CSA यूनिवर्सिटी के कृषि वैज्ञानिक का कमाल; 34 साल में सरसों की 13 प्रजातियां कीं विकसित
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डा. महक सिंह ने बताया कि 1999 में उनकी पहली सरसों की विकसित प्रजाति उर्वशी को विमोचित किया गया.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 6, 2026 at 11:30 AM IST
कानपुर (समीर दीक्षित): चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSAU) के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. महक सिंह ने देश की खाद्य आत्मनिर्भरता में अमूल्य योगदान दिया है. उन्होंने एक नहीं, दो नहीं बल्कि कुल 13 किस्म की सरसों की प्रजातियां विकसित की हैं.
पिछले 34 साल की सेवा में डॉ. महक सिंह ने 13 ऐसी किस्में विकसित की हैं, जिनकी उपज ज्यादा है. तेल निकलने की मात्रा भी 43 प्रतिशत तक है, जो रिकॉर्ड है. ETV भारत ने डॉ. महक सिंह से खास बातचीत की है.
कानपुर के चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में तिलहन अनुभाग के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डा. महक सिंह को अब सरसों का अभिजनक कहा जाता है. इसके पीछे बड़ी वजह है, डा. सिंह द्वारा विकसित सरसों की सभी किस्मों को केंद्र सरकार ने नोटिफाई किया है.
इन प्रजातियों का भरपूर लाभ सरसों की खेती करने वाले किसानों को मिल रहा है. देश के अलग-अलग राज्यों में डॉ. महक सिंह द्वारा विकसित सरसों की खेती की जा रही है. खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर भारत अभियान में इनके योगदान को सराहा जा रहा है.
सबसे पहले उर्वशी किस्म का विकास: वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डा. महक सिंह ने बताया कि 1999 में उनकी पहली सरसों की विकसित प्रजाति उर्वशी को विमोचित किया गया. उर्वशी में तेल की मात्रा 38 से 39 प्रतिशत तक थी. इसके बाद साल दर साल जैसे समय बढ़ा, तब कई अन्य प्रजातियां विमोचित हो गईं.
सरसों के अलावा उनके द्वारा अलसी की तीन प्रजातियों को भी विमोचित किया जा चुका है. पिछले दो महीने में ही डॉ. महक सिंह द्वारा विकसित सरसों की तीन प्रजातियों को केंद्र और राज्य बीज विमोचन समिति की ओर से विमोचित किया गया है.

| सरसों की विकसित प्रजातियां | विमोचन वर्ष | परिपक्वता अवधि (दिन) | उपज (क्विंटल/प्रति हेक्टेयर) | तेल प्रतिशत |
| उर्वशी (आरके 9501) | 1999 | 125-130 | 20-25 | 38-39 |
| बसंती (आरके 8501) | 2001 | 130-135 | 20-25 | 40-42 |
| कांती (आरके 9807) | 2002 | 105-110 | 20-25 | 40-41 |
| माया (आरके 9902) | 2002 | 130-132 | 25-28 | 40-41 |
| आर्शीवाद (आरके 01-03) | 2006 | 125-130 | 20-22 | 40-41 |
| पीतांबरी (आरवाईएसके 05-02) | 2010 | 110-115 | 18-20 | 42-43 |
| तपेश्वरी (टीके 06-01) | 2018 | 88-90 | 12-14 | 40-42 |
| आजाद चेतना (टीकेएम 14-02) | 2021 | 90-95 | 12-14 | 40-42 |
| आजाद महक (केएमआरई 15-02) | 2021 | 120-125 | 22-28 | 41-42 |
| सुरेखा (केएमआर 16-02) | 2022 | 125-130 | 25-28 | 41-43 |
| गोवर्धन (केएमआर 17-05) | 2024 | 120-125 | 18-20 | 39-40 |
| आजाद गौरव (केएमआरएल 15-06) | 2025 | 120-125 | 18-20 | 39-40 |
| आजाद चेतना (टीएमके 14-02) | 2025 | 90-95 | 12-14 | 40-42 |
गोवर्धन बीज भी इसी साल से मिलेगा: डॉ. महक सिंह ने बताया कि सरसों की गोवर्धन प्रजाति को 31 दिसंबर को विमोचित किया गया है. केंद्र सरकार ने इसे नोटिफाई कर दिया है. अब इसकी बुआई किसान नवंबर 2026 से शुरू कर सकेंगे.
इसी साल किसानों को हम गोवर्धन सरसों बीज मुहैया कराएंगे. वहीं, अन्य प्रजाति के बीज किसानों को कृषक उत्पादक संगठन, कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि संस्थानों से मुहैया कराए जाते हैं.
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