गुरुग्राम में ड्रग रेकैट का भंडाफोड़, डायबिटीज और वजन कम करने वाले इंजेक्शन का जखीरा बरामद, दो आरोपी गिरफ्तार
गुरुग्राम पुलिस ने डायबिटीज में इस्तेमाल होने वाले मौनजारो नाम के इंजेक्शन का करीब 70 लाख रुपये का जखीरा जब्त किया है.

Published : April 21, 2026 at 9:17 AM IST
गुरुग्राम: ड्रग कंट्रोल विभाग ने नकली दवाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए डायबिटीज में इस्तेमाल होने वाले मौनजारो नाम के इंजेक्शन का करीब 70 लाख रुपये का जखीरा जब्त किया है. फूड ड्रग्स कंट्रोल ऑफिसर अमनदीप चौहान ने बाताया कि "आरोपी विदेश से पहले तो इस इंजेक्शन के रॉ मैटेरियल को मंगवाते थे और फिर भारत लाकर उसमें पानी डालकर धड़ल्ले से बेचने का काम कर रहे थे."
गुरुग्राम में ड्रग रैकेट का भंडाफोड़: दरअसल गुरुग्राम ड्रग विभाग को सूचना मिली थी कि कुछ लोग नकली इंजेक्शन बेचने का काम कर रहे हैं. जिसके बाद ड्रग विभाग ने जाल बिछाया और आरोपियों से 45 लाख रुपये के इंजेक्शन मंगवाए, लेकिन आरोपी ने इंजेक्शन को लेने के लिए उनको दिल्ली आने के लिए कहा. इसके बाद ड्रग विभाग ने अधिकारियों ने किसी तरह से आरोपी को गुरुग्राम डीएलएफ फेज 4 में बुलाया. वहीं पर ही आरोपियों को धर दबोचने का काम किया. इस मामले में पुलिस ने दो आरोपी अवि शर्मा व एक अन्य को गिरफ्तार किया है. जिनसे पूछताछ कि जा रही है कि इस पूरे मामले कितने लोग जुड़े हुए है.
मौनजारो इंजेक्शन की खेप बरामद: ड्रग विभाग के अधिकारी ने बताया "डॉक्टर की माने तो ये इंजेक्शन एंटी डायबिटीज के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा ये इंजेक्शन वेट लॉस में भी कारगर साबित होता है. जिसके बाद लोग इसको वेट लॉस करने के लिए भी इस्तेमाल करने लगे. जिसके चलते मार्केट में इसकी डिमांड बढ़ गई. इसी चीज का फायदा उठाकर आरोपियों ने इस इंजेक्शन को मार्केट में बेचने की रणनीति बनाई."
आरोपी गुरुग्राम में ही बनाते थे नकली इंजेक्शन: ड्रग कंट्रोल विभाग के अधिकारी समीर भाटी ने बताया कि "इस इंजेक्शन का नाम मोनजारो KIWIKPEN और कंपनी का नाम TIRZEPATIDE है. आरोपी गुरुग्राम सेक्टर 62 में ये नकली इंजेक्शन को बनाते थे. ये सारा सामान चीन से मंगा कर उसकी सीरेंज से लेकर बारकोड लगाने तक सारा फर्जी काम सेक्टर 62 में ही करते थे. जहां से विभाग को कुछ मशीन भी बरामद हुई हैं."
ड्रग विभाग की आम जनता से अपील: इस खुलासे के बाद ड्रग विभाग ने आम जनता अपील की है कि ऑनलाइन दवाइयां खरीदते समय विक्रेता का लाइसेंस, बिल, बैच नंबर और पैकेजिंग की प्रामाणिकता जरूर जांचें. विभाग का कहना है कि ऐसे मामले ऑनलाइन बिकने वाली दवाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.

