यूपी के 22 लाख परिवारों की होली हुई बेरंग...कलर और गुझिया का रंग हुआ फीका
यूपी के लाखों कर्मचारियों की सैलरी और पेंशनरों की पेंशन अधिकारियों की ढील और बैंकिंग सिस्टम की गड़बड़ी की वजह से होली पहले नहीं पहुंची.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : March 2, 2026 at 1:33 PM IST
|Updated : March 2, 2026 at 1:43 PM IST
लखनऊ: इस बार उत्तर प्रदेश भर में लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की होली फीकी पड़ गई. चाहे वे स्थाई कर्मचारी हों या संविदा पर काम करने वाले, अधिकतर को समय पर वेतन और पेंशन न मिलने से निराशा हाथ लगी.
हालात ये हैं कि कहीं अधिकारियों की लापरवाही और ढील ने समस्या पैदा की, तो कहीं बैंकिंग सिस्टम की तकनीकी खराबी ने त्योहार का मजा किरकिरा कर दिया.
विशेष रूप से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के ई-कुबेर पोर्टल में आई दिक्कत ने पूरे उत्तर प्रदेश को प्रभावित किया. इससे शनिवार को होली से ठीक पहले वेतन और पेंशन के भुगतान में देरी हो गई.
इसके बाद लगातार छुट्टियां होने की वजह से अब 5 मार्च से पहले वेतन नहीं आ पाएगा. संविदा और स्थाई मिलकर उत्तर प्रदेश में लगभग 18 लाख कर्मचारी हैं और इसके अलावा चार लाख पेंशनर हैं. इनमें से दो-तीन लाख को छोड़ दें, तो बाकी सब का वेतन नहीं आ सका है.
गौर करें तो मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कर्मचारियों का वेतन और पेंशनरों की पेंशन होली से पहले ही उनके खातों में पहुंच जानी चाहिए. इस निर्देश के मद्देनजर कोषागारों से शनिवार को ही राशि ट्रांसफर करने की व्यवस्था की गई थी.
परंपरा के अनुसार हर माह की पहली तारीख को पेंशनरों के खातों में राशि जमा होती है, लेकिन इस बार त्योहार को देखते हुए इसे पहले कर दिया गया.
मुख्य कोषाधिकारी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि उनके विभाग की ओर से दोपहर एक बजे ई-कुबेर पोर्टल पर वेतन और पेंशन की धनराशि ट्रांसफर कर दी गई थी.
कोषागार के सॉफ्टवेयर पर 'ओके' का संदेश भी आया, लेकिन पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण राशि कर्मचारियों और पेंशनरों के बैंक खातों में नहीं पहुंच सकी. यह समस्या पूरे प्रदेश में रही.
ई-कुबेर पोर्टल आरबीआई द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है, जो सरकारी भुगतानों को सुगम बनाता है. इसकी खराबी से न केवल राज्यकर्मियों का वेतन प्रभावित हुआ, बल्कि पेंशनरों को भी इंतजार करना पड़ा.
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के नेता हरिकिशोर तिवारी ने बताया कि कोषागार से वेतन ट्रांसफर कर दिया गया होगा, तभी खातों में राशि आएगी लेकिन इस देरी से कर्मचारियों की होली बेरंग हो गई.
सेवानिवृत कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएल गुलाबिया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक मिश्रा और राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ने शनिवार देर शाम तक पेंशन न आने पर गहरी निराशा व्यक्त की. उन्होंने कहा होली का त्योहार परिवार के साथ मनाने का समय होता है, लेकिन बिना पैसे के कैसे खुशी मनाएं?"
मुख्य कोषाधिकारी के अनुसार, हर विभाग में आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डीडीओ) होते हैं, जो वेतन और पेंशन के बिल तैयार करके कोषागार भेजते हैं. कोषागार में जांच के बाद ये बिल आरबीआई के ई-कुबेर पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं.
पोर्टल पर दर्ज कर्मचारियों और पेंशनरों के बैंक विवरण के आधार पर धनराशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर हो जाती है लेकिन इस बार पोर्टल की समस्या ने पूरी प्रक्रिया को बाधित कर दिया.
दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के आदेश को ठेंगा दिखा रहे लोक निर्माण विभाग लखनऊ सर्किल ने अपनी मनमानी को अमली जामा पहना ही दिया.

मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ का आदेश था कि सभी कर्मचारियों को 28 तारीख को वेतन जारी कर दिया जाए, क्योंकि होली सर पर है और उसके आगे छुट्टियां मगर अफसर वेतन पास करने में अड़ंगा लगा रहे थे.
इसके बाद देर से वेतन की औपचारिकताएं पूरी हुईं. नतीजा यह हुआ कि लखनऊ सर्किल में हजारों कर्मचारियों का वेतन होली से पहले नहीं आया. इन कर्मचारियों की होली फींकी रहेगी.
उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण कर्मचारी संयुक्त संगठन के अध्यक्ष अवधेश प्रताप सिंह ने बताया उनकी जानकारी में ऐसे हजारों संविदा कर्मी है, जिनको समय पर वेतन नहीं मिल सका है उनकी होली कैसे बनेगी जिनका वेतन भी बहुत कम है.
आमतौर से संविदा कर्मचारियों को 18 से 25 हजार रुपए मिलना है. इतना कम वेतन होने पर भी अगर वेतन ना आए तो होली कैसे मनाई जाएगी.
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