शीतलहर की चपेट में झारखंड, अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की संख्या, डॉक्टरों ने बताए स्वस्थ रहने के उपाय
झारखंड में कड़ाके की ठंड से रिम्स मे मरीजों की संख्या बढ़ रही है. डॉक्टरों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है.


Published : December 25, 2025 at 3:34 PM IST
रांची: राजधानी रांची समेत पूरा झारखंड इस समय सर्द पछुआ हवाओं की वजह से कड़ाके की ठंड की चपेट में है. दिन की शुरुआत कोहरे और धुंध से हो रही है, और तेज पछुआ हवाओं से बढ़ती कनकनी का असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है. रिम्स के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक प्रोफेसर (डॉ.) संजय सिंह के मुताबिक, इस मौसम की वजह से होने वाली बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है.
डॉ. संजय सिंह बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों से झारखंड के कई जिलों में शीतलहर के कारण एलर्जी, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा और निमोनिया के मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. पहले आमतौर पर हर यूनिट में 2-3 निमोनिया के मरीज भर्ती होते थे, लेकिन ठंड के कारण यह संख्या बढ़कर 10 या उससे ज्यादा हो गई है.
वे यह भी बताते हैं कि पैरालिसिस और दिल से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने बताया कि पिछले दिन इमरजेंसी में 80-85 मरीज सिर्फ ठंड की वजह से बीमार पड़कर रिम्स पहुंचे थे. उनमें से कई को इलाज के लिए भर्ती किया गया है.
रांची के मौसम केंद्र ने आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने का अनुमान लगाया है. 13 जिलों के लिए शीतलहर का ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है. इस स्थिति में, डॉक्टर संजय सिंह सलाह देते हैं कि इस मौसम में स्वस्थ रहने के लिए अपने शरीर को गर्म कपड़ों से पूरी तरह ढककर रखना जरूरी है. अपने शरीर को ठंडी हवाओं के संपर्क में आने से बचाएं.
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस कड़ाके की ठंड में स्वस्थ रहने के लिए बेहद जरूरी है कि खाली पेट ना रहें. घर से निकलते समय यह सुनिश्चित करें कि आपका शरीर गर्म कपड़ों से पूरी तरह ढका हो, और बाहर जाने से पहले गर्म और ताजा खाना जरूर खाएं. उन्होंने समझाया कि खाना शरीर को गर्म रखने और एनर्जी लेवल बनाए रखने में मदद करता है. वे बताते हैं कि अगर आपको लगातार छींकें आना, शरीर में तेज दर्द, बहुत ज्यादा ठंड लगना, लगातार खांसी और ब्लड प्रेशर बढ़ना, और कई मामलों में लूज मोशन जैसी दिक्कतें हो रही हैं, तो ये सभी ठंड लगने के लक्षण हैं.
रिम्स में क्रिटिकल केयर के हेड डॉ. प्रदीप भट्टाचार्य का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीज जिन्हें अपनी हालत के बारे में पता नहीं है, उन्हें इस मौसम में स्ट्रोक का ज्यादा खतरा होता है, क्योंकि ठंडे मौसम में आर्टरी सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. डॉ. भट्टाचार्य ने यह भी बताया कि लोग सर्दियों में कम पानी पीते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन होता है, जो ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करता है और नतीजतन स्ट्रोक और एंजाइना का खतरा बढ़ जाता है.
रिम्स में एसएनसीयू के हेड और पीडियाट्रिशियन डॉ. राजीव मिश्रा बताते हैं कि बच्चों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है और अपनी उम्र और चंचल स्वभाव के कारण वे ठंड के ज्यादा संपर्क में आते हैं. इसलिए बीमार पड़ने का खतरा ज्यादा होता है. डॉ. मिश्रा सलाह देते हैं कि बच्चों को इस मौसम में बाहर खेलने से बचना चाहिए और उन्हें सही कपड़ों से गर्म रखना चाहिए. वह यह भी सलाह देते हैं कि उन्हें बाहर के खाने के बजाय गर्म, ताजा, घर का बना खाना देना चाहिए.
रिम्स ट्रॉमा सेंटर के हेड डॉ. प्रदीप भट्टाचार्य इस बात पर जोर देते हैं कि ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और दिल की बीमारियों वाले मरीज जो दवा ले रहे हैं, उन्हें इस ठंडे मौसम में अपनी दवा लेना बिल्कुल भी ना भूलें. डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा जरूर खाते रहें ताकि किसी भी संभावित खतरे से वह दूर रहें.
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