ETV Bharat / state

फरीदाबाद के सत्येंद्र सिंह बांगा की अनोखी पहल, मंदिर के फूलों से तैयार कर रहे इको-फ्रेंडली गुलाल

फरीदाबाद में मंदिरों के फूलों से सत्येंद्र सिंह बांगा प्राकृतिक गुलाल तैयार कर समाज को खास संदेश दे रहे हैं.

Faridabad Holi by natural gulal
फरीदाबाद के सत्येंद्र सिंह बांगा की अनोखी पहल (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Haryana Team

Published : February 28, 2026 at 12:06 PM IST

|

Updated : February 28, 2026 at 12:19 PM IST

7 Min Read
Choose ETV Bharat

फरीदाबाद: फरीदाबाद में इस बार होली खास होने वाली है, क्योंकि यहां रंग सिर्फ खेले नहीं जाएंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देंगे. इस अनोखी पहल की शुरुआत विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह बांगा ने की है. दरअसल, महाशिवरात्रि के अवसर पर उन्होंने शहर के विभिन्न मंदिरों से चढ़ाए गए फूल इकट्ठा करने शुरू किए और उन्हें अलग करके सुखाया, पीसा और प्राकृतिक रंगों में तैयार किया. खास बात यह है कि इन रंगों में किसी भी प्रकार का केमिकल इस्तेमाल नहीं किया गया है.

महाशिवरात्रि के फूलों से इको-फ्रेंडली गुलाल (ETV Bharat)

मंदिरों के फूलों से बना प्राकृतिक गुलाल: सत्येंद्र सिंह बांगा इकट्ठा किए गए फूलों को पहले अच्छी तरह सुखा कर फिर उनकी पंखुड़ियों को अलग कर बारीक पीसकर गुलाल तैयार करते हैं. इस प्रक्रिया में किसी रासायनिक पदार्थ का उपयोग नहीं होता, जिससे यह पूरी तरह इको-फ्रेंडली बनता है. एक ओर लोग प्राकृतिक गुलाल के साथ सुरक्षित होली खेल सकेंगे, वहीं दूसरी ओर मंदिरों से निकलने वाले फूलों का फिर से उपयोग कर पर्यावरण को स्वच्छ रखने की दिशा में भी एक सार्थक कदम उठाया जा रहा है.

Faridabad Holi by natural gulal
फूलों से तैयार हो रहा गुलाल (ETV Bharat)

पर्यावरण संरक्षण के लिए सतत प्रयास: ईटीवी भारत सत्येंद्र सिंह बांगा से बातचीत की और गुलाल तैयार करने के पूरे प्रोसेस को जाना. ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान सत्येंद्र सिंह बांगा ने बताया कि, " मैं शुरू से ही पर्यावरण प्रेमी रहा हूं. प्रकृति संरक्षण के लिए लगातार मुहिम चलाता आ रहा हूं. इसी उद्देश्य से हमने विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन की स्थापना की. फाउंडेशन के जरिए हर साल लगभग 10 से 15 हजार पेड़-पौधे लगाए जाते हैं. पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर अपने समूह के साथ चर्चा के दौरान हमें पता चला कि मंदिरों से निकलने वाले फूल अक्सर प्रदूषण का कारण बनते हैं. कई बार ये फूल नालों में जाकर जाम की स्थिति पैदा कर देते हैं या कूड़े के ढेर में बदल जाते हैं. सड़ने के बाद ये कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है."

Faridabad Holi by natural gulal
गुलाल की पैक करते कर्मचारी (ETV Bharat)

फूलों से गुलाल बनाने की पहल: सत्येंद्र सिंह बांगा ने आगे बताया कि इन्हीं समस्याओं को देखते हुए उन्होंने सोचा कि जब हर चीज का पुनर्चक्रण संभव है, तो फूलों का क्यों नहीं.इसी सोच के साथ उन्हें जानकारी मिली कि फूलों से प्राकृतिक गुलाल तैयार किया जा सकता है. चूंकि होली का त्योहार नजदीक था, इसलिए उन्होंने महाशिवरात्रि से ही फरीदाबाद के 10 मंदिरों से फूल एकत्रित करने शुरू किए और उन्हें प्रोसेस कर गुलाल बनाना शुरू कर दिया. इस पहल का उद्देश्य न केवल होली को प्राकृतिक रंगों से मनाना है, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी है.

Faridabad Holi by natural gulal
गुलाल के लिए इकट्ठा की गई गुलाल की पंखुड़ियां (ETV Bharat)

फूल से गुलाल बनाने का पूरा प्रोसेस: सत्येंद्र सिंह बांगा ने बताया कि, "सबसे पहले हम मंदिरों में जाकर वहां से मंदिर में चढ़ाए गए फूल इकट्ठा करते हैं. फिर उसे हम लेकर आते हैं उसके बाद फूलों को सुखाया जाता है और उसमें से फूलों के अलावा अलग चीज होती है, जैसे बेलपत्र, स्कूल के माला में लगी धागा, प्रसाद इनको अलग किया जाता है. उसके बाद फूलों के एक-एक पंखुड़ियां को अलग-अलग किया जाता है. फिर उसे मिक्सी के जरिए बारीकी से पीसा जाता है. उसके बाद उसे हम छान लेते हैं. उसमें हम फूड कलर, पिसा हुआ चावल मिलते हैं. इस तरह से हमारा गुलाल तैयार हो जाता है."

Faridabad Holi by natural gulal
अलग-अलग रंगों के फूलों का ढेर (ETV Bharat)

नगर निगम की सराहना से बढ़ा मनोबल: सत्येंद्र सिंह बांगा ने बताया कि, "जब मैंने प्राकृतिक गुलाल तैयार किया और इसे लेकर धीरेंद्र खड़गटा के पास पहुंचे, तो नगर निगम ने मेरे काम की खुले दिल से सराहना की. कमिश्नर ने स्वयं भी मुझे इस गुलाल से टीका लगाया, जिससे मेरे और मेरे टीम का मनोबल बढ़ा.इस सफलता के साथ आने वाले समय में और भी अधिक मंदिरों और गुरुद्वारों से फूल इकट्ठा करने और बड़े स्तर पर गुलाल बनाने की योजना बनाई जा रही है, क्योंकि फरीदाबाद में लगभग 500 मंदिर और गुरुद्वारे हैं."

Faridabad Holi by natural gulal
फूलों को तोड़कर अलग कर रही महिला कर्मी (ETV Bharat)

मंदिर प्रशासन से सहयोग की अपील: सत्येंद्र सिंह बांगा ने मंदिर प्रशासन से भी अपील की है कि वे अपने स्तर पर फूलों को इकट्ठा कर प्रोसेस करके गुलाल बनाने का प्रयास करें. चूंकि मंदिरों में भक्तों की भीड़ रहती है, इसलिए वहां एक छोटा सेटअप लगाकर यह काम किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि, "फिलहाल उनकी टीम ने शुरुआत की है, लेकिन पूरे देश या शहरों में फूल इकट्ठा करना संभव नहीं है. इसलिए मंदिर प्रशासन को इस तरह की पहल करने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए ताकि फूलों का फिर से उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सके."

Faridabad Holi by natural gulal
तैयार नेचुरल गुलाल को पैक करते कर्मचारी (ETV Bharat)

फरीदाबाद में मुफ्त में प्राकृतिक गुलाल वितरण: सत्येंद्र सिंह बांगा ने बताया कि, "यह प्रोजेक्ट फिलहाल ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया है. कई हजार गुलाल पैकेट तैयार किए गए हैं, जिन्हें बेचने की बजाय लोगों को गिफ्ट किया जा रहा है. इस बार होली से पहले ही ये गुलाल लोगों तक पहुंचाए जाएंगे, ताकि वे जान सकें कि मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों का उपयोग कर प्राकृतिक और सुरक्षित गुलाल बनाया जा सकता है."

फूलों से धूप, दीप और इत्र भी बनाएंगे: सत्येंद्र सिंह बांगा ने आगे बताया कि, "भविष्य में इस पहल को बिजनेस के रूप में बढ़ाने की संभावना भी देखी जाएगी, लेकिन फिलहाल मजदूरी और अन्य खर्चों को वह अपनी जेब से वहन कर रहे हैं. इसके अलावा, सिर्फ गुलाल ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में मंदिरों के फूलों से धूप, दीप, अगरबत्ती और इत्र भी तैयार करने की योजना है. फिलहाल ट्रायल के रूप में गुलाल पर फोकस रखा गया है, ताकि लोगों में पर्यावरण और प्राकृतिक रंगों के प्रति जागरूकता बढ़ सके."

नगर निगम ने की सराहना: इस बारे में फरीदाबाद नगर निगम कमिश्नर धीरेंद्र खड़गटा ने कहा कि, "यह एक बहुत ही अच्छी पहल है कि सत्येंद्र सिंह बांगा ने मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों से गुलाल तैयार किया. महाशिवरात्रि से उन्होंने फरीदाबाद के कुछ मंदिरों से फूल इकट्ठा करना शुरू किया और अब वही फूल पर्यावरण बचाने के संदेश के साथ गुलाल में बदल रहे हैं. अगर ये फूल गुलाल में नहीं बदलते तो यह कूड़े में परिवर्तित होकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते. नगर निगम उनके साथ खड़ा है और आने वाले समय में और योजनाओं पर मिलकर काम करेगा."

मंदिर प्रशासन ने की प्रशंसा: वहीं, महारानी वैष्णो देवी मंदिर के प्रधान जगदीश भाटिया ने कहा कि, "महाशिवरात्रि के दौरान उनके मंदिर से चढ़ाए गए फूल सत्येंद्र सिंह बांगा ने लेकर उन्हें गुलाल में तब्दील किया और भेंट के रूप में प्रस्तुत किया. यदि यह फूल गुलाल में न बदलते तो कचरे में चले जाते या पैरों के नीचे गिर जाते. यह एक बहुत ही सराहनीय कार्य है."

समाज को दे रहे खास संदेश: मंदिरों के फूलों से तैयार यह गुलाल केवल होली के रंग भरने के लिए नहीं है, बल्कि यह लोगों को एक संदेश भी देता है कि सोच बदल जाए तो कचरा भी संसाधन बन सकता है. आने वाले समय में इन फूलों से धूप, अगरबत्ती और इत्र भी बनाने की योजना है. यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरक है, बल्कि होली जैसे त्योहार में प्राकृतिक और सुरक्षित रंगों का महत्व भी उजागर करती है.

ये भी पढ़ें:होली पर बेफिक्र होकर उड़ाएं रंग-गुलाल, बस रखें स्किन का ध्यान...जानिए क्या कहते हैं चर्म रोग विशेषज्ञ

Last Updated : February 28, 2026 at 12:19 PM IST