रहा है.
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