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स्याह तस्वीर! जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर सौंग घाटी के लोग, हुक्मरानों को नहीं दिखाई देती समस्या

रंगड़गांव और घुड़साल गांव में पुल ना बनने से लोग जान जोखिम में डालकर सौंग नदी पार करने को मजबूर हैं.

Song River Bridge Demand
जान जोखिम में डालकर सौंग नदी पार करते ग्रामीण (Photo-Local Resident)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : July 3, 2026 at 9:06 AM IST

3 Min Read
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धनौल्टी: उत्तराखंड में बारिश का दौर शुरू हो गया है. भारी बारिश से सोंग घाटी के आसपास गांवों में जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है. भारी बारिश से सौंग नदी उफान पर बह रही है, जिससे लोगों की मुश्किल बढ़ गई है. रंगड़गांव और घुड़साल गांव के बीच पुल ना होने के कारण ग्रामीण जान जोखिम में डालकर सौंग नदी पार कर रहे हैं. रोजमर्रा के जरूरी सामान के लिए लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर ट्रॉली लगी है, वह निर्जन स्थान है. जहां पर भारी भरकम ट्रॉली खींचने के लिए लोगों का इंतजार करना पड़ता है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में ट्रॉली एक दुकान के पास लगी थी, लोग एक दूसरे की मदद कर ट्रॉली खींचकर नदी आर-पार कर सकते थे, लेकिन अब इसे ऐसी जगह शिफ्ट कर दिया गया है, जहां उसका उपयोग ही नहीं हो रहा है. स्थानीय निवासी सुमित कंडारी ने बताया कि आपदा के दौरान बहे पुलों का अभी तक निर्माण नहीं हो पाया है. क्षेत्र के घुड़साल गांव,पहनी,चिफल्डी, सोन्दणा, लडवाकोटी समेत कई गांव के बच्चे नदी पार कर राजकीय इंटर कॉलेज रगड़ गांव पढ़ने जाते हैं. लेकिन बच्चों को भारी भरकम ट्रॉली खींचने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है, जिसके कारण वो कई बार चोटिल भी हो जाते हैं.

रोजमर्रा के जरूरी सामान के लिए उफनती नदी पार करते ग्रामीण (Video--Local Resident)

अगर बच्चों की संख्या कम होती हैं तो उन्हें ट्रॉली खींचने के लिए नदी किनारे लोगों का घंटों इतंजार करना पड़ता है. कई बार लोग इस भय के चलते अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाते हैं. उन्होंने कहा कि अगर बड़तखाल में पुल लग जाता तो यहां के लोगों की समस्या काफी हद तक कम हो जाती. साथ ही कहा कि हर बार नदी के जलस्तर बढ़ने पर लोग जगह-जगह लकड़ी के अस्थायी पुल बनाकर जान जोखिम में डालकर नदी आर-पार करते हैं. लेकिन ये कार्य इतना जोखिम भरा है कि जरा सी चूक होने पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.

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जरा सी चूक जान पर पड़ सकती है भारी (Photo-ETV Bharat)

लोगों की समस्या को देखते हुए उनकी मांगों के अनुरूप पुलों से सम्बंधित प्रस्ताव पूर्व में ही संबंधित विभागों को भेजें जा चुके हैं. जल्द स्वीकृति मिलते ही कार्य शूरू कर दिया जाएगा.
-प्रीतम पंवार, क्षेत्रीय विधायक-

गौर हो कि मानसून सीजन में हालात और खराब हो जाते हैं. नदी का जलस्तर काफी बढ़ जाता है. ऐसे में आवाजाही के लिए ट्रॉली ही एकमात्र साधन रह जाती है. लोगों का कहना है कि समय रहते नदी पर स्थायी पुल निर्माण हो जाता तो उनकी परेशानियां कम हो जाती.

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