DU Admission 2026: 'ओपन हाउस' में प्रेफरेंस शीट और कोर्स के लिए एक्सपर्ट्स ने दी सलाह, जानें छात्रों ने क्या कहा
ओपन हाउस के दौरान विशेषज्ञों ने छात्रों को सलाह दी कि प्रेफरेंस लिस्ट बनाते समय अफवाहों के आधार पर निर्णय न लें.


Published : July 8, 2026 at 5:18 PM IST
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में स्नातक (UG) दाखिले के लिए कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम (CSAS) फेज-2 के तहत प्रेफरेंस लिस्ट भरने की प्रक्रिया जारी है. 11 जुलाई तक छात्रों को अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स की प्रेफरेंस भरनी है. ऐसे में हजारों छात्र-छात्राएं इस दुविधा में हैं कि पहले कॉलेज को प्राथमिकता दें या कोर्स को, कितने विकल्प भरें और अपने CUET स्कोर के अनुसार प्रेफरेंस लिस्ट कैसे तैयार करें. इन्हीं सवालों के जवाब देने के लिए मिरांडा हाउस कॉलेज ने तीन दिवसीय 'ओपन हाउस-फेज 2' का आयोजन किया, जहां विशेषज्ञ शिक्षकों ने छात्रों और अभिभावकों को प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी दी.
ओपन हाउस में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक पहुंचे. यहां शिक्षकों ने CSAS पोर्टल पर प्रेफरेंस भरने की प्रक्रिया, कोर्स और कॉलेज चयन की रणनीति, ECA एवं स्पोर्ट्स कोटा, हॉस्टल, सर्टिफिकेट कोर्स, विभिन्न विषयों के करियर विकल्प और कॉलेज की अकादमिक व सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों की जानकारी दी. इसके बाद खुले प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों की व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान किया गया.
कॉलेज या कोर्स, किसे दें प्राथमिकता:
गुरुग्राम से आई छात्रा वान्या टीकू ने बताया कि सबसे बड़ी परेशानी यही थी कि प्रेफरेंस लिस्ट बनाते समय कॉलेज को प्राथमिकता दें या कोर्स को. वान्या ने बताया कि, "मैं यह समझ नहीं पा रही थी कि अपनी ड्रीम यूनिवर्सिटी और ड्रीम कोर्स के हिसाब से प्रेफरेंस कैसे बनाऊं जिससे अच्छे कॉलेज में दाखिला मिलने की संभावना बढ़ सके." उन्होंने बताया कि ओपन हाउस में शिक्षकों ने विस्तार से समझाया कि छात्रों को सबसे पहले अपनी रुचि और लक्ष्य के अनुसार प्रेफरेंस लिस्ट बनानी चाहिए. बातचीत के बाद उनकी सभी शंकाएं दूर हो गईं और अब उन्हें पूरी प्रक्रिया स्पष्ट हो गई है.
कॉलेज लाइफ और करियर को लेकर भी पूछे सवाल:
छात्रा सान्वी अरोड़ा ने कॉलेज की सोसाइटियों, वहां मिलने वाले एक्सपोजर और भविष्य के करियर अवसरों के बारे में जानना चाहती थीं. उन्होंने बताया कि उनकी मुख्य जिज्ञासा बीएससी (ऑनर्स) गणित के भविष्य, प्लेसमेंट और करियर संभावनाओं को लेकर थी. शिक्षकों ने उन्हें विस्तार से बताया कि इस कोर्स के बाद उच्च शिक्षा, शोध, डेटा साइंस, बैंकिंग, एनालिटिक्स, शिक्षण और अन्य क्षेत्रों में रोजगार के कई अवसर उपलब्ध हैं. इसके अलावा कॉलेज की विभिन्न सोसाइटियों और उनके माध्यम से मिलने वाले अनुभवों की भी जानकारी दी गई. सान्वी ने कहा कि उनकी सभी जिज्ञासाओं का समाधान हुआ.

कटऑफ मत सोचिए, अपनी पसंद के कॉलेज पहले रखिए:
छात्रा यशस्विनी ने बताया कि उनकी समस्या ज्योग्राफी (ऑनर्स) और प्रेफरेंस लिस्ट को लेकर थी. वह जानना चाहती थीं कि अपने CUET स्कोर के अनुसार किस तरह प्रेफरेंस तय करें. यशस्विनी ने बताया कि शिक्षकों ने उन्हें सलाह दी कि छात्र केवल संभावित कटऑफ को देखकर अपनी पसंद के कॉलेजों को सूची से बाहर न करें. यदि कोई कॉलेज उनकी पहली पसंद है तो उसे सबसे ऊपर रखें. उसके बाद अपनी पसंद के अन्य कॉलेज और कोर्स क्रमवार भरें. उन्होंने कहा कि इस सलाह से उनकी दुविधा पूरी तरह दूर हो गई.

शिक्षकों ने दी जरूरी सलाह:
ओपन हाउस के दौरान विशेषज्ञों ने छात्रों को सलाह दी कि प्रेफरेंस लिस्ट बनाते समय अफवाहों, सोशल मीडिया पर चल रही अनौपचारिक कटऑफ या अनुमानित रैंकिंग के आधार पर निर्णय न लें. छात्रों को अपनी वास्तविक पसंद के अनुसार अधिक से अधिक विकल्प भरने चाहिए. यदि किसी शीर्ष कॉलेज में पढ़ना उनका सपना है, तो उसे सूची में सबसे ऊपर रखना चाहिए. सीट आवंटन पूरी तरह प्रेफरेंस क्रम, उपलब्ध सीटों और CUET स्कोर के आधार पर किया जाता है, इसलिए सही क्रम तय करना बेहद जरूरी है.
ओपन हाउस में शामिल अधिकांश छात्रों ने माना कि ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी के बावजूद कई व्यावहारिक सवालों के जवाब उन्हें यहां आकर मिले. विशेषज्ञों से सीधे बातचीत करने के कारण उनकी दुविधाएं दूर हुईं और अब अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी CSAS फेज-2 प्रेफरेंस लिस्ट तैयार कर सकेंगे.
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