190 एकड़ के मालिक, पर बेटे की शादी में दहेज में लिया सिर्फ 1 रुपया...कैथल के तंवर परिवार की अनोखी पहल
कैथल के तंवर परिवार ने 190 एकड़ संपत्ति के बावजूद बेटे की शादी बिना दहेज, सिर्फ एक रुपये में की.

Published : February 16, 2026 at 11:46 AM IST
कैथल: आधुनिक दौर में जहां शादियां दिखावे और स्टेटस का माध्यम बनती जा रही हैं, वहीं कैथल के गांव क्योड़क के तंवर परिवार ने सादगी और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश की है. पूर्व चेयरमैन जसबीर सिंह तंवर और पूर्व सरपंच रणबीर सिंह तंवर के परिवार ने अपने घर के 11वें बेटे आर्यन तंवर की शादी बिना दहेज और बेहद साधारण ढंग से संपन्न कर समाज को सकारात्मक संदेश दिया है. संपन्न होने के बावजूद इस परिवार ने यह साबित किया कि शादी रिश्तों का बंधन है, प्रदर्शन का मंच नहीं.
1 रुपया 90 पैसे का कार्ड, 1 रुपया शगुन: जिला पार्षद प्रतिनिधि विकास तंवर के चचेरे भाई आर्यन तंवर की शादी सहारनपुर निवासी साक्षी के साथ हुई. शादी का निमंत्रण पत्र मात्र 1 रुपया 90 पैसे में छपवाया गया, जो फिजूलखर्ची रोकने का प्रतीक बना. दहेज के नाम पर केवल 1 रुपया शगुन लिया गया. बारात का स्वागत भी बिना किसी महंगे उपहार के, सिर्फ फूल भेंट कर किया गया. यह दृश्य सादगी की पराकाष्ठा और सामाजिक चेतना का जीवंत उदाहरण बना.

190 एकड़ जमीन, फिर भी बिना दिखावा: तंवर परिवार के पास 190 एकड़ कृषि भूमि है. इसके अलावा अनाज मंडी में उनकी तीन आढ़त की दुकानें और एक राइस मिल भी है. आर्थिक रूप से संपन्न होने के बावजूद परिवार ने शादी को सरल और अनुकरणीय बनाया. पूर्व चेयरमैन जसबीर तंवर का कहना है कि जिस पिता ने अपनी बेटी को 20-25 वर्ष तक पाल-पोसकर पढ़ाया-लिखाया, उससे बड़ा दान कोई नहीं. ऐसे में दहेज मांगना न केवल अनुचित बल्कि बेटियों के सम्मान के खिलाफ है.

बहुओं में समानता का संदेश: परिवार का मानना है कि जब कोई बहू दहेज लेकर नहीं आएगी तो घर में सभी बहुएं बराबर होंगी. इससे तुलना और भेदभाव की भावना समाप्त होगी. वे दुल्हन के लिए जरूरी सामान स्वयं पहले से खरीदकर उसके कमरे में सजा देते हैं, ताकि उसे किसी प्रकार की कमी महसूस न हो. उनका यह कदम दिखाता है कि सम्मान धन से नहीं, संस्कारों से मिलता है.
दहेज प्रथा पर करारा प्रहार: ऑस्ट्रेलिया में 14 वर्ष रह चुके विकास तंवर ने दहेज प्रथा को समाज पर कलंक बताया. उनका कहना है कि जैसे सती प्रथा इतिहास में एक अभिशाप थी, वैसे ही दहेज प्रथा भी सामाजिक बुराई है. यदि देश को आगे बढ़ाना है और विश्वगुरु बनाना है, तो ऐसी कुरीतियों को जड़ से समाप्त करना होगा. तंवर परिवार की यह पहल दहेज लोभियों और समाज दोनों के लिए एक मजबूत संदेश है कि बदलाव की शुरुआत घर से ही होती है.
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