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कहीं भी उग जाने वाली दूबी गुणों की खान, नकसीर सहित कई मर्जों की दवा

घास या चारा समझे जाने वाले दूर्वा का है धार्मिक और औषधीय महत्व, पूजा-पाठ में उपयोग के साथ कई मर्जों में करती है काम.

DURVA OR DUBI MEDICINAL IMPORTANCE
कहीं भी उग जाने वाली दूबी गुणों की खान है (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : March 1, 2026 at 2:38 PM IST

3 Min Read
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रिपोर्ट: अखिलेश शुक्ला

शहडोल: प्रकृति ने हमें कई ऐसी अद्भुत और चमत्कारी चीजें दी हैं, जिनका जिक्र पौराणिक कथाओं में भी है और आयुर्वेद में खास महत्व भी है. जिन्हें हम चारा समझ कर उखाड़ कर घरों से फेंक देते हैं, वहीं दूबी आपके कई मर्जों का इलाज भी कर सकती है. गर्मियों में बहुत ही कॉमन नाक से खून निकलना इस मर्ज की अचूक दवा दूबी मानी जाती है.

दूर्वा खरपतवार नहीं बल्कि औषधी है

दूबी जो कहीं पर भी उगा हुआ मिल जाता है, जिसे खरपतवार की श्रेणी में भी रखा जाता है, धार्मिक महत्व भी इसका बहुत ज्यादा है, क्योंकि पूजा में इसका बहुत ज्यादा उपयोग होता है. पूजा में फूल की तरह ही इसे अर्पित किया जाता है. इसे अलग-अलग जगह पर अलग-अलग नाम से भी जाना जाता है. कहीं दूबी कहा जाता है, कुछ लोग इसे दूर्वा के नाम से भी जानते हैं, जितने क्षेत्र उतने नाम हैं, लेकिन इसका काम बहुत ही सटीक और कारगर है, जो आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसका इस्तेमाल भी करते हैं और आयुर्वेद डॉक्टर भी इसका आयुर्वेद में बहुत ज्यादा महत्व बताते हैं.

आयुर्वेद डॉक्टर ने बताई दूबी का औषधीय महत्व (ETV Bharat)

दूर्वा का किन-किन मर्जों में उपयोग

आयुर्वेद डॉक्टर अंकित नामदेव बताते हैं कि "दूर्वा को सभी लोग जानते हैं, ये गणेशजी को चढ़ाते हैं, पौराणिक कथा के अनुसार गणेशजी को रक्त पित्त नामक व्याधि थी, जिसमें वो दूबी का उपयोग किया करते थे. उस रक्त को रोकने के लिए दूर्वा एक तरह से स्तंभन द्रव्य है, मतलब ये ब्लीडिंग डिस आर्डर में अच्छा काम करती है. खास तौर से गर्मी के दिनों में जब लोगों के नाक से खून निकलता है, जिसे नकसीर फूटना भी बोला जाता है, तो दूबी का स्वरस मतलब एक्सट्रेक्टेड जूस कुछ बूंद नाक में डालने से ये तुरंत ही नाक से खून आने को रोक देती है.

दूबी वो शीतल होती है, इसलिए ग्रीष्म ऋतु में इसका प्रयोग रक्त संबंधी विकारों के लिए किया जा सकता है. रात में अत्यधिक गर्मी पड़ना, पिंपल आदि में दूर्वा के स्वरस उपयोग, लेप लगाने में भी किया जाता है.

DURVA JUICE USING FOR NOSEBLEEDS
दूर्वा खरपतवार नहीं बल्कि औषधी है (ETV Bharat)

आयुर्वेद दवा इसकी आती है क्या ?

आयुर्वेद डॉक्टर अंकित नामदेव बताते हैं कि जहां तक इसकी दवाइयों की बात करें तो दूर्वा स्वरस मार्केट में तो फिलहाल उपलब्ध नहीं है, लेकिन बहुत सारी दवाइयों में दूर्वा का उपयोग किया जाता है. कोल्ड कंप्रेस इसका जो जूस है, वो नाक में रक्त पित्त रोगियों को दिया जाता है. अगर अभ्यांतर प्रयोग भी किया जाए तो ये रक्त की उष्मा को शांत करता है और रक्त के स्तंभन में या रक्त को जमाने में अच्छा काम होता है.

देखिए इसका अभ्यांतर प्रयोग तो नाक में इसका दो-दो बूंद रस डालने से नाक की ब्लीडिंग रुकती है. जिनको इंटरनल ब्लीडिंग है, जैसे पेट में अल्सर आदि है तो इसका 5 एमएल स्वरस पिया भी जाता है और इंटरनल ब्लीडिंग के लिये खासतौर पर दूर्वा स्वरस वरदान है.