कंफ्यूज न हों, जानिए इस साल कब है मकर संक्रांति और शुभ मुहूर्त?
16 को खत्म होगा खरमास, जानिए क्यों जनवरी के बाद शुरू हो रहा मांगलिक कार्यों का सिलसिला?

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 10, 2026 at 4:44 PM IST
वाराणसी: मकर संक्रांति का पर्व त्योहारों की शुरुआत साथ ही हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब इसे मकर संक्रांति कहते हैं. इस दिन सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं, जिसे देवताओं का दिन भी कहा जाता है. उत्तरायण से खरमास समाप्त होता है और शुभ कार्यों की शुरुआत होती है. लेकिन इस बार संक्रांति को लेकर कुछ कंफ्यूजन की स्थिति है, आइए जानते हैं कब मनायी जाएगी मकर संक्रांति, क्या है मुहूर्त...
इस दिन मकर संक्रांति-मुहूर्त: इस बार संक्रांति का पुण्य काल 14 जनवरी को न मानकर 15 को माना जा रहा है. इसके पीछे बड़ी वजह ये भी है कि संक्रांति 14 को सुबह मिल ही नहीं रही है. जबकि 15 की सुबह स्नान और दान के लिए अच्छा समय है. बता दें, 14 जनवरी को शटतिला एकादशी पड़ रही है, क्योंकि एकादशी के मौके पर चावल नहीं खाना चाहिए और ना ही दान करना चाहिए. इसलिए संक्रांति पर खिचड़ी खाने और दान करने की परंपरा का निर्वहन भी 14 को नहीं हो पाएगा.

काशी हिंदू विश्वविद्यालय ज्योतिष विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विनय कुमार पांडेय का कहना है कि मकर संक्रांति का पुण्य काल 16 घंटे मान्य होगा, लेकिन स्नान दान और जप के लिए सिर्फ 7 घंटे रहेंगे. 15 जनवरी को सुबह से दोपहर 1:39 तक का समय संक्रांति पर्व के लिए अच्छा माना जा रहा. उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति 14 जनवरी को रात्रि लगभग 9:39 पर लगेगी, लेकिन संक्रांति का पुण्य काल सूर्योदय के बाद ही माना जाएगा.
उन्होंने बताया कि 14 जनवरी को रात में सूर्य के उत्तरायण होने के बाद रात की जगह अगले दिन सुबह ही इस पर्व को मनाना उचित होगा. इस दिन गुरुवार पड़ रहा और खिचड़ी का सेवन और दान भी पूरी तरह से शुभ फलदाई माना जाएगा. मकर संक्रांति सूर्य और शनि देव से जुड़ा पर्व है, इसमें सूर्य शनि देव के घर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. खिचड़ी शनिदेव को अति प्रिय है और यह नवग्रह का प्रतीक भी मानी जाती है जिससे ग्रहण का दोष शांत होता है.

14 को मना रहें संक्रान्ति तो बरतें ये सावधानियां: प्रोफेसर का कहना है कि कुछ लोगों के मन में इस बात को लेकर भी संशय है कि 14 जनवरी को संक्रांति अगर मानते भी हैं तो क्या इस दिन चावल का दान और उसका सेवन करना उचित होगा? पहली बात तो 14 संक्रांति के लिए उपयुक्त दिन नहीं है फिर भी यदि लोग मानते हैं तो उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि इस दिन शटतिला एकादशी का पर्व भी मनाया जाएगा, क्योंकि एकादशी के पर्व पर सनातन धर्म में चावल खाने पर प्रतिबंध होता और इसका दान भी नहीं किया जाता है. इसलिए उपयुक्त यही है इस दिन या गलती ना करें, क्योंकि श्री हरि विष्णु के एकादशी पर्व पर चावल खाने से पुण्य का नाश होता है और शारीरिक रूप से भी नुकसान होता है. ऐसे में 14 तारीख को एकादशी का पर्व मनाये चावल का सेवन न करें, भगवान श्री हरि की आराधना करें और 15 जनवरी को सुबह स्नान दान के साथ दोपहर 1:39 तक संक्रांति का पर्व मनाना अति उत्तम होगा.

संक्रान्ति पर इन चीजों का करें दान: ज्योतिषाचार्य ने बताया कि एकादशी पर तिल और गुड़ से बनी वस्तुओं का दान एवं सेवन करना ज्यादा फलदायी है. तिल मिश्रित जल से सूर्य देव को अर्घ्य देना विशेष पुण्यकारी माना जाता है. गुड़ का दान सूर्य ग्रह को बल देता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और आर्थिक उन्नति कराता है. इसके अलावा अनाज जैसे दाल चावल हल्दी और कुछ मान्यताओं में नमक का दान भी शुभ माना गया है, लेकिन ये संक्रांति के दिन करना ज्यादा उत्तम है.
ऐसे करें सूर्य देव की पूजा: मकर संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और भगवान विष्णु-सूर्य देव का ध्यान करें. इस दिन पवित्र नदी में स्नान करें. नहाने के बाद तांबे के लोटे में अक्षत और फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें. इस दौरान- ऊं सूर्याय नम: ऊं खगाय नम:, ऊं भास्कराय नम:, ऊं रवये नम:, ऊं भानवे नम:, ऊं आदित्याय नम: मंत्र का जाप करें. इसके बाद सूर्य स्तुति का पाठ करें.
मकर संक्रांति के दिन सुबह गंगा या सरोवर में स्नान करने के बाद संकल्प लेकर खिचड़ी, पापड़, देसी घी, मूली और अन्य खाद्य सामग्री में फल इत्यादि का दान किया जा सकता है. खाद्य सामग्री के साथ गर्म कपड़ों का दान भी करना शुभ फलदाई होता है. शास्त्रों में सूर्य देव को अर्घ देने की भी परंपरा है और इस दिन सूर्य को अर्घ्य देना अति फलदाई होता है. संक्रांति पर खिचड़ी दान करने से ग्रह दोष खत्म हो जाता है. खास तौर पर इस दिन उड़द दाल और चावल की खिचड़ी का दान करना चाहिए और इसी का सेवन भी करना चाहिए, लेकिन एकादशी होने की स्थिति में 14 जनवरी को खिचड़ी का दान न करें ना सेवन करें अगले दिन संक्रांति सुबह मिलने के बाद दोपहर 1:39 तक इसका दान और सेवन करें.
मांगलिक कार्यों के मुहूर्त: वहीं ऐसा भी माना जाता है कि संक्रांति होने के बाद 16 जनवरी से खरमास खत्म होता है और शुभ कार्यों खासतौर विवाह मुहूर्त की शुरुआत हो जाती है, लेकिन इस साल ऐसा नहीं होगा. ज्योतिषाचार्य का कहना है कि खरमास जारी है और संक्रांति के 15 जनवरी पूर्ण होने के बाद शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाएगी.
मकर संक्रांति के बाद देवगुरु बृहस्पति और शुक्र की शुभ स्थिति के बाद विवाह योग्य सक्रिय होंगे, लेकिन जनवरी के महीने में विवाह योग्य लग्न उपलब्ध नहीं है. फरवरी में 5, 6, 8, 10, 12, 14, 19, 20, 21, 24, 25 और 26 को विवाह के मुहूर्त हैं. वहीं मार्च के महीने में 2, 3, 4, 7, 8, 9, 11, और 12 को विवाह के मुहूर्त हैं, साथ ही अप्रैल, मई, जून, जुलाई में विवाह के मुहूर्त उपलब्ध हैं, लेकिन उसके बाद सीधे नवंबर और दिसंबर में ही विवाह के मुहूर्त मिलेंगे.
इस बारे में प्रोफेसर विनय कुमार पांडेय का कहना है कि 16 जनवरी को जरूर खरमास खत्म हो रहा है, लेकिन खरमास के खत्म होने के तुरंत बाद शुक्र उदय होगा. यह इस बार संभव नहीं है. उनका कहना है कि इस साल शुक्र का उदय 4 फरवरी को हो रहा है. जिसके बाद विवाह मुहूर्त की शुरुआत होगी, यानी खरमास खत्म होने के लगभग 20 दिन बाद विवाह और शुभ कार्यों की शुरुआत की जाएगी.
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