क्या इस बार समय से पहले आ जाएंगी गर्मियां, पहाड़ों पर भी सामान्य से ऊपर चल रहा अधिकतम तापमान
24 घंटों के आंकड़ों ने मौसम वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है. फरवरी की शुरुआत में महसूस होने वाली ठंड इस बार नदारद दिखी.


By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 8, 2026 at 1:21 PM IST
|Updated : February 8, 2026 at 5:36 PM IST
शिमला: जनवरी माह के अंत में बर्फबारी और बारिश के बाद हिमाचल में न्यूनतम तापमान गिरा था. फरवरी माह की शुरुआत में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम चल रहा था. फरवरी माह में अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है. कुछ दिनों से तेज धूप देखने को मिल रही है. धूप खिलने के कारण कई शहरों का न्यूनतम और अधिकतम तापमान आश्चर्यजनक तरीके से सामान्य से 5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है.
पिछले 24 घंटों के आंकड़ों ने मौसम वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है. सामान्य तौर पर फरवरी की शुरुआत में जो ठंड महसूस की जाती थी, वो इस बार नदारद दिखी. धूप के कड़े तेवर की वजह से प्रदेश के अधिकतर शहरों का तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है. इसे लेकर मौसम वैज्ञानिक और पर्यावरण विद हैरान हैं.

प्रमुख शहरों के तापमान का विस्तृत विश्लेषण
हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों में गर्मी का असर उम्मीद से कहीं ज़्यादा रहा. कल्पा में अधिकतम तापमान 11.6°C रिकॉर्ड किया गया, जबकि सामान्य तापमान का आंकड़ा 5.6°C है. कांगड़ा के मैदानी इलाकों की तरह यहां भी गर्मी महसूस की गई, जहां तापमान 22.7°C रहा, जो सामान्य औसत से 4.5°C अधिक है. सुंदरनगर का अधिकतम तापमान 23.2°C डिग्री सेल्सियस रहा, जो कि सामान्य तापमान की तुलना में 4.4°C डिग्री सेल्सियस अधिक है. कुल्लू घाटी में भी अधिकतम तापमान सामान्य से 4.1°C डिग्री अधिक रहा, यहां पारा 21.4°C दर्ज हुआ. पहाड़ों की रानी शिमला में तापमान 15.2°C रहा, जो औसत से 2.6°C डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी को दर्शाता है. पर्यटन नगरी मनाली में भी तापमान 12.2°C डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. ये बढ़ता पारा इस बात का संकेत है कि यदि जल्द ही बारिश या बर्फबारी नहीं हुई, तो पहाड़ों पर जल संकट गहरा सकता है और गर्मियां समय से पहले दस्तक दे सकती हैं. मैदानों ही नहीं पहाड़ों पर भी लोग गर्मी अनुभव कर रहे हैं. बढ़ता हुआ तापमान ग्लोबल वॉर्मिंग का भी संकेत हैं.

चिलिंग आवर्स जरूरी
बढ़ता तापमान सेब समेत अन्य फसलों की पैदावार पर असर डाल सकता है. जनवरी माह में हुई बारिश बर्फबारी से फलों के लिए चिलिंग आवर्स शुरू हुए थे. सेब सहित अन्य फलों के लिए भी चिलिंग आवर्स का पूरा होना जरूरी है. विशेषज्ञों के मुताबिक सेब की रेड डिलीशियस वैरायटी के लिए सबसे अधिक 1200 घंटे के चिलिंग आवर्स की जरूरत होती है. वहीं, रॉयल सेब के लिए 1000 से 1100 घंटे के चिलिंग आवर्स पूरा होना जरूरी है. स्पर वैरायटी सेब के लिए 800 से 900 घंटे व गाला प्रजाति सेब के लिए 700 से 800 घंटे तक के चिलिंग आवर्स पूरा होना आवश्यक है. इसी तरह से स्टोन फ्रूट में प्लम के लिए 300 से 400 घंटे, खुबानी के लिए 300 से 400 घंटे, नाशपाती के लिए 700 से 800 घंटे व अंगूर के लिए 300 से 400 घंटे और चेरी के लिए 1200 घंटे के चिलिंग आवर्स का पूरा होना जरूरी है. तभी सेब सहित स्टोन फ्रूट का उत्पादन अच्छा रहता है, लेकिन बढ़ती गर्मी के कारण चिलिंग आवर्स की प्रक्रिया रुक सकती है.
2 से 3 डिग्री तक गिरेगा पारा
मौसम विभाग के अनुसार, 8 फरवरी से पश्चिम विक्षोभ जैसे ही पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा मौसम करवट बदलेगा. इससे 9 से 11 फरवरी के बीच बारिश की संभावना है. अपनी सक्रियता दिखाएगा, हवाओं का रुख बदलेगा। अगले 48 से 72 घंटों के भीतर दिन और रात के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है. इससे सुबह और शाम की ठिठुरन एक बार फिर बढ़ जाएगी.
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