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BHU में तैयार हुआ औषधीय पिज्जा; स्वाद के साथ सेहत का खजाना, मिलेगी भरपूर एनर्जी

रस शास्त्र विभाग के वरिष्ठ प्रो. आनंद चौधरी ने बताया कि हम आयुर्वेदीय चिकित्सा शास्त्र के विद्यार्थी हैं.

BHU में तैयार हुआ औषधीय पिज्जा.
BHU में तैयार हुआ औषधीय पिज्जा. (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : May 1, 2026 at 7:29 AM IST

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Updated : May 1, 2026 at 12:10 PM IST

5 Min Read
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वाराणसी: मार्केट में तमाम तरह के पिज्जा मौजूद हैं. मगर यह आपको स्वाद तो देते हैं, लेकिन हेल्थ को नुकसान पहुंचाते हैं. हम आपको ऐसे पिज्जा के बारे में बताने जा रहे हैं, जो न सिर्फ सेहत का खजाना है बल्कि यह आपके शरीर को किसी तरीके से नुकसान भी नहीं पहुंचाएगा. भरपूर एनर्जी देगा. शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने का काम करेगा.

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की फूड साइंस टेक्नॉलॉजी विभाग की छात्रा अपर्णा सिंह ने इस पर रिसर्च की है. अपर्णा ने पिज्जा ही नहीं औषधीय कुकीज भी तैयार किए हैं. अपर्णा सिंह ने बताया कि आजकल के युवा फास्ट फूड, जंक फूड अधिक खाना पसंद कर रहे हैं. इसमें पोषक तत्व नहीं होते हैं, जिसके कारण लोगों की शारीरिक और मानसिक थकान बनी रहती है. ऐसे में हमने यह विषय लिया, ताकि युवाओं को पसंदीदा भोजन भी मिल सके और उसमें पोषत तत्व भी हों.

अपर्णा ने बताया कि साल 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स ईयर घोषित किया गया था. हमने मिलेट्स के साथ औषधियों को भी इसमें शामिल किया है. उन्होंने बताया कि FSSI की एक ऑरेंज बुक है, जिसका उद्देश्य है ‘फूड फॉर कैंपसेस’, चाहे वह यूनिवर्सिटी, कॉलेज या फिर ऑफिस में काम करने वाले यूथ हैं, उनको ऐसा भोजन दिया जाए जो साफ सुथरा हो और स्वास्थ्य वर्धक हो.

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए हमने यह विषय सोचा. हमने ये ध्यान रखा कि हम ऐसा फूड लाएं, जिसमें स्वाद भी हो. इसे तैयार करने में एक से डेढ़ साल लग गए. हम लोगों ने इसको लेकर बहुत से ट्रायल किए और हर ट्रायल के बाद उसमें कुछ न कुछ बदलाव करवाया.

स्वाद के साथ सेहत का खजाना. (Video Credit: ETV Bharat)

साइंटिफिक तरीके से पोषक तत्वों की जांच: अपर्णा ने बताया कि हमने 15-15 पैनलिस्ट से अपना उत्पाद चेक करवाया कि नॉर्मल फूड और हमारे तैयार किए गए फूड में कहीं अधिक अंतर तो नहीं आ रहा. इसके बाद हमने अपने उत्पाद की साइंटिफिक तरीके से पोषक तत्वों की जांच कराई.

इसको लेकर हमारी स्टडी शुरू हो गई है. लोग हमसे बोल रहे हैं इसे मार्केट में लाइए. हम लोग जरूर खरीदेंगे. हमें लगता है कि अच्छे परिणाम आएंगे. हमारी स्टडी में एक महीने तक लोगों को पिज्जा खिलाने का है, जिसके अभी एक-दो सप्ताह ही हुए हैं.

युवाओं की शुरुआती प्रतिक्रिया यही है कि वह इसे पसंद कर रहे हैं. साथ ही उन्हें अपने शरीर में एनर्जी लेवल में वृद्धि भी पता चल रही है. उन्होंने बताया कि पिज्जा के साथ हम कुकीज पर भी काम कर रहे हैं. हमने औषधीय कुकीज तैयार किए हैं, जिसके खाने से इम्युनिटी बूस्ट होती है.

युवाओं का स्वास्थ्य ठीक रहे और उन्हें एनर्जी मिले: रस शास्त्र विभाग के वरिष्ठ प्रो. आनंद चौधरी ने बताया कि हम आयुर्वेदीय चिकित्सा शास्त्र के विद्यार्थी हैं. हमारा उद्देश्य हमेशा यही रहा है कि इसकी महत्ता को भारत के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाएं. छात्रों की पहली पसंद पिज्जा होती थी.

ऐसे में हमने सोचा कि हम पिज्जा का आयुर्वेदीकरण करें. इसके लिए फूड साइंस टेक्नॉलॉजी से अपर्णा आईं और डॉ. अंकिता इसमें हमारी को-गाइड और सुपरवाइजर हैं. हम सभी ने मिलकर इस काम को किया और परिणाम अच्छे मिल रहे हैं. हमने यह सोचा कि अगर युवा पिज्जा खाएं तो उनको ऊर्जा मिले और उनका पेट भी साफ रहे. साथ ही, उनके स्वास्थ्य में कोई दिक्कत न आए.

कॉरपोरेट हाउस से आ रही औषधीय उत्पाद की मांग: उन्होंने बताया कि हमें उम्मीद है कि युवाओं को हम एक अच्छा विकल्प दे पाएंगे. यहां कैंपस और हॉस्टल्स में अच्छे रिव्यू मिल रहे हैं. लखनऊ से एक कॉरपोरेट हाउस ‘दादी मां के लड्डू’ से हमें फोन आया कि हम औषधीय लड्डू भी बनाना चाह रहे हैं.

इस तरीके की सोच और इसके विस्तार की संभावनाएं बहुत हैं. बस हमें यह चीजें शुद्ध रूप में बाजार में लानी हैं. जनता-जनार्दन, युवा इस चीज के स्वागत के लिए तैयार हैं. भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार भी इस तरह से प्रयासों को प्रमोट कर रही है और खाने में मिलेट्स का प्रयोग बढ़ाने की भी अपील करती है.

पिज्जा में शामिल किए गए पोषक तत्वl: ‘आहन पिज्जा’ में शामिल पोषक तत्वों की बात करें तो प्रति 100 ग्राम पिज्जा पर 289.03 किलो कैलोरी एनर्जी है. वसा 4.79 ग्राम, संतृत्प वसा 2.91 ग्राम, पॉलीअनसैचुरेटेड वसा 0.85 ग्राम, मोनेअनसैचुरेटेड वसा 1.03 ग्राम, प्रोटीन 9.78 ग्राम, आहारीय फाइबर 3.19 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट 1.70 ग्राम, चीनी 5.70 ग्राम, सोडियम 210.00 मिलीग्राम, अतिरिक्त चीनी 3.18 मिलीग्राम शामिल है. इसमें ग्लूटेन, दूध और सोया का भी प्रयोग किया गया है. इसका शोध रस शास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग, आयुर्वेद संकाय, आईएमएस, काशी हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा किया गया है.

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Last Updated : May 1, 2026 at 12:10 PM IST