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बच्चे के बुखार को नजर अंदाज न करें, क्योंकि यह वायरल बन सकता है गंभीर संक्रमण का कारण, जाने टिप्स

न्यूरो आईडीकॉन 2026 बच्चों में मस्तिष्क संक्रमण को लेकर आधुनिक उपचार और रोकथाम पर चर्चा की गई.

बच्चे के बुखार को नजर अंदाज न करें
बच्चे के बुखार को नजर अंदाज न करें (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : March 2, 2026 at 6:00 PM IST

4 Min Read
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आगरा: बच्चों में मस्तिष्क संक्रमण तेजी से बढ़ता जा रहा है. इसको लेकर आगरा में दो दिवसीय न्यूरो आईडीकॉन 2026 आयोजित किया गया है, जिसमें देश भर के बाल रोग विशेषज्ञ और न्यूरोलॉजिस्ट मेनिनजाइटिस, इंसेफेलाइटिस, सीएनएस टीबी, न्यूरो-इन्फेक्शन समेत अन्य एक्सपर्ट शामिल हुए. इस दौरान बच्चों में मस्तिष्क संक्रमण को लेकर आधुनिक उपचार और रोकथाम पर चर्चा की गई. क्योंकि, देश में हर साल लाखों बच्चे ऐसी ही गंभीर बीमारियों से प्रभावित होने से मृत्यु या स्थायी विकलांगता का शिकार हो जाते हैं. बच्चों का पूरा टीकाकरण कराएं.

पेडियाट्रिक इन्फेक्शियस डिजीज एकेडमी (पीड़ा) के डॉ. केके अरोड़ा ने बताया, देखा जाए तो बच्चों को जब भी बुखार आता है, जो एक तरह का अलार्म होता है, जिससे माता और पिता अलर्ट हो जाएं. क्योंकि, बच्चे को बुखार आया है तो उसे इलाज की जरूरत है.

ईटीवी भारत के बातचीत करते डॉ. केके अरोड़ा (Video Credit; ETV Bharat)

साधारण बुखार सिंपल पैरासीटामोल से ठीक हो जाते हैं. ऐसे में बुखार आने पर बच्चे को सिंबल पैरासीटामोल दें. जब बच्चे का 100 डिग्री फ़ारेनहाइ तापमान है तो समझ लें कि बच्चे को बुखार है. ऐसे में बच्चे को पैरासीटामोल दिया, जिससे बच्चा ठीक हो गया. अधिकतर साधारण बुखार तीन से चार दिन में सिंपल पैरासीटामोल से ठीक हो जाते हैं. इसमें ज्यादा चिंतित होने की जररूत नहीं है.

बुखार में बच्चा सुस्त दिखे तो हो जाएं सतर्क: डॉ. केके अरोड़ा ने बताया कि जब बच्चे को बुखार और सिंबल पैरासीटामोल से नहीं जा रहा है. बुखार के साथ ऐसे लक्षण आ रहे हैं, जिसमें बच्चा कुछ खा पी नहीं रहा है. बच्चे की सांसें तेज चल रही हैं. बच्चा सुस्त है. बच्चे को बेहोशी जैसी स्थिति है. ये लक्षण दिखें तो सतर्क हो जाएं.

ये बच्चों के खतरनाक हो सकता है. इसमें माता और पिता तुरंत सतर्क हो जाएं. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत बच्चे को बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ को दिखाएं. जो उसकी बीमारी का इलाज करेंगे. इसमें लापरवाही ना बरतें.

पेडियाट्रिक इन्फेक्शियस डिजीज एकेडमी (पीड़ा) डॉ. केके अरोड़ा ने बताया कि जब शरीर में कोई बीमारी होगी तो बुखार से उसकी शरुआत होगी. जब बच्चे को बुखार के साथ सांस तेज चल रही है तो निमोनिया है. इसमें लापरवाही ना बरतें. यदि बच्चे को पेट संबंधी बीमारी है तो भी बुखार आएगा. पेट संबंधी बीमारी में बुखार से उल्टी और दस्ते हो सकते हैं. ऐसे ही बच्चे को कोई दिमाग की बीमारी है तो भी बुखार जरूर आएगा.

ब्रेन में संक्रमण होने पर बुखार जरूर आएगा. इसके साथ ही इसमें अहम लक्षण बुखार के साथ बच्चे की चेतना में परिवर्तन आएगा. बच्चा कन्फ्यूज होगा. बच्चा सुस्त है. कुछ बोलने के बाद सो जाता है. उसका मानसिक स्तर ठीक नहीं होगा. इसके साथ ही बच्चे को झटके या दौरे आ सकते हैं. जिसमें छोटे झटके हो सकते हैं. इसके साथ ही शरीर के एक हिस्से में परिवर्तन होगा. ये सब दिमागी बुखार के लक्षण हैं.

बैक्टीरिया और वायरस संक्रमण: डॉ. केके अरोड़ा ने बताया कि बच्चों में ब्रेन संबंधी बीमारी या संक्रमण की वजह बैक्टीरिया और वायरस होते हैं. इसके साथ ही प्रोटोजोआ से भी संक्रमण हो सकता हो सकता है. कई बार बच्चे के शरीर में बदलाव की वजह से भी ऐसी स्थिति बन जाती है. इसलिए, बच्चे के बुखार आने पर सबसे पहले उसके संक्रमण की वजह पता जरूर लगाएं. संक्रमण का पता होने पर डॉक्टर्स से पूरा इलाज कराएं.


बच्चों में निमोनिया के लक्षण:

  • बच्चे को बुखार संग सांस लेने में दिक्कत
  • बच्चों की पसलियां चलना.
  • बच्चा को खांसी और तेज बुखार आना.
  • बच्चे को सुस्ती आना.
  • बच्चे के सांस लेने में घरघराहट की आवाज आना.
  • बच्चे के होंठ या नाखूनों का रंग पीला होना.
  • बच्चों में दिमागी बुखार के लक्षण.
  • अचानक तेज़ बुखार आना.
  • बच्चे के तेज़ सिरदर्द होना.
  • बच्चे की गर्दन में अकड़न.
  • बच्चे का कन्फ्यूजन होना.
  • बच्चे में चिड़चिड़ापन आना.
  • बच्चे को ज्यादा नींद आना.
  • बच्चे को दौरे आना.
  • बच्चे को मतली या उल्टी आना.
  • बच्चे को भूख कम लगना.
  • बच्चे की स्किन पर रैश होना.

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