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जयंती विशेष: छत्तीसगढ़ी साहित्य में विशेष योगदान देने वाले डॉक्टर बलदेव प्रसाद साव, आलोचक और संपादक के रूप में थी पहचान

27 मई को साहित्यकार, आलोचक और संपादक डॉ. बलदेव प्रसाद साव की जयंती मनाई जाती है, ‘मेघदूत’ का छत्तीसगढ़ी अनुवाद भी किया था.

Dr Baldev Prasad Sao
छत्तीसगढ़ी साहित्य में विशेष योगदान देने वाले डॉक्टर बलदेव प्रसाद साव (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : May 25, 2026 at 6:01 PM IST

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रायपुर: प्रसिद्ध साहित्यकार, आलोचक और संपादक डॉ. बलदेव प्रसाद साव की जयंती आज मनाई जा रही है. उनका जन्म जांजगीर-चांपा जिले के नरियरा गांव में एक किसान परिवार में हुआ था. उन्होंने हिंदी और छत्तीसगढ़ी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

शिक्षक से साहित्यकार तक का सफर

इतिहासकार डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि डॉ. बलदेव प्रसाद साव का जन्म 27 मई 1942 को नरियरा गांव में हुआ था. वे पेशे से शिक्षक थे, लेकिन लेखन और साहित्य सेवा के कारण उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई. शिक्षकीय कार्य के साथ-साथ उन्होंने हिंदी और छत्तीसगढ़ी भाषा में लेखन किया.

जयंती विशेष: डॉ. बलदेव प्रसाद साव के बारे में जानिए (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

रायगढ़ बना कर्मभूमि

डॉ. साव ने जांजगीर-चांपा से आगे बढ़ते हुए रायगढ़ को अपना कार्यक्षेत्र बनाया. यहां उनकी मित्रता कई साहित्यकारों से हुई और वे सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जुड़े. वे रायगढ़ के प्रसिद्ध चक्रधर समारोह की स्थापना समिति की बैठकों में भी शामिल रहे.

मुकुटधर पांडे पर किया महत्वपूर्ण शोध

डॉ. बलदेव प्रसाद साव ने साहित्यकार मुकुटधर पांडे पर शोध कार्य किया और उन्हें छायावादी कवि के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने मुकुटधर पांडे के ‘मेघदूत’ का छत्तीसगढ़ी अनुवाद भी किया था.

सरल और मिलनसार व्यक्तित्व

इतिहासकार डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र के अनुसार डॉ. साव बेहद सरल और मिलनसार व्यक्ति थे. उनमें किसी प्रकार का अहंकार नहीं था. वे साहित्य साधना और लेखन के माध्यम से समाज को दिशा देने का काम करते रहे.

विद्यार्थियों को किया प्रेरित

एक शिक्षक होने के नाते उनका विद्यार्थियों से विशेष जुड़ाव था. वे छात्रों को साहित्य लेखन और साहित्य सेवा के लिए प्रेरित करते थे. उनकी कई रचनाएं पाठ्यक्रमों में भी शामिल हैं.

दुर्लभ पुस्तकों और पत्रों का संग्रह

डॉ. बलदेव प्रसाद साव के निजी ग्रंथालय में साहित्यकार लोचन प्रसाद पांडे, मुकुटधर पांडे समेत कई साहित्यकारों के दुर्लभ पत्र और पुस्तकें सुरक्षित हैं. उनका साहित्यिक योगदान आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बना हुआ है.

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