बिहार में टोटो चालकों की मनमानी.. चंद रुपयों की लालच में रात को बुझा रहे हेडलाइट, नियमों की उड़ी धज्जियां!
कमाई बढ़ाने हेतु गया में ई-रिक्शा चालक रात में बिना हेडलाइट वाहन चलाकर नियमों और सुरक्षा की धज्जियां उड़ा रहे हैं. रत्नेश कुमार की रिपोर्ट

Published : August 18, 2026 at 9:01 PM IST
गया: बिहार के गया शहर में समय के पहिए के साथ सवारी गाड़ी के युगों का भी बदलाव होता आया है. अतीत में जहां पहले टमटम और फिर रिक्शा का चलन था, वहीं बाद में ऑटो और अब सड़कों पर ई-रिक्शा (टोटो) का पूरा दौर आ चुका है.वर्तमान समय में परिवहन का यह नया दौर रिक्शा और टमटम को काफी पीछे छोड़ चुका है.अब ऑटो से भी काफी आगे टोटो निकलता जा रहा है. गया की भौगोलिक बनावट के लिहाज से यह बदलाव काफी बड़ा माना जा रहा है.
यात्रियों की पहली पसंद: बैटरी परिचालित होने के कारण ई-रिक्शा को बढ़ावा देने के लिए सरकार की भी कई तरह की कल्याणकारी योजनाएं सक्रिय हैं. यही मुख्य वजह है कि आज बहुत ही फर्राटेदार तरीके से शहर हो या गांव की सड़कें, ई-रिक्शा हर ओर दौड़ रही हैं. पुराने रिक्शा की ही तरह घरों के दरवाजे तक इनकी पहुंच बेहद आसानी से हो जाती है, जिसके कारण यह यात्रियों का पसंदीदा साधन बन चुका है.
रात का खतरनाक जोखिम: यह ई-रिक्शा दिन के उजाले में तो सही तरीके से परिचालित होता है, लेकिन रात के समय के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि रात में सड़कों पर फर्राटे से दौड़ रहे ई-रिक्शा खुद खतरे की प्रत्यक्ष बानगी पेश कर रहे हैं. गया शहर की व्यस्त सड़कों पर रात के वक्त यह गंभीर खतरा हर पल मंडरा रहा है जो चिंताजनक है.
हेडलाइट की बत्ती गुल: शहरवासियों का कहना है कि ई-रिक्शा की हेडलाइट की बत्ती पूरी तरह गुल रहती है और इनकी ड्राइविंग निरंतर ऑन रहती है जो कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकती है. शहर में थोड़ी सी ज्यादा कमाई करने के चक्कर में चालकों द्वारा यह काफी बड़ा जोखिम रोजाना उठाया जा रहा है. सबसे हैरानी की बात तो यह है कि न तो ट्रैफिक विभाग इसे लेकर आज तक कोई कदम उठा सका है और ना ही कोई दंडात्मक कार्रवाई कर सका है.
लहरिया कट का आतंक: गया शहर में वर्तमान समय में डेढ़ हजार से भी अधिक टोटो दिन रात सड़कों पर चलते हैं. दिन में जहां भारी भीड़भाड़ के बीच ई-रिक्शा के नाबालिग चालक परिचालन के दौरान खतरनाक तरीके से लहरिया कट मारते हुए दिखते हैं. सवारी दिखते ही ये चालक आगे, सामने या पीछे कौन है यह देखे बिना अचानक से ब्रेक लगा देते हैं जिससे कई बार इनके पीछे वाले वाहन टकरा जाते हैं.

अंधेरे में तेज रफ्तार का जानलेवा खेल: दिन में तो यह परिचालन एक बड़ा खतरा दिखता ही है, लेकिन रात में होने वाले खतरे की बात और भी अधिक चिंताजनक है. दरअसल गया शहर में शाम ढलते ही जो भी ई-रिक्शा परिचालित होते हैं, उनमें से लगभग 80 से 90 फीसदी ऐसे ई-रिक्शा होते हैं जिसके चालक अपने वाहनों की लाइटें बिल्कुल नहीं जलाते हैं. उनकी हेडलाइट पूरी तरह बुझी रहती है, इसके बावजूद उनके वाहनों की रफ्तार काफी तेज रहती है.
माइलेज का वास्तविक गणित: दरअसल ई-रिक्शा पेट्रोल या डीजल जैसे ईंधनों से नहीं, बल्कि पूरी तरह से बैटरी की ऊर्जा से चलता है और बैटरी से ही इसका संपूर्ण परिचालन होता है.टोटो चालक जीतन कुमार का कहना है कि इसमें जो बैटरी लगी होती है, उसे एक बार पूरी तरह चार्ज करने पर 120 किलोमीटर तक चलने का दावा इसे बनाने वाली निर्माता कंपनी द्वारा किया जाता है. हालांकि सड़कों पर औसतन एक बार चार्ज करने पर ई-रिक्शा 100 किलोमीटर के आसपास चलता है.
चंद रुपयों का लालच: टोटो चालक जीतन कुमार बताते हैं कि यदि ई-रिक्शा के अनिवार्य उपकरण जैसे हेडलाइट और हॉर्न का प्रयोग न किया जाए, तो औसतन 100 किलोमीटर चलने वाला टोटो इससे कुछ ज्यादा दूरी तय करता है. टोटो चालक मौखिक रूप से बताते हैं कि यदि हेडलाइट और हॉर्न न बजाया जाए, तो 10 किलोमीटर ज्यादा ई-रिक्शा चलाया जा सकता है. बस इसी माइलेज को बढ़ाने और ज्यादा पैसे कमाने के चक्कर में चालक रात में हेडलाइट नहीं जलाते हैं. एक अन्य ई-रिक्शा चालक राजेश ने रात में बिना लाइट चलने पर सफाई देते हुए कहा कि मेरी हेडलाइट में तकनीकी खराबी आ गई है.

ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन: कुछ रुपयों की चाहत में ई-रिक्शा चालक खुद को तो खतरे में डाल ही रहे हैं, साथ ही साथ यात्रियों की अनमोल जान भी खतरे में डाल रहे हैं. यह स्थिति ग्रामीण इलाकों में थोड़ी कम है, किंतु गया के शहरी क्षेत्रों में यह लापरवाही काफी ज्यादा देखने को मिलती है. गया शहरी क्षेत्र में कई ऐसी जगहें हैं जहां रात में अंधेरे का साया होता है जो बड़े खतरे का सबब बन सकता है.
"अधिकांश चालक रात में लाइट बंद करके चलते हैं ताकि बैटरी कम खपत हो और माइलेज बढ़े जिससे कमाई ज्यादा हो सके, हालांकि यह तरीका बहुत खतरनाक साबित हो सकता है और मैं खुद हमेशा लाइट जलाकर चलता हूं." - जीतन कुमार, टोटो चालक
नाबालिग चालकों की मनमर्जी: गया शहर के निवासी रोहित कुमार ने बताया कि ई-रिक्शा बेहतर सेवा दे सकती है, किंतु रात में हेडलाइट नहीं जलाना बहुत बड़ी लापरवाही है. सबसे ज्यादा नाबालिग ही ई-रिक्शा का परिचालन कर रहे हैं जिनका कोई रूट नहीं है और जहां कहीं भी पाते हैं वहीं वाहन खड़ा कर देते हैं तथा टोकने पर वे लड़ाई-झगड़ा भी कर देते हैं.
नियमों की उड़ती धज्जियां: शहर के एक अन्य नागरिक विकास कुमार ने बताया कि गिनती भर ई-रिक्शा चालकों को छोड़कर ज्यादातर चालक रात में हेडलाइट बंद करके ही अपने वाहन का परिचालन करते हैं जो उनकी सरासर मनमौजी है. वे हेडलाइट नहीं जलाएंगे तो बैटरी डिस्चार्ज नहीं होगी और ज्यादा पैसे कमा सकेंगे, लेकिन इससे कभी भी गंभीर और जानलेवा हादसे हो सकते हैं.
"गिनती भर ई-रिक्शा चालकों को छोड़कर ज्यादातर चालक रात में हेडलाइट बंद करके ही अपने वाहन का परिचालन करते हैं जो उनकी सरासर मनमौजी है. वे हेडलाइट नहीं जलाएंगे तो बैटरी डिस्चार्ज नहीं होगी और ज्यादा पैसे कमा सकेंगे, लेकिन इससे कभी भी गंभीर और जानलेवा हादसे हो सकते हैं."- विकास कुमार, स्थानीय

गया जिले का आंकड़ा: ई-रिक्शा विक्रेता साहिल इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर बबलू कुमार का कहना है कि मैंने खुद लगभग 700 ई-रिक्शा की बिक्री की है और गया शहर में तकरीबन 1000 से 1500 के बीच तथा पूरे गया जिला की बात करें तो इसकी संख्या 5000 से ऊपर है. मैंने भी ऐसा देखा है कि रात में ज्यादातर ई-रिक्शा वाले हेडलाइट बुझाकर चलते हैं, जो खतरनाक है और मैं अपील करता हूं कि वे सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतें.
सख्त कार्रवाई की चेतावनी: विधि व्यवस्था डीएसपी सह ट्रैफिक डीएसपी प्रभार ललित मोहन सिंह ने बताया कि इस तरह की लापरवाही की बात अब हमारे संज्ञान में आई है तो निश्चित तौर पर इस विषय पर कड़ा काम होगा. इस मामले को पुलिस प्रशासन अत्यंत गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करेगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में कोई भी ई-रिक्शा चालक इस प्रकार की जानलेवा लापरवाही न कर सके. हमारी अपील है कि सभी ई-रिक्शा चालक हेडलाइट जला कर ही चलें.
"लापरवाही की बात अब हमारे संज्ञान में आई है तो निश्चित तौर पर इस विषय पर कड़ा काम होगा,यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में कोई भी ई-रिक्शा चालक इस प्रकार की जानलेवा लापरवाही न कर सके.हमारी अपील है कि सभी ई-रिक्शा चालक हेडलाइट जला कर ही चलें."- ललित मोहन सिंह, प्रभारी ट्रैफिक डीएसपी
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